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दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर लगेगा नियंत्रण, पराली जलाने, फ्यूल स्टेशन और पुराने वाहनों के लिए नए आदेश लागू

Published: Wed, 28 Oct 2026 08:20 AM (IST)

उत्तर प्रदेश सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।

तस्वीर- फाइल।

तस्वीर- फाइल।

HighLights

  1. 30 नवंबर तक सभी पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरे लगेंगे।

  2. पराली जलाने, धूल और पुराने वाहनों पर होगी कड़ी कार्रवाई।

  3. 21 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के निर्देश जारी।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने 15 नवंबर से पहले 1,002 किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण का काम पूरा करने और 30 नवंबर तक सभी पेट्रोल पंपों पर आटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं।

इन कैमरों से ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नीति लागू करने में मदद मिलेगी। पराली जलाने, सड़क की धूल और पुराने प्रदूषणकारी वाहनों पर नियंत्रण के लिए भी सख्ती के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने मंगलवार को संबंधित जिलों और विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के सभी काम सर्वोच्च प्राथमिकता से पूरे किए जाएं। कार्ययोजना की नियमित समीक्षा के साथ मशीनों और उपकरणों की कार्यशीलता जांचने तथा स्थलीय निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए।

पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी करने और फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों का अधिकतम उपयोग करने को कहा है।

बैठक में बताया गया कि 203 के लक्ष्य के मुकाबले 218 सीआरएम मशीनें और 41 के लक्ष्य के मुकाबले 53 कस्टम हायरिंग सेंटर उपलब्ध हैं। पराली से पेलेट-ब्रिकेट बनाने वाली इकाइयां पांच से बढ़कर नौ और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट सात से बढ़कर 25 हो गए हैं।

परिवहन विभाग को पुराने ट्रकों और बसों को बीएस-6, सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए। निर्धारित अवधि पूरी कर चुके वाहनों के खिलाफ कार्रवाई और परिवर्तन योजना के प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया। वहीं, सड़क की धूल कम करने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग, प्रमुख सड़कों की गहरी सफाई और कूड़ा संवेदनशील स्थलों पर नियमित सफाई कराने को कहा गया।

21 औद्योगिक इकाइयों पर बंदी के निर्देश

औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी के लिए 644 इकाइयों में से 623 में आनलाइन मानिटरिंग सिस्टम स्थापित कर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से जोड़ दिया गया है।

शेष 21 इकाइयों के खिलाफ बंदी के निर्देश जारी किए गए हैं। निर्माण स्थलों पर धूल की निगरानी के लिए डस्ट पोर्टल पर अधिक परियोजनाएं दर्ज कराने को कहा गया। बैठक में बताया गया कि एनसीआर में प्रतिदिन 3,783 टन कचरा पैदा होता है, जबकि प्रसंस्करण क्षमता 4,682 टन प्रतिदिन है।

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