यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में दुनिया देखेगी अवध से लेकर बुंदेलखंड तक की झलक, व्यापार और संस्कृति का होगा महासंगम
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (25-29 सितंबर) में व्यापार, निवेश और पर्यटन के साथ उत्तर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति का अनूठा ...और पढ़ें

HighLights
काशी, अवध, बुंदेलखंड की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी मुख्य आकर्षण।
लोक कलाएं, शास्त्रीय संगीत वैश्विक मंच पर प्रदर्शित होंगी।
निवेश और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम।
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश अपनी औद्योगिक और व्यापारिक क्षमताओं के साथ-साथ अब अपनी सांस्कृतिक ताकत को भी वैश्विक मंच पर मजबूती से पेश कर रहा है। योगी सरकार की पहल पर 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले 'यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो' में इस बार व्यापार, निवेश और पर्यटन के साथ प्रदेश की बहुरंगी संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। इस महाआयोजन में देश-दुनिया से आने वाले निवेशकों और उद्यमियों के सामने यूपी की लोक कलाओं, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और समृद्ध परंपराओं की भव्य झलक प्रस्तुत की जाएगी, जो प्रदेश की 'ग्लोबल ब्रांडिंग' को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
शंख वादन और वैदिक मंगलाचरण से होगा भव्य आगाज
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की पांच दिवसीय शृंखला की शुरुआत 25 सितंबर को काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ होगी। वाराणसी के विशाल कुमार के शंख वादन और वैदिक मंगलाचरण से इस आयोजन का शुभारंभ होगा। उद्घाटन के दिन नोएडा के पं. चेतन जोशी का वाद्य संगीत, लखनऊ की अलोकनिशा श्रीवास्तव का कथक नृत्य, प्रयागराज की पूर्णिमा का ढेढ़िया लोक नृत्य और वृंदावन की आरती खेतपाल की सुमधुर भजन प्रस्तुति दर्शकों को उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक व शास्त्रीय जड़ों से जोड़ेगी।
भोजपुरी मिठास, बुंदेली राई नृत्य और स्टार नाइट्स का तड़का
आयोजन के दूसरे और तीसरे दिन विविधता से भरे कार्यक्रम होंगे। 26 सितंबर को दिल्ली के पं. रविशंकर व पं. ऋषि शंकर उपाध्याय की पखावज जुगलबंदी के साथ मिर्जापुर की कुसुम पांडेय और जौनपुर के अवनीश तिवारी का भोजपुरी लोक गायन गूंजेगा। साथ ही मथुरा का लोक नृत्य और सुल्तानपुर की निष्ठा शर्मा की 'स्टार नाइट' भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। वहीं, 27 सितंबर को सैक्सोफोन वाद्य संगीत, भजन, और झांसी का प्रसिद्ध राई लोक नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा, जिसका समापन एक भव्य स्टार नाइट के साथ होगा।
थारू जनजातीय नृत्य और सूफी-गजल की रूहानी शाम
28 सितंबर का दिन यूपी की लोककथाओं और जनजातीय संस्कृति के नाम रहेगा। महोबा के जितेंद्र चौरसिया आल्हा गायन से वीर रस घोलेंगे, तो पीलीभीत के कलाकार थारू जनजातीय नृत्य की अनोखी छटा बिखेरेंगे। इसी शाम सुल्तानपुर की रूपाली जोग्गू की सूफी नाइट रूहानी माहौल तैयार करेगी। 29 सितंबर को समापन समारोह में वाराणसी के पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्रा का सितार वादन और लखनऊ के कमाल खान का गजल गायन मुख्य आकर्षण होगा। गाजियाबाद की मिताली सैनी का कथक और ‘कथक ऑफ इंडिया/यूपी’ की विशेष कोरियोग्राफ्ड प्रस्तुति के साथ इस पांच दिवसीय महाकुंभ का समापन होगा।
वैश्विक मंच पर गूंजेगी 'लोकल से ग्लोबल' की धुन
योगी सरकार का यह प्रयास उत्तर प्रदेश को केवल एक औद्योगिक हब के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। ट्रेड शो के मंच से काशी, मथुरा, वृंदावन, बुंदेलखंड, अवध, पूर्वांचल और तराई अंचलों की कलाकृतियां और प्रस्तुतियां सीधे विदेशी मेहमानों तक पहुंचेंगी। यह आयोजन साबित करता है कि उत्तर प्रदेश अपनी विकास यात्रा में अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर चल रहा है।
