यूपी में 'कृषक उपहार योजना' के नियमों में बदलाव, अब टीवी की जगह किसानों को मिलेंगी खेती की मशीनें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 'मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना' में संशोधन किए हैं, जिसके तहत अब किसानों को मनोरंजन के साधनों ...और पढ़ें

HighLights
टीवी की जगह अब चारा काटने की मशीन मिलेगी।
छोटे ट्रैक्टर और सोलर पावर पैक भी उपहार सूची में।
किसानों को मुफ्त प्लास्टिक क्रेट, छात्रों की स्कॉलरशिप बढ़ी।
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने किसानों की व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 'मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना' के तहत बांटे जाने वाले इनामों में अहम संशोधन किए हैं। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के नए फैसले के अनुसार, अब लकी ड्रॉ में मनोरंजन के साधनों के बजाय खेती और पशुपालन में सीधे तौर पर काम आने वाले उपकरण दिए जाएंगे।
उपहारों में हुए मुख्य बदलाव
- टीवी की जगह चारा मशीन: अब 43 इंच की एलईडी टीवी के स्थान पर लगभग 30 हजार रुपये कीमत की 3 हॉर्स पावर (HP) वाली चारा काटने की मशीन दी जाएगी। हर संभाग में यह मशीन 3 किसानों को मिलेगी, जिससे पशुपालन में उनका श्रम बचेगा।
- पंपिंग सेट और स्प्रेयर बरकरार: पहले की तरह ही 55 हजार रुपये कीमत का 8 HP पंपिंग सेट (हर संभाग में 2) और 5 हजार रुपये का पावर स्प्रेयर उपहार सूची में बने रहेंगे।
बंपर ड्रॉ की नई श्रेणियां
- प्रथम उपहार: 35 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर।
- द्वितीय उपहार: भारी पावर टिलर (11 किलोवाट/13.7 HP) की जगह अब 20 HP से कम क्षमता वाला छोटा ट्रैक्टर दिया जाएगा।
- तृतीय उपहार: पावर टिलर या रीपर के स्थान पर 100 सीसी की मोटरसाइकिल दी जाएगी।
- चतुर्थ उपहार: इस नई श्रेणी में सोलर पावर पैक संयंत्र को शामिल किया गया है।
मुफ्त प्लास्टिक कैरेट और बढ़ी हुई छात्रवृत्ति
फसलों और सब्जियों को खराब होने से बचाने के लिए मंडी परिषद किसानों को कुल 4,400 प्लास्टिक कैरेट (टोकरियां) मुफ्त बांटेगी। 'क' से 'घ' श्रेणी की मंडियों में किसानों की संख्या के आधार पर क्रमशः 2000, 1000, 800 और 600 कैरेट का वितरण होगा। उपज ढंकने के लिए व्यापारियों को प्लास्टिक शीट भी दी जाएगी।
शिक्षा और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए, कृषि विश्वविद्यालयों से स्नातक कर रहे छात्रों की स्कॉलरशिप 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दी गई है। इसके अलावा, मंडी परिसर में किसी भी दुर्घटना या आग लगने पर आर्थिक मदद का भी प्रावधान किया गया है। मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक, इन सभी बदलावों का मुख्य उद्देश्य किसानों, व्यापारियों और छात्रों को अधिकतम और व्यावहारिक लाभ पहुंचाना है।
