विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यूपी में पंचायतों में रुके विकास कार्यों को मिलेगी गति, विभाग ने तय किए प्रशासकों के अधिकार और सीमाएं

Published: Wed, 09 Sep 2026 07:56 AM (IST)

पंचायती राज विभाग ने जिला व क्षेत्र पंचायतों के प्रशासकों के अधिकारों पर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिससे रुके हुए विकास कार्य अब तेजी से हो सकेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

HighLights

  1. प्रशासक जिलाधिकारी की अनुमति से पुराने कार्य करा सकेंगे।

  2. रूटीन कार्यों के तहत कर्मचारियों का वेतन भुगतान करेंगे।

  3. दिशानिर्देशों से ग्रामीण विकास कार्यों में तेजी आएगी।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रशासकों के अधिकारों के संबंध में स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं होने से क्षेत्र व जिला पंचायतों में बाधित विकास कार्य अब तेजी से हो सकेंगे। पंचायती राज विभाग ने कार्यकाल समाप्त होने पर जिला पंचायतों व क्षेत्र पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए गए निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों व ब्लाक प्रमुखों के कार्यों व अधिकारों का निर्धारण कर दिया है।

प्रशासक पहले से चल रहे वे कार्यों का मूल्यांकन कराते हुए उसका भुगतान कर सकेंगे। बोर्ड द्वारा पहले से अनुमोदित वे कार्य जिनका टेंडर व निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, ऐसे मामलों में जिलाधिकारी की अनुमति से आगे की कार्यवाही शुरू कर सकेंगे। रूटीन कार्यों के तहत कर्मचारियों का वेतन भुगतान भी करेंगे।

नीतिगत विषयों पर क्षेत्र पंचायतों के प्रशासक जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेजेंगे जबकि जिला पंचायतों के प्रशासक जिलाधिकारी के माध्यम से प्रस्ताव शासन को भेजेंगे। पंचायत चुनाव के बाद नई जिला व क्षेत्र पंचायतों का गठन होने तक प्रशासक शासकीय व प्रशासकीय बैठकें नहीं बुला सकेंगे।

बहुत जरूरी होने पर अधिकारियों के साथ योजनाओं की प्रगति व समीक्षा के लिए बैठकें करेंगे। क्षेत्र पंचायतों के प्रशासक इन बैठकों का कार्यवृत्त तैयार कर जिलाधिकारी को देंगे। वहीं जिला पंचायतों के प्रशासक ऐसे मामलों में कार्यवृत्त जिलाधिकारी व शासन को भेजेंगे।

प्रशासक नियुक्त होने से पूर्व बोर्ड से अनुमोदित ऐसे कार्य जिनका टेंडर व निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया है, ऐसे कार्यों में जिलाधिकारी के अनुमोदन से ही आगे कोई कार्यवाही कर सकेंगे। किसी नीति, नियम तथा न्यायालयों के आदेशों से जुड़े कार्यों के लिए भी क्षेत्र पंचायतों के प्रशासकों को जिलाधिकारी की अनुमति लेनी होगी।

जिला पंचायतों के प्रशासक ऐसे मामलों में प्रस्ताव जिलाधिकारी के माध्यम से संबंधित मंडलायुक्त को स्वीकृति के लिए भेजेंगे। मंडलायुक्त द्वारा प्रस्ताव पर 15 दिनों के अंदर निर्णय लेते हुए संबंधित जिला पंचायत को अवगत कराया जाएगा।

ऐसी क्षेत्र पंचायतेंं जहां पहले से प्रशासनिक समिति गठित हो अथवा निवर्तमान अध्यक्ष व प्रमुख के विरुद्ध किसी मामले में दोषी पाए गए हैं, वहां पर शासन द्वारा संबंधित उप जिलाधिकारी को प्रशासक नामित करने के लिए जिलाधिकारी को अधिकृत किया जाएगा।

गौरतलब है प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार ने 11 जुलाई को कार्यकाल समाप्त होने पर निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों तथा 19 जुलाई को कार्यकाल समाप्त होने पर निवर्तमान ब्लाक प्रमुखों को ही प्रशासक नियुक्त किए जाने का आदेश जारी किया था।

ब्लॉक प्रमुख संघ के प्रदेश अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह सेनानी ने प्रशासकों के अधिकारों पर दिशानिर्देश जारी किए जाने पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।कहा है कि दिशा निर्देश जारी होने से ग्रामीण क्षेत्रों के रुके हुए विकास कार्य अब तेजी से हो सकेंगे।

यह भी पढ़ें- प्यार, पंचायत और पुलिस...Kanpur में दोगुनी उम्र की शादीशुदा प्रेमिका से इश्क पड़ा भारी, बंधक बना दो दिन जमकर पीटा गया