यूपी में सरकारी भर्तियों के लिए नई नीति लागू: चरित्र सत्यापन से पहले प्रोविजनल नियुक्ति, गंभीर अपराध वाले को लेकर आया बड़ा अपडेट
उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में भर्ती के लिए नई नीति लागू की है, जिसके तहत चरित्र सत्यापन से ...और पढ़ें

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HighLights
चरित्र सत्यापन से पहले प्रोविजनल नियुक्ति पत्र संभव।
गंभीर अपराधों में शामिल अभ्यर्थी नौकरी के लिए अयोग्य।
संवेदनशील पदों पर विस्तृत जांच अनिवार्य होगी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राज्य सरकार की सेवाओं के लिए चयनित अभ्यर्थियों को अब चरित्र और अतीत का रिकार्ड सत्यापन पूरा होने से पहले प्रोविजनल नियुक्ति पत्र दिया जा सकेगा। संवेदनशील और सुरक्षा से जुड़े पदों पर नियुक्ति से पहले विस्तृत जांच जरूरी होगी। नीति के तहत कुछ गंभीर अपराधों में शामिल पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माने जाएंगे। प्रमुख सचिव एम देवराज ने बुधवार को इस संबंध में नई नीति जारी की है।
इसके तहत सरकारी विभागों के साथ निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों, उपक्रमों, पंचायतों और स्थानीय निकायों में होने वाली सीधी भर्ती की नियुक्तियों के लिए एकीकृत व्यवस्था लागू होगी। पहले से लंबित मामलों का निस्तारण भी इसी नीति के आधार पर किया जाएगा। नई नीति प्रभावी हो गई है। सभी संबंधित अधिकारियों को इसका कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थी का पूरा विवरण पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना), गृह जनपद के जिलाधिकारी और उन जिलों के जिलाधिकारियों को भेजेंगे, जहां अभ्यर्थी पिछले पांच वर्षों में किसी भी समय एक वर्ष से अधिक रहा हो। जिलाधिकारी जिला पुलिस प्रमुख से रिपोर्ट लेकर अपनी रिपोर्ट नियुक्ति प्राधिकारी को भेजेंगे। सामान्य मामलों में पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई अपने अभिलेखों के आधार पर जांच करेंगी। अभ्यर्थी की भौतिक उपस्थिति, पूछताछ या अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। विशेष मामले में नियुक्ति प्राधिकारी के निर्देश पर मौके पर जांच कराई जा सकेगी।
पक्ष रखने का देना होगा अवसर
पुलिस रिपोर्ट प्रतिकूल होने पर जिलाधिकारी अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का अवसर देंगे। दूसरे राज्य में निर्धारित अवधि तक रहने वाले अभ्यर्थियों के सत्यापन में संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस प्रमुख से भी परामर्श लिया जाएगा। अभ्यर्थियों को आवेदन और स्वघोषणा पत्र में बताना होगा कि उन्हें कभी गिरफ्तार किया गया है या नहीं, उनके विरुद्ध अभियोजन चला है या नहीं और किसी अदालत ने दोषी ठहराया है या नहीं।
पूर्व सेवा से बर्खास्तगी और अनुचित साधनों के इस्तेमाल के कारण किसी आयोग या बोर्ड द्वारा प्रतिबंधित किए जाने का विवरण भी देना होगा। जानकारी छिपाने पर नियुक्ति रद की जा सकती है। पहले से नियुक्त व्यक्ति की नियुक्ति रद करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा।
हालांकि, आवेदन में आपराधिक मामले या गिरफ्तारी का उल्लेख नहीं करने के बावजूद यदि अभ्यर्थी चिकित्सा परीक्षण, प्रमाणन, सत्यापन या स्व घोषणा प्रपत्र में इसकी लिखित जानकारी दे देता है तो केवल इसी आधार पर उसकी उम्मीदवारी रद नहीं होगी।
बर्खास्त कर्मचारी अपात्र
केंद्र या राज्य सरकार अथवा उनके अधीन निगम, उपक्रम, संस्था या प्राधिकरण से बर्खास्त व्यक्ति राज्य सरकार की सेवा के लिए अपात्र होंगे। गंभीर, जघन्य और नैतिक अधमता से जुड़े निर्धारित अपराधों में दोषसिद्धि तथा नीति में बताई गई अन्य स्थितियों में भी नियुक्ति पर विचार नहीं होगा।
कुछ मामलों में सक्षम न्यायालय द्वारा आरोप तय होना भी अयोग्यता का आधार होगा। किसी व्यक्ति को केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा के कारण सरकारी नौकरी के लिए अनुपयुक्त नहीं माना जाएगा। हालांकि, हिंसक तरीके से मौजूदा सामाजिक व्यवस्था बदलने का घोषित उद्देश्य रखने वाले संगठन के सदस्य पात्र नहीं होंगे।
इनमें लिप्त तो नहीं मिलेगी नौकरी
हत्या, बलवा, देशद्रोह, फिरौती के लिए अपहरण, दुष्कर्म, दहेज हत्या और पाक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों में आरोप तय होने या दोषी ठहराए जाने पर अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। नकल कराने वाले गिरोह, प्रश्नपत्र लीक करने वाले, साल्वर गैंग, दूसरे की जगह परीक्षा देने वाले और फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वाले भी नौकरी के लिए अपात्र होंगे।
डिजिटल अरेस्ट और यूपीआइ के जरिये ठगी जैसे साइबर अपराधों में शामिल लोगों पर भी यह नियम लागू होगा। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामलों में भी अभ्यर्थियों को नौकरी के लिए अयोग्य माना जाएगा।
