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यूपी में गहराते बिजली संकट से राहत, 48 घंटे में शुरू हुआ ढाई हजार मेगावाट से ज्यादा उत्पादन

Published: Fri, 18 Sep 2026 07:39 AM (IST)

पिछले 48 घंटों में कई तापीय इकाइयों से 2500 मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन शुरू होने से उत्तर प्रदेश में रात के समय बिजली संकट कम होने लगा है।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. पिछले 48 घंटों में 2500 मेगावाट से अधिक उत्पादन शुरू हुआ।

  2. रात में ग्रामीण और कस्बों में बिजली कटौती कम हुई।

  3. एक-दो दिन में बिजली आपूर्ति की स्थिति में सुधार होगा।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। 48 घंटे में कई तापीय यूनिटों से ढाई हजार मेगावाट से ज्यादा उत्पादन शुरू होने के साथ ही रात में बिजली का संकट घटने लगा है। शुक्रवार को तकरीबन एक हजार मेगावाट का उत्पादन और बढ़ने पर ग्रामीणों व कस्बों के निवासियों को रात में घंटों बिजली कटौती से नहीं जूझना पड़ेगा।

कोयला खदानों में पानी भरने से गीला होने के साथ ही कोयला की उपलब्धता घटने तथा तकनीकी दिक्कतों के चलते पिछले 15 दिनों से रात में चल रहे बिजली संकट में अब सुधार होता दिखने लगा है। पिछले दो दिनों में राज्य की तापीय परियोजनाओं की कई यूनिटों से फिर बिजली का उत्पादन शुरू हो गया है।

बुधवार को लगभग डेढ़ हजार मेगावाट की अनपारा, हरदुआगंज और ओबरा की यूनिटों से उत्पादन शुरू होने के बाद गुरुवार को घाटमपुर व जवाहरपुर की एक-एक यूनिट से भी एक हजार मेगावाट से ज्यादा राज्य को फिर बिजली मिलने लगी।

शुक्रवार को घाटमपुर की एक और यूनिट के साथ ही रोजा की बंद यूनिट से उत्पादन शुरू होने पर लगभग एक हजार मेगावाट और बिजली की उपलब्धता बढ़ जाएगा।

अपर मुख्य सचिव ऊर्जा व पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बताया कि बिजली की उपलब्धता में लगातार सुधार हो रहा है। उपलब्धता बढ़ने से रात में गांव से लेकर कस्बों में कम ही कटौती हो रही है।

एक-दो दिन में स्थिति में और सुधार होने पर रात में कहीं भी बिजली कटौती करने की नौबत ही नहीं जाएगी। डॉ. गोयल ने बताया कि पर्याप्त उपलब्धता न होने पर जहां रात में कटौती की जा रही है वहां दिन में अतिरिक्त बिजली देकर भरपाई सुनिश्चित की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों मांग से लगभग तीन हजार मेगावाट कम उपलब्धता होने से गांव में रात के वक्त तीन-चार घंटे बिजली की कटौती हो रही थी। दिन में अतिरिक्त आपूर्ति के बाद भी 14-15 घंटे ही बिजली ग्रामीणों को मिल पा रही थी।