लखनऊ, राज्य ब्यूरो: बिजली महंगी होने की उल्टी गिनती जल्द शुरू होने वाली है। वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) एवं बिजली दरों में बढ़ोतरी संबंधी प्रस्ताव में कमियों पर बिजली कंपनियों ने बुधवार को विद्युत नियामक आयोग में जवाब दाखिल कर दिया। अब प्रस्ताव स्वीकारने से अधिकतम 120 दिनों में आयोग बिजली की नई दरें घोषित कर देगा। इस बीच जवाब को आधा-अधूरा बताते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग से प्रस्ताव न स्वीकारने के लिए कहा है।

वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बिजली कंपनियों ने पिछले दिनों 18 से 23 बिजली की दरें बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव आयोग में दाखिल किया था। प्रस्ताव में तमाम कमियों पर आयोग ने कंपनियों से जवाब-तलब किया था। इस पर कंपनियों ने जवाब तो आयोग को दिए हैं, लेकिन उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि कंपनियों ने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को न मानते हुए आधे-अधूरे जवाब ही दिए हैं। 

वर्ष 2021-22 ट्रू-अप याचिका पर आयोग ने कंपनियों से सीएजी ऑडिट रिपोर्ट तलब की तो कंपनियों ने रिपोर्ट न मिलने की बात कही। कंपनियां, एक तरफ मुआवजा कानून को टेस्टिंग के दौर में बताती हैं वहीं जवाब यह भी देती हैं कि उपभोक्ताओं ने मुआवजा ही नहीं। 

वर्मा का कहना है कि उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर लगभग 25,133 करोड रुपये ज्यादा निकल रहा है ऐसे में बिजली दरों में बढ़ोतरी किस आधार पर की जा सकती है? कंपनियों ने सरकारी सब्सिडी का उपभोक्ता श्रेणी वार कोई ब्रेकअप भी नहीं दिया है। ऐसे में टैरिफ का निर्धारण कैसे किया जा सकता है?

Edited By: Shivam Yadav