लखनऊ, राज्य ब्यूरो। एक बार फिर बिजली उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से शुरू होगा। तमाम खामियों के चलते स्मार्ट मीटर पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच मीटर लगाने का काम रुक गया था। अब पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने में तय मानकों को सुनिश्चित किया जाएगा। किसी तरह की गड़बड़ी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए अप्रैल, 2018 में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन व भारत सरकार की संस्था ईईएसएल के मध्य समझौता हुआ था कि 40 लाख उपभोक्ताओं के परिसर पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। दोनों पक्षों ने एएमओयू पर हस्ताक्षर किए और परियोजना के तहत 12 शहरों व वाराणसी ग्रामीण में 11.47 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए थे। कारपोरेशन को तीन वर्षों में 20 हजार, 925 स्मार्ट मीटरों में खराबी की शिकायतें मिलीं। जांच में 13 हजार, 227 मीटर खराब पाए गए, जिन्हें बदला गया है। 

खराब मिले 13 हजार, 227 मीटर कुल स्थापित 11.47 लाख मीटरों का 1.16 प्रतिशत है। ज्ञात हो कि विद्युत प्रदाय संहिता 2005 के अनुसार ये नियम है कि लाइसेंसी की ओर से आपूर्ति कुल मीटर में खराब मीटरों की संख्या तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही ईईएसएल व मीटर निर्माताओं के मध्य हुए अनुबंध के अनुसार स्मार्ट मीटरों के 1.5 प्रतिशत से अधिक खराब होने पर पेनाल्टी का प्रविधान है।

गड़बड़ी मिली तो करेंगे कड़ी कार्रवाईः उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष एम देवराज ने कहा है कि विद्युत संहिता के मापदंडों का पालन किया जा रहा है। 28.53 लाख मीटर लगाए जाने में जहां भी नियमों के पालन में कमी मिलेगी वहां कड़ी कार्रवाई होगी। देवराज ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि विद्युत व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सहयोग करें, कारपोरेशन उनके हितों के लिए सजग है।

उच्च गुणवत्ता के लगाए जाएं स्मार्ट प्रीपेड मीटर : विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने गुरुवार को चेयरमैन एम देवराज से मिलकर अनुरोध किया कि जो भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाए वह उच्च तकनीक और गुणवक्ता के हों। उन्होंने भरोसा दिया कि स्मार्ट मीटर गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा। वर्मा ने बताया कि उपभोक्ता परिषद की मांग पर निगम ने मीटर खराब मिलने की बात उजागर की है, निगम कंपनी के खिलाफ कदम उठाए।

Edited By: Vikas Mishra