लखनऊ, जेएनएन। यूपी पुलिस ने इंटरनेट मीडिया पर रिस्पांस समय में सुधार किया है। पहले 15 मिनट का औसत समय लगता था अब यह घटकर आठ मिनट हो गया है। यूपी पुलिस को टैग कर की गई शिकायतों में से 638 मामलों में एफआइआर दर्ज हो चुकी है।

योगी सरकार के 100 दिन पूरा होने पर यूपी पुलिस ने भी अपनी उपलब्धियां बताई हैं। पुलिस ने भ्रामक खबरों के खंडन के लिए ट्विटर हैंडल यूपीपी वायरल चेक बनाया है। प्रदेश के जिलों से भी अपराध के संबंध में कुल 218 खबरों का खंडन किया गया है। इंटरनेट मीडिया पर अफवाह फैलाने से संबंधित पोस्ट के मामले में अब तक कुल 45 प्रकरणों में अलग-अलग जिलों में एफआइआर दर्ज कराई जा चुकी हैं।

बता दें कि गांवों से लेकर महानगरों तक होने वाली घटनाएं या बयानबाजी इंटरनेट मीडिया पर तूल पकड़ते देर नहीं लगती। इंटरनेट मीडिया के विविध प्लेटफार्म से जुड़े लोग घटना या बयानों की तह में नहीं जाते और न ही सत्यता पता करना जरूरी समझते हैं। इंटरनेट मीडिया के आरोप-प्रत्यारोप विवाद बढ़ा रहे हैं, इस पर यूपी पुलिस सख्ती से अंकुश लगाने की तैयारी में है। इसके लिए पुलिस ने फेसबुक पेज व इंस्टाग्राम अकाउंट शुरू किया है, जो लोगों को फैक्ट जांचने में मदद करेगा।

पुलिस महानिदेशक कार्यालय इंटरनेट मीडिया के प्लेटफार्म पर अफवाह व भ्रामक खबरों के खंडन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। अभी तक यूपी पुलिस ट्विटर हैंडल @UPPViralCheck से ही अफवाहों पर विराम लगाती आ रही है, अब फेसबुक पेज @UPPFactCheck व इंस्टाग्राम अकाउंट शुरू किया गया है। डीजीपी ने दोनों प्लेटफार्म के माध्यम से अफवाहों का खंडन किए जाने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस की ओर से कहा गया है कि लोग फेसबुक पेज व इंस्टाग्राम अकाउंट को टैग करके किसी भी भ्रामक खबर, वीडियो और फोटो पोस्ट के संबंध में जानकारी कर सकते हैं। कोई भी उक्त फेसबुक पेज के मैसेज बाक्स में किसी भी अफवाह फैलाने वाले व्यक्ति की गोपनीय सूचना भी दे सकता है।

फेसबुक पेज व इंस्टाग्राम पर मिलने वाली सूचनाओं का मुख्यालय स्थित सोशल मीडिया सेंटर की ओर से संज्ञान लेकर अफवाह और भ्रामक खबरों के खंडन के साथ-साथ ऐसी पोस्ट करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।

Edited By: Umesh Tiwari