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योगी सरकार की 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए विशेष सहायता योजना, कौशल और शिक्षा पर होगा फोकस

Published: Wed, 07 Jan 2026 06:41 PM (IST)

उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के सर्वांगीण पुनर्वासन के लिए स्वैच्छिक संस्थाओं (NGOs) को सीधे सहायता अनुदान देने का निर्णय ...और पढ़ें

दिव्यांगजन सशक्तीकरण पर योगी सरकार का विशेष फोकस

दिव्यांगजन सशक्तीकरण पर योगी सरकार का विशेष फोकस

HighLights

  1. दिव्यांगजनों के पुनर्वासन हेतु NGOs को सीधा सहायता अनुदान।

  2. 21 प्रकार की दिव्यांगताओं पर केंद्रित शिक्षा, कौशल विकास।

  3. पारदर्शी चयन प्रक्रिया, वास्तविक NGOs को मिलेगा लाभ।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'सबका साथ, सबका विकास' के विजन को धरातल पर उतारते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी पूरी कर ली है। प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के सर्वांगीण पुनर्वासन के लिए स्वैच्छिक संस्थाओं (NGOs) को सीधे सहायता अनुदान देने का निर्णय लिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य 21 अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगताओं से प्रभावित बच्चों और युवाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के माध्यम से समाज की मुख्य धारा से जोड़ना है।

21 प्रकार की दिव्यांगताओं पर केंद्रित है योजना

दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने बताया कि सरकार का लक्ष्य केवल सुविधाएं देना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत चिन्हित 21 श्रेणियों के पुनर्वासन के लिए अनुदान दिया जाएगा। इसमें अर्ली इंटरवेंशन सेंटर, डे-केयर सेंटर, प्री-प्राइमरी और हाईस्कूल स्तर के विशेष विद्यालयों के संचालन के साथ-साथ कौशल विकास केंद्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।

पारदर्शिता के साथ होगा संस्थाओं का चयन

योजना को भ्रष्टाचार मुक्त और प्रभावी बनाने के लिए चयन प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक आधारित रखा गया है। अनुदान के लिए केवल वही संस्थाएं पात्र होंगी जो:

  • NGO दर्पण पोर्टल पर पंजीकृत हों और उनके पास विशिष्ट पहचान संख्या हो।

  • दिव्यांगता के क्षेत्र में कम से कम 2 वर्षों का कार्यानुभव रखती हों।

  • जिनके पास जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता वाली समिति की संस्तुति हो।

जमीनी स्तर पर बदलाव की तैयारी

सरकार का विशेष जोर इस बात पर है कि सहायता केवल कागजी संस्थाओं को न मिलकर वास्तविक और सक्रिय एनजीओ को मिले। इसके लिए निदेशालय स्तर पर एक स्क्रीनिंग कमेटी गठित की गई है जो परिणामों की गुणवत्ता की जांच करेगी। ब्रेल सामग्री का निर्माण, सहायक उपकरणों की उपलब्धता और विशेष पुस्तकालयों का संचालन इस योजना के प्रमुख स्तंभ हैं।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

इस पहल के माध्यम से योगी सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि दिव्यांगजन समाज पर बोझ नहीं, बल्कि प्रदेश की प्रगति में समान भागीदार हैं। जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस योजना का व्यापक प्रचार करें ताकि प्रदेश का कोई भी पात्र दिव्यांग बच्चा या युवा प्रशिक्षण और सुविधाओं से वंचित न रहे।