लखनऊ, राज्य ब्यूरो।  भविष्य निधि घोटाले में आरोपित यूपी पावर कारपोरेशन के पूर्व एमडी एपी मिश्र को हजरतगंज पुलिस ने बुधवार को सीबीसीआइडी के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट क्षितिज पांडेय की कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने एपी मिश्र को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर 16 नवंबर तक के लिए जेल भेजने का आदेश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने एपी मिश्र के अलावा प्रकरण में पहले गिरफ्तार किये गये आरोपित पूर्व निदेशक (वित्त) सुधांशु द्विवेदी व ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव पीके गुप्ता की पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी पर सुनवाई की। हजरतगंज पुलिस सुधांशु व पीके गुप्ता को लेकर भी कोर्ट पहुंची थी। अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में आरोपित एपी मिश्र को सात नवंबर की सुबह 10 बजे से 10 नवंबर की सुबह 10 बजे तक के लिए ईओडब्ल्यू को पुलिस कस्टडी रिमांड पर दिये जाने की मंजूरी दी है। आरोपित पीके गुप्ता व सुधांशु द्विवेदी की पुलिस कस्टडी रिमांड छह नवंबर की शाम चार बजे से नौ नवंबर की शाम चार बजे तक के लिए मंजूर की गई है। 

भविष्य निधि घोटाले के मामले की छानबीन में जुटी आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) अब असुरक्षित निवेश की तह तक जाने की तैयारियों में जुट गई है। आरोपित एपी मिश्र, सुधांशु द्विवेदी व पीके गुप्ता की तीन-तीन दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर होने के बाद डीजी ईओडब्ल्यू डॉ.आरपी सिंह ने बुधवार देर शाम ही अहम बैठक की। गिरफ्तार तीनों आरोपितों का गुरुवार को आमना-सामना कराने से पहले ईओडब्ल्यू ने अपनी रणनीति बनाने के साथ ही सवालों की फेहरिश्त भी तैयार कर ली है। 25 से अधिक बिंदुओं पर तीनों से सवाल-जवाब किये जायेंगे।

 

ईओडब्ल्यू ने भविष्य निधि घोटाले में दर्ज एफआइआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं की बढ़ोत्तरी भी कर ली है। 4122.70 करोड़ के इस घोटाले की सीबीआइ जांच की संस्तुति किये जाने के बाद ईओडब्ल्यू ने सीरियस फ्राड इंवेस्टीगेशन आफिस (एसएफआइओ) से भी संपर्क साधा है और उन्हें प्रकरण की जानकारी दी गई है। जांच के कदम तेजी से बढ़ा रही ईओडब्ल्यू निजी कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनेंस कारपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफसीएल) के उन अधिकारियों से भी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है, जो बिजली विभाग के कर्मचारियों की भविष्य निधि की रकम का निवेश डीएचएफसीएल में कराने की डील में शामिल थे। हालांकि डीएचएफसीएल को नोटिस देने से पहले ईओडब्ल्यू आरोपित एपी मिश्र, सुधांशु त्रिवेदी व सचिव ट्रस्ट पीके गुप्ता से पूछताछ का इंतजार कर रही है। बताया गया कि ईओडब्ल्यू गुरुवार सुबह तीनों आरोपितों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू करेगी।

किसके इशारे पर किया गया था निवेश 

ईओडब्ल्यू ने आरोपित अधिकारियों से पूछताछ के लिए कड़ा होमवर्क किया है। शक्ति भवन स्थित ट्रस्ट कार्यालय से कब्जे में लिये गये दस्तावेजों के अध्ययन के आधार पर सवालों की सूची तैयार की गई है। बताया गया कि खासकर आरोपितों से यह जानने का प्रयास किया जायेगा कि निजी कंपनी में नियम विरुद्ध इतनी बड़ी रकम निवेश करने का निर्णय किसका था। इसके पीछे किनकी भूमिका थी। इसके अलावा 22 मार्च 2017 को हुई ट्रस्ट बोर्ड की बैठक को 24 मार्च 2017 को दिखाये जाने का सवाल सबसे बड़ा होगा। यह जानने का प्रयास होगा कि आखिर बैठक की तारीख किस इरादे से बदली गई थी और इसका लाभ किसको होने वाले था। निवेश की रकम व तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सिलसिलेवार पूछताछ की तैयारी है। उल्लेखनीय है कि ईओडब्ल्यू की जांच के दायरे में पावर कारपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष संजय अग्रवाल (वर्तमान में केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय के सचिव) समेत कई बड़ों की भूमिका है। माना जा रहा है कि तीनों आरोपितों से पूछताछ के बाद तत्कालीन अध्यक्ष संजय अग्रवाल से भी पूछताछ की जायेगी।

पांच साल तक एपी मिश्र बने रहे एमडी 

पावर कारपोरेशन के पूर्व एमडी एपी मिश्र सपा शासनकाल में लगातार पांच सालों तक इस पद पर काबिज रहे थे। छठवें साल भी उन्हें एमडी बनाये रखने के लिए कानून में बदलाव तक किया गया था। भविष्य निधि की रकम को निजी कंपनी में निवेश करने के लिए एपी मिश्र ने जो हड़बड़ी दिखाई, उसे लेकर भी जांच एजेंसी छानबीन के कदम बढ़ायेगी। 17 मार्च 2017 को ही निवेश की पहली किस्त ट्रांसफर किये जाने, इस्तीफा मंजूर होने के बाद भी ट्रस्ट बोर्ड की बैठक में शामिल होने को लेकर भी एपी मिश्र से पूछताछ होगी। 

Posted By: Umesh Tiwari

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