विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यूपी के MSME सेक्टर की यूरोप में होगी डायरेक्ट एंट्री, योगी सरकार और जर्मन बिजनेस अलायंस के बीच अहम समझौता

Published: Wed, 02 Sep 2026 09:58 PM (IST)

योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के एमएसएमई को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए जर्मन इंडियन बिजनेस अलायंस (जीआईबीए) के ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. यूपी एमएसएमई और जर्मन अलायंस के बीच समझौता।

  2. प्रदेश के उद्यमों को जर्मनी-यूरोपीय बाजार में प्रवेश।

  3. गाजियाबाद सीएफसी का जर्मन तकनीक से आधुनिकीकरण।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। योगी सरकार उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में बुधवार को इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम के तहत एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग तथा जर्मन इंडियन बिजनेस अलायंस (जीआईबीए) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश के निर्यातोन्मुखी उद्यमों को जर्मनी व यूरोपीय बाजार में प्रवेश के लिए तैयार करना है। यह सहयोग गैर-वित्तीय, गैर-बाध्यकारी और गैर-अनन्य स्वरूप का है।

प्रमुख सचिव एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि भूषण लाल ने इस अवसर पर कहा कि वर्ष 2026 भारत-जर्मनी संबंधों के लिए ऐतिहासिक वर्ष है, क्योंकि इस वर्ष दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष और रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जर्मनी यूरोपीय संघ में भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और भारत में 2000 से अधिक जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं। प्रदेश में विनिर्माण इकाइयों और निर्यात के लिए तैयार एमएसएमई का मजबूत आधार है, जिनमें यूरोपीय बाजार में विस्तार की बड़ी क्षमता है। उन्होंने इस कार्यक्रम को 12 महीने के संरचित रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें उद्यम मूल्यांकन, बाजार सत्यापन, स्थापना और प्रवेश के बाद सहायता जैसे चरण शामिल होंगे।

जर्मनी के राउनहाइम शहर के मेयर डेविड रेंडेल ने कहा कि इस साझेदारी को कागजी कार्रवाई से मुक्त और व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। इसकी सफलता कार्यक्रमों की संख्या से नहीं, बल्कि नए व्यावसायिक समझौतों, भारतीय कंपनियों द्वारा जर्मनी में उपस्थिति और जर्मन कंपनियों द्वारा उत्तर प्रदेश में परियोजनाएं शुरू करने जैसे ठोस परिणामों से मापी जानी चाहिए। उन्होंने इनोवेशन हब राइन-मेन को जर्मनी में संस्थागत आधार और जीआईबीए को भारतीय पक्ष में समन्वयक के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

एमओयू के तहत उत्तर प्रदेश के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान, पात्र उद्यमों को कार्यक्रम की जानकारी देना, राज्य सरकार की योजनाओं के साथ समन्वय और उद्यमों की तैयारी में सहायता जैसे कार्यों पर फोकस होगा। इसके साथ ही गाजियाबाद कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) के आधुनिकीकरण में जर्मन तकनीक, गुणवत्ता, परीक्षण एवं प्रमाणन संबंधी मार्गदर्शन और जर्मन प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ संपर्क बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा। जर्मन आयात मानकों, यूरोपीय संघ के व्यापार नियमों, टैरिफ और निर्यात दस्तावेजीकरण जैसे विषयों पर संयुक्त कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। यह एमओयू तीन वर्ष तक प्रभावी रहेगा।

कार्यक्रम में इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद, उद्योग आयुक्त के.वी. पंडियन, सहायक महाप्रबंधक रितेश सक्सेना, यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन के एमडी हिमांशु कौशिक, इनोवेशन हब राइन-मेन के सीईओ स्टीफन विट्टेकिंड और जीआईबीए के चेयरमैन सेल्वकुमार पेरियासामी सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।