यूपी पुलिस में वसूली का खुलासा: दारोगा समेत 12 पुलिसकर्मी हटाए गए, सिपाही के वीडियो से मची खलबली
लखनऊ पुलिस लाइन में सिपाही सुनील कुमार शुक्ला द्वारा ड्यूटी के नाम पर वसूली के आरोप लगाने के बाद बड़ी ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

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जागरण संवाददाता, लखनऊ। पुलिस लाइन के सिपाही सुनील कुमार शुक्ला द्वारा वीडियो प्रसारित कर ड्यूटी के नाम पर वसूली के आरोप में सोमवार को बड़ी कार्रवाई हुई। गणना कार्यालय में तैनात एक दारोगा समेत कुल 12 पुलिसकर्मियों को हटा दिया गया। उनकी जगह पर दूसरे पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। लखनऊ पुलिस के एक्स हैंडल से यह जानकारी दी गई है।
वसूली और भ्रष्टाचार के मामले में दारोगा समेत 12 पुलिसकर्मी हटाए गए
अमेठी के गौरीगंज निवासी सुनील कुमार शुक्ला लखनऊ में पुलिस लाइन में आरक्षी थे। उन्होंने पुलिस लाइन में ड्यूटी लगाने, रायबरेली में चिकित्सा प्रतिपूर्ति के आवेदन में घूसखोरी समेत अन्य आरोपों का वीडियो बनाकर कई वीडियो प्रसारित किए थे। साथ ही यह भी कहा था कि पुलिस अफसरों की जांच पर उसे भरोसा नहीं है। वीडियो में सुनील ने ड्यूटी लगाने के नाम पर गणना कार्यालय में तैनात कर्मियों पर प्रति सिपाही दो हजार रुपये वसूलने की बात कही थी।
न्यायिक जांच कराने की हुई थी मांग
अपर पुलिस उपायुक्त लाइन को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई थी। सोमवार को इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए गणना कार्यालय में तैनात एक दारोगा, दो मुख्य आरक्षी समेत 12 पुलिसकर्मियों को हटा दिया गया। उनकी जगह अन्य कर्मियों को तत्काल प्रभाव से तैनात कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रकरण की जांच किसी भी प्रकार से प्रभावित न हो इस वजह से यह कार्रवाई की गई है।
जारी किए थे कई वीडियो, दबिश के लगाए थे आरोप
पहला वीडियो जारी करने के बाद सिपाही ने तीन अन्य वीडियो भी जारी किए। उसने लखनऊ पुलिस पर गृह जनपद स्थित आवास पर दबिश देने के भी आरोप लगाए थे। हालांकि, बाद में पता चला कि पुलिस नोटिस देने के लिए गई थी।
कंप्यूटरीकृत प्रणाली से लगेगी ड्यूटी
प्रकरण संज्ञान में आने के बाद अब गणना कार्यालय में ड्यूटी आवंटन की प्रकिया में भी बदलाव होने जा रहा है। कार्यालय में कंप्यूटरीकृत साफ्टवेयर आधारित प्रणाली स्थापित की जा रही है। इससे बिना किसी भेदभाव के पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जा सकेगी। साथ ही यह भी बताया गया कि प्रकरण की जांच समिति में पुलिस लाइन का पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारी शामिल नहीं है।
