UP में बिजली कंपनियों द्वारा किए गए मुकदमे से नहीं कम हो रही बिजली दरें, उपभोक्ता हित में ऊर्जा मंत्री से की गई खास मांग
उत्तर प्रदेश में बिजली कंपनियों द्वारा नियामक आयोग के फैसलों के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण (अपटेल) में दायर मुकदमों के कारण ...और पढ़ें

HighLights
बिजली कंपनियों ने नियामक आयोग के फैसलों को अपटेल में चुनौती दी।
मुकदमों के कारण उपभोक्ता दरें कम नहीं हो पा रही हैं।
उपभोक्ता परिषद ने ऊर्जा मंत्री से मुकदमे वापस लेने की मांग की।
-बिजली दरों पर नियामक आयोग के निर्णयों के खिलाफ अपटेल में लंबित हैं मुकदमे
-उपभोक्ता हित में ऊर्जा मंत्री से बिजली कंपनियों द्वारा किए गए मुकदमे वापस कराने की मांग
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। पिछले छह वर्षों में बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं होने के खिलाफ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन सहित सभी विद्युत वितरण कंपनियों ने विद्युत नियामक आयोग के निर्णयों के खिलाफ नई दिल्ली स्थित विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (अपटेल) में मुकदमे कर रखा है। यदि फैसला कंपनियों के पक्ष में आ गया तो प्रदेश के उपभोक्ताओं पर बिजली दरों में वृद्धि का बड़ा बोझ पड़ सकता है।
इन मुकदमों की वजह से ही बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का लगभग 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस धनराशि निकलने के बाद भी नियामक आयोग बिजली दरें कम नहीं कर पा रहा है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से मांग की है कि जनहित में बिजली कंपनियों द्वारा अपटेल में किए गए मुकदमे वापस कराएं।
उन्होंने बताया है कि विद्युत नियामक आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं की धनराशि निकलने पर भी बिजली दरें कम करने का निर्णय नहीं लिया जा सकता है, क्योंकि यह मामला अपटेल में विचाराधीन है। उन्होंने कहा है कि लगातार सातवें वर्ष भी बिजली दरें यथावत रहना पावर कारपोरेशन प्रबंधन को अच्छा नहीं लग रहा होगा। प्रबंधन फिर से मुकदमे की तैयारी में जुटा होगा।
ये मुकदमे भविष्य में उपभोक्ताओं के लिए बड़ा संकट बन सकते हैं। सात वर्षों से प्रदेश में बिजली दरें यथावत हैं तो इसका प्रमुख कारण परिषद की लड़ाई और उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर निकल रही सरप्लस धनराशि है। बिजली कंपनियों ने मुकदमों में नियामक आयोग द्वारा विभिन्न मदों में की गई कटौतियों को बहाल किए जाने की मांग की है।
ऊर्जा मंत्री से मांग की है कि वह पावर कारपोरेशन को निर्देश दें कि वह अपटेल में लंबित सभी मुकदमों व अपीलों को वापस ले। यदि नोएडा पावर कंपनी लि. (एनपीसीएल) से संबंधित मामले में विधिक कार्रवाई आवश्यक हो तो उच्चतम न्यायालय में उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अपील की जाए।
