विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

UP पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 24 बच्चों को ऑनलाइन शोषण से बचाया, बाल सुरक्षा के प्रति दिखाई प्रतिबद्धता

Published: Wed, 28 Oct 2026 06:11 PM (IST)

उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन यौन शोषण के जाल में फंसे 24 ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. साइबर क्राइम शाखा ने 24 बच्चों को ऑनलाइन शोषण से बचाया।

  2. NCMEC और I4C के समन्वय से हुई यह बड़ी कार्रवाई।

  3. आपत्तिजनक सामग्री बेचने वाले अपराधियों पर पुलिस की नजर।

डिजिटल डेस्‍क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय की साइबर क्राइम शाखा ने महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध साइबर स्पेस में होने वाले अपराधों पर एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस द्वारा जारी एक प्रेस नोट के अनुसार, ऑनलाइन यौन शोषण और उत्पीड़न के जाल में फंसे 24 बच्चों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।

अपराध का तरीका

प्रेस नोट में बताया गया है कि अपराधी अक्सर अपनी पहचान छिपाकर या पारिवारिक/पड़ोसी संबंधों का फायदा उठाकर बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं। ऐसे मामलों में बच्चों की आपत्तिजनक तस्वीरें या वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता है। बाद में इस सामग्री (जिसे Child Sexual Exploitation and Abuse Material (CSEAM) कहा जाता है) को वॉट्सएप, फेसबुक, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बेचा और फैलाया जाता है, जो कि बच्चों की गरिमा और अधिकारों का एक गंभीर उल्लंघन है।

पुलिस को कैसे मिलती है सूचना?

पुलिस ने बताया कि ऐसे अपराधों को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय किया जा रहा है।

NCMEC और साइबर टिपलाइन

अमेरिका स्थित संस्था 'नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन' (NCMEC) एक साइबर टिपलाइन चलाती है। मेटा, गूगल, और स्नैपचैट जैसी कंपनियां इस टिपलाइन पर संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करती हैं। अप्रैल 2024 से NCMEC और भारत के 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (I4C) के बीच एक समझौता है, जिससे भारत से जुड़ी रिपोर्ट्स सीधे I4C को मिलती हैं।

NCRP पोर्टल

इसके अलावा, गृह मंत्रालय द्वारा संचालित 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर भी लोग, अपनी पहचान गुप्त रखते हुए, शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश साइबर मुख्यालय की कार्रवाई

I4C और NCMEC से प्राप्त इन सूचनाओं का उत्तर प्रदेश साइबर मुख्यालय में गहराई से परीक्षण किया जाता है। इसके बाद मामले संबंधित जिलों को भेजे जाते हैं। अपराध की पुष्टि होने पर FIR दर्ज कर तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच की जाती है, जिसके परिणामस्वरूप अभियुक्तों की गिरफ्तारी सुनिश्चित होती है।

इस समन्वित कार्रवाई का ही नतीजा है कि प्रदेश भर से अब तक 24 बच्चों को रेस्क्यू किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बाल यौन शोषण और महिलाओं के विरुद्ध साइबर अपराधों को रोकने के लिए राज्य और जिले स्तर पर उनकी कार्रवाई निरंतर जारी है और बच्चों को एक सुरक्षित वातावरण देना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।