लखनऊ, जेएनएन। कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष की ओर से लगातार हो रहे हमलों के बीच यूपी पुलिस ने अपना रिपोर्ट कार्ड जनता से बनवाया है। नौ शहरों में एक निजी कंपनी से कराए गए सर्वे में पहले की तुलना में कानून व्यवस्था में सुधार की बात तो जनता ने स्वीकारी है, लेकिन ईमान पर भरोसा पुलिस अब तक नहीं जीत सकी है। सर्वे के परिणामों को महकमा बेशक एक अपेक्षा के रूप में ले, लेकिन एक तरह से यह जनता की कसक ही है कि 82 फीसद लोगों ने पुलिस को ईमानदार हो जाने की नसीहत दी है।

दरअसल, गाजियाबाद में बरामदगी की रकम से 70 लाख रुपये की हेराफेरी में इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह चौहान समेत अन्य पुलिसकर्मियों की संलिप्तता व पीड़ितों से पुलिस उगाही की घटनाओं ने पुलिस की छवि पर काले दाग छोड़े हैं। डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि पुलिस की छवि व जनता की अपेक्षाओं को जानने के लिए एक निजी प्रतिष्ठित कंपनी से नवंबर 2018 से मार्च 2019 के बीच नौ शहरों में सर्वे कराया गया।

लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर, अयोध्या, मथुरा, आगरा, गौतमबुद्धनगर व झांसी के 44 थाना क्षेत्रों में 3625 लोगों में करवाए गए सर्वे में 82 फीसद लोगों ने अपेक्षा जताई कि पुलिस ईमानदार हो। 65 फीसद ने पुलिसकर्मियों के विनम्र होने व 56 फीसद ने निष्ठावान होने की अपेक्षा जताई, जबकि 35 फीसद ने सहानुभूति से सुनवाई किए जाने की अपेक्षा जताई। डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री ने बुधवार को एडीजी की बैठक में सर्वे पर आधारित बुकलेट रिलीज की। डीजीपी के अनुसार सर्वे में 77 फीसद लोगों ने पुलिस सेवाओं को संतोषजनक, अच्छी व अति उत्कृष्ट माना है।

ये भी आया सामने

  • 85 फीसद लोगों ने कहा, पिछले एक साल में खुद को अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
  • 70 फीसद ने व्यापार में अधिक सुरक्षा होने की बात मानी।
  • 87 फीसद महिलाओं ने खुद को पहले से अधिक सुरक्षित महसूस करने का उत्तर दिया।
  • 81 फीसद ने सार्वजनिक स्थानों पर अधिक सुरक्षित महसूस करने की बात कही।
  • 72 फीसद ने कहा राजमार्ग पहले से अधिक सुरक्षित हुए।
  • 68 फीसद बोले, रात में पहले से अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं।
  • 76 फीसद ने बच्चों के साथ व 82 फीसद ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ अपराधों में गिरावट की बात कही। 

Posted By: Umesh Tiwari

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