एमएलसी चुनाव में जिताऊ रणनीति बनाने में चूकी भाजपा, परिणामों ने बढ़ाई धड़कन; सपा ने कैसे दी टक्कर?
उत्तर प्रदेश एमएलसी चुनाव में भाजपा को क्लीन स्वीप का लक्ष्य हासिल नहीं हो सका, जिससे पार्टी की चुनौतियां बढ़ ...और पढ़ें

HighLights
भाजपा एमएलसी चुनाव में क्लीन स्वीप का लक्ष्य चूकी।
सपा ने स्नातक व शिक्षक सीटों पर मजबूत पकड़ बनाई।
पार्टी कार्यसमिति बैठक में प्रदर्शन पर होगी चर्चा।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधान सभा चुनाव का सेमीफाइनल कहलाने वाले एमएलसी चुनाव के परिणामों ने भाजपा की चुनौती बढ़ा दी है। स्नातक व शिक्षक कोटे की सभी 11 सीटों पर क्लीन स्वीप का लक्ष्य लेकर उतरी भाजपा बड़ी मुश्किल से प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बना सकी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी खंड की शिक्षक सीट भाजपा हार गई, जबकि स्नातक का परिणाम देर रात तक फंसा रहा।
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र गोरखपुर में भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को जीतने में पसीने छूट गए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी पहली परीक्षा में पर्याप्त अंक नहीं जुटा सके, जबकि लंबे समय से प्रदेश महामंत्री (संगठन) पद पर कार्यरत धर्मपाल सिंह की रणनीति भी प्रभाव नहीं छोड़ सकी। इस अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन पर 30 अक्टूबर को लखनऊ में होने वाली प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में भी चर्चा होगी।
भाजपा नेतृत्व ने साफ कहा था कि पार्टी एमएलसी चुनाव को लोकसभा और विधान सभा चुनाव की तरह लड़ेगी। पूरी ताकत झोंकते हुए मंत्रियों व संगठन के पदाधिकारियों को क्षेत्रों में डेरा डालने के लिए कहा गया लेकिन परिणामों से संकेत मिलता है कि भाजपा कार्यकर्ता मैदान में पूरे मनोयोग से नहीं उतरे। यूजीसी प्रकरण का भी असर पड़ने की चर्चा की जा रही है।
गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक सीट पर भाजपा के ध्रुव कुमार त्रिपाठी कांटे की टक्कर में निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव को सिर्फ 307 वोटों से हरा सके। भाजपा के बागी संजयन त्रिपाठी को सपा ने टिकट दिया था, लेकिन परिणाम बताता है कि सपा का वोटर निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव के साथ जुड़ा। लखनऊ खंड की शिक्षक सीट से भाजपा के उमेश द्विवेदी लगातार तीसरी बार जीत गए, लेकिन स्नातक सीट पर गुटबाजी से घिरी पार्टी गच्चा खा गई। सपा की कांति सिंह ने भाजपा के एमएलसी अवनीश सिंह को भारी अंतर से हरा दिया।
दूर तक जाएगा संदेश
वाराणसी खंड की शिक्षक सीट पर भाजपा के प्रमोद मिश्रा के पक्ष में दिग्गजों ने जमकर प्रचार किया, लेकिन सपा के लाल बिहारी यादव की रणनीति ने उन्हें फिर जीत दिला दी। यहां स्नातक सीट पर सपा के आशुतोष सिन्हा देर रात तक भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह से आगे चल रहे थे। पहली परीक्षा में भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष अशोक चौरसिया अंक नहीं बटोर पाए। वाराणसी के परिणामों से निकला राजनीतिक संदेश दूर तक जाएगा।
इलाहाबाद-झांसी खंड पर स्नातक सीट से वर्तमान एमएलसी व सपा के डा. मान सिंह यादव भाजपा की रणनीति को भेदते हुए एक बार फिर सीट जीतने में कामयाब हुए। भाजपा ने अशोक राठौर को टिकट दिया था, जबकि यहां से शिक्षक संघ के नेता और पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी उम्मीद लगाए बैठे थे।
झांसी के रहने वाले कानपुर-बुंदेलखंड के क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू का भी पहली परीक्षा में अनुभव खट्टा रहा। आगरा खंड की शिक्षक सीट के लिए पहले से मजबूत माने जा रहे आकाश अग्रवाल भाजपा से टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने हरिकिशोर तिवारी को मैदान में उतार दिया। सपा ने मौके का फायदा उठाते हुए आकाश को प्रत्याशी बनाकर सफल कार्ड खेला।
आकाश ने भाजपा की रणनीतिक धार कुंद कर अप्रत्याशित जीत दर्ज की। हालांकि मेरठ खंड शिक्षक एवं स्नातक दोनों सीटों पर भाजपा के एमएलसी श्रीचंद शर्मा व दिनेश गोयल अपनी सीट बचाने में सफल रहे। बरेली-मुरादाबाद खंड की शिक्षक सीट पर भाजपा के एमएलसी हरि सिंह ढिल्लो ने बड़ी जीत दर्ज कर भगवा फहराया।
