लखनऊ, जेएनएन। UP Panchayat Chunav 2021 Dates: उत्तर प्रदेश में गांव की सरकार यानी त्रिस्तरीय पंचायत को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा तथा सख्त निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मई, 2021 तक कराने की चुनाव आयोग की मांग अस्वीकार कर दी है। कोर्ट ने आयोग को 30 अप्रैल तक पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को 17 मार्च तक सीटों का आरक्षण पूरा करने का भी आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एमएन भंडारी व न्यायमूर्ति आरआर अग्रवाल की खंडपीठ ने विनोद उपाध्याय की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुरुवार को विनोद उपाध्याय की याचिका पर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तिथि निर्धारित कर दी है। सीटों का आरक्षण पूरा होने के बाद चुनाव मई तक कराने की जानकारी चुनाव आयोग ने कोर्ट को तीन फरवरी को दी थी। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-243 के तहत 13 जनवरी कार्यकाल समाप्त होने के पहले चुनाव करा लेना चाहिए था। कोर्ट ने आयोग व राज्य सरकार को समय देने की मांग अस्वीकार करते हुए गुरुवार को सुनवाई कर आदेश देने को कहा था। गुरुवार को कोर्ट ने 30 अप्रैल तक चुनाव कराने का निर्देश दिया है। जनता के वोट से सीधे होने वाले चुनावों के लिए यह आदेश दिया गया है। चुने हुए सदस्यों की ओर से चुनाव के संबंध में भी निर्देश दिए गए हैं। क्षेत्र पंचायत के चुनाव की कार्रवाई भी 15 मई 2021 तक पूरी की जानी है। 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को पंचायत चुनाव के लिए 17 मार्च तक आरक्षण का कार्य पूरा करने के निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रधान, जिला पंचायत सदस्यों और ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव की तिथियों को भी निर्धारित कर दिया है। कोर्ट ने इसके साथ ही निर्देश दिया है कि 30 अप्रैल तक ग्राम प्रधान, 15 मई तक जिला पंचायत सदस्य और 15 मई तक ही ब्लॉक प्रमुख के चुनाव कराएं। 

हाईकोर्ट याचिकाकर्ता विनोद उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते राज्य निर्वाचन आयोग के रुख से काफी नाराज हुआ और चुनाव कराने की तिथियों का ऐलान करते हुए सख्त आदेश दिया। विनोद उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग से जवाब मांगा था। चुनाव आयोग के कार्यक्रम पेश करने के बाद आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था, जिस पर गुरुवार को सुनवाई हुई। दरअसल चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट में जो कार्यक्रम पेश किया था, उसमें चुनाव मई तक होने की बात सामने आई। इस पर हाईकोर्ट ने साफ कहा कि पंचायत चुनाव मई में कराने का प्रस्ताव प्रथम दृष्टया स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि नियमानुसार 13 जनवरी 2021 तक चुनाव पूरे करा लिए जाने थे। हाईकोर्ट ने कार्यक्रम को संवैधानिक उपबंधों के विपरीत मानते हुए अस्वीकार कर दिया।

चुनाव आयोग ने अपने कार्यक्रम में हाईकोर्ट को बताया कि बीती 22 जनवरी को पंचायत चुनाव की मतदाता सूची तैयार हो गई है। 28 जनवरी तक परिसीमन का काम भी पूरा कर लिय गया है, लेकिन सीटों का आरक्षण राज्य सरकार को फाइनल करना है। इसी कारण अब तक चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं किया जा सका है। आयोग ने बताया कि सभी सीटों का आरक्षण पूरा होने के बाद चुनाव में 45 दिन का समय लगेगा।

हाईकोर्ट ने 15 मई तक सभी पंचायतों के गठन का आदेश दिया है। याची ने 13 जनवरी तक पंचायत चुनाव संपन्न न कराने के चलते अर्जी दाखिल की थी। याचिका में पांच साल के भीतर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया संपन्न न कराने को आर्टिकल 243 (ई) का उल्लंघन बताया था। सरकार ने कोविड के चलते पंचायत चुनाव समय से पूरा नहीं करा पाने की वजह बताई थी।

एडवोकेट जनरल राघवेंद्र सिंह और एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने सरकार का पक्ष रखा। याची की तरफ से अधिवक्ता पंकज कुमार शुक्ला ने पक्ष रखा। इस दौरान हाईकोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग के रुख से काफी नाराज हुआ और चुनाव कराने की तिथियों का ऐलान करते हुए सख्त आदेश दिया।

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Edited By: Dharmendra Pandey