विधान परिषद की 10 सीटों पर सियासी बिसात, UP विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा-सपा के सामने कुनबा बचाने की चुनौती
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव भाजपा और सपा दोनों के लिए 2027 ...और पढ़ें
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HighLights
विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव दिसंबर में संभावित।
भाजपा-सपा के लिए 2027 विधानसभा चुनाव से पहले परीक्षा।
क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक समीकरण बदलने की आशंका।
शोभित श्रीवास्तव, लखनऊ। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 10 सीटों का चुनाव विधायकों की निष्ठा और दलों की एकजुटता की भी परीक्षा लेगा। विधान परिषद के इस चुनाव में भाजपा और सपा दोनों दलों के सामने अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती होगी।
दिसंबर में संभावित इस चुनाव में केवल उच्च सदन में संख्या बल बढ़ाने की कवायद नहीं होगी, बल्कि टिकट की दावेदारी और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों की भी परख होगी।
विधानसभा क्षेत्र कोटे की 10 एमएलसी सीटों पर निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल अगले वर्ष 30 जनवरी को पूरा हो रहा है। वर्ष 2021 में यह चुनाव जनवरी में हुआ था किंतु इस बार विधान सभा चुनाव होने हैं इसलिए यह तय माना जा रहा है कि नवंबर में कार्यक्रम घोषित कर दिसंबर में चुनाव करा लिए जाएंगे।
बदल सकता है चुनावी गणित
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले हुए राज्यसभा चुनाव में भी सपा के विधायकों ने क्रास वोटिंग की थी। इस बार विधानसभा चुनाव से पहले एमएलसी चुनाव होंगे। इस चुनाव में टिकट की दावेदारी और राजनीतिक भविष्य की चिंता भी विधायकों के रुख को प्रभावित कर सकती है। अतिरिक्त उम्मीदवार उतारे जाने और क्रास वोटिंग की स्थिति में चुनावी गणित बदल सकता है।
विधानसभा में इस समय भाजपा के 255 और सपा के 101 विधायक हैं। सहयोगी दलों और अन्य समर्थक विधायकों को मिलाकर भाजपा गठबंधन की संख्या 291 है। तीन असंबद्ध विधायकों को मिलाकर इनकी संख्या 294 हो जाती है।
इस संख्या बल के आधार पर भाजपा गठबंधन आठ सीटें जीतने की स्थिति में है जबकि नौवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन और वरीयता मतों के समीकरण साधने होंगे। दूसरी ओर, सपा के वर्तमान में 101 विधायक हैं। दो कांग्रेस के भी यदि मिला लिए जाएं तो इनकी संख्या 103 होती है। किंतु इन्हें भी तीसरी सीट की दावेदारी के लिए अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।
एमएलसी की इन सीटों के चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता के वोटों का कोटा माना जा रहा है। इस हिसाब से सपा को तीन सीट के लिए 111 वोटों की जरूरत होगी। पार्टी को कम से कम आठ अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे। यही कारण है कि इस चुनाव में दोनों दलों की रणनीति पर भी निगाहें रहेंगी। यह चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले दलों के संगठनात्मक प्रबंधन और राजनीतिक समीकरणों की परीक्षा बन सकता है।कार्यकाल एवं विधानसभा स्थिति
कार्यकाल समाप्ति: 30 जनवरी
| क्र. सं. | दल | सदस्य का नाम |
|---|---|---|
| 1 | भाजपा | कुंवर मानवेन्द्र सिंह |
| 2 | डा. धर्मेन्द्र सिंह | |
| 3 | स्वतंत्र देव सिंह | |
| 4 | अरविंद कुमार शर्मा | |
| 5 | अश्विनी त्यागी | |
| 6 | गोविंद नारायण शुक्ल | |
| 7 | धर्मवीर प्रजापति | |
| 8 | सलिल विश्नोई | |
| 9 | डा. सुरेन्द्र चौधरी | |
| 10 | सपा | राजेंद्र चौधरी |
विधानसभा की दलवार स्थिति
| क्र. सं. | दल / श्रेणी | सीटें |
|---|---|---|
| 1 | भाजपा | 255 |
| 2 | सपा | 101 |
| 3 | अपना दल (सोनेलाल) | 13 |
| 4 | रालोद | 09 |
| 5 | सुभासपा | 06 |
| 6 | निषाद पार्टी | 05 |
| 7 | कांग्रेस | 02 |
| 8 | जनसत्ता दल लोकतांत्रिक | 02 |
| 9 | असंबद्ध | 03 |
| 10 | रिक्त | 07 |
| - | कुल | 403 |
