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महिला अपराध की FIR में अब नहीं चलेगी ‘अबला’ और ‘बेचारी’ जैसी भाषा, DGP ने बदले नियम

Published: Thu, 08 Oct 2026 11:59 PM (IST)

डीजीपी राजीव कृष्ण ने यौन अपराधों की विवेचना में पुलिस को पीड़िता के प्रति संवेदनशील और सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करने के निर्देश दिए हैं।

डीजीपी राजीव कृष्ण।

डीजीपी राजीव कृष्ण।

HighLights

  1. यौन अपराधों की विवेचना में पुलिस संवेदनशील भाषा का प्रयोग करेगी।

  2. 'बेचारी' जैसे शब्दों के बजाय 'पीड़िता' या 'शिकायतकर्ता' का उपयोग होगा।

  3. पीड़िता के चरित्र या पूर्व यौन इतिहास पर टिप्पणी नहीं की जाएगी।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। यौन अपराधों की विवेचना और दस्तावेजों में पुलिस को अब पीड़िता के प्रति संवेदनशील और सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करना होगा। डीजीपी राजीव कृष्ण ने पिछली 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में सभी पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि एफआइआर, केस डायरी, विवेचना संबंधी प्रपत्र, पुलिस रिपोर्ट और आरोपपत्र में लैंगिक रूप से संवेदनशील भाषा का इस्तेमाल किया जाए। डीजीपी के निर्देश दिया है कि पीड़िता के चरित्र, पहनावे, रहन-सहन, वैवाहिक स्थिति, गर्भावस्था या पूर्व यौन इतिहास से संबंधित अनावश्यक टिप्पणी न की जाए।

विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करने का आधार नहीं 

‘बेचारी महिला’, ‘असहाय अबला’ और ‘अभियोक्त्री’ जैसे शब्दों के स्थान पर ‘पीड़ित महिला’, ‘पीड़िता’, ‘उत्तरजीवी’ या ‘शिकायतकर्ता’ जैसे सम्मानजनक शब्द इस्तेमाल करने को कहा गया है। निर्देश में कहा गया है कि देरी से शिकायत करना अपने आप में शिकायत की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करने का आधार नहीं है।

इसी तरह, आरोपी को पहले से जानना, उसके साथ कहीं जाना या पूर्व संबंध होना सहमति का प्रमाण नहीं माना जाएगा। भय, चोट, धमकी या आरोपी को पहले से जानने की स्थिति में सहमति के निष्कर्ष से बचने को कहा गया है। डीजीपी ने सर्कुलर जारी करते हुए कहा आरोपपत्र दाखिल करने से पहले पर्यवेक्षण अधिकारी को 20 बिंदुओं की चेकलिस्ट के आधार पर जांच करनी होगी।

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इसमें तथ्य व साक्ष्य, पीड़िता की पहचान की गोपनीयता, भाषा, कानूनी धाराओं की शुद्धता तथा पीड़िता को उपलब्ध सहायता और पुनर्वास संबंधी कदम शामिल हैं।