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यूपी में गो-सेवा से जुड़ेगा रोजगार: अब 4 की जगह 10 गोवंश पाल सकेंगे किसान, बनेगा नया रिकॉर्ड

Published: Thu, 10 Sep 2026 08:07 PM (IST)

उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और प्राकृतिक खेती का मुख्य आधार बनाने की तैयारी तेज हो ...और पढ़ें

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HighLights

  1. गोवंश संरक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार का आधार बनेगा।

  2. किसान अब 'सहभागिता योजना' में 4 की जगह 10 गोवंश पालेंगे।

  3. घायल गोवंश के लिए 24x7 एंबुलेंस सेवा शुरू की जाएगी।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप गोवंश संरक्षण को केवल आश्रय तक सीमित न रखकर इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और प्राकृतिक खेती का मुख्य आधार बनाने की तैयारी तेज हो गई है। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग और यूपी काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (UPCAR) ने कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में एक अहम बैठक की। इसमें गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 25 सूत्रीय मास्टर प्लान पर मंथन किया गया, जिसमें 24x7 एंबुलेंस सेवा शुरू करने और गोवंश सहभागिता योजना का दायरा बढ़ाने जैसे बड़े फैसले शामिल हैं।

4 की जगह अब 10 गोवंश पाल सकेंगे किसान

गो-सेवा को सीधे जनभागीदारी से जोड़ने के लिए गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने 'मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना' का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत वर्तमान में एक पशुपालक या किसान को अधिकतम चार गोवंश सौंपे जाते हैं, जिसे बढ़ाकर अब 10 करने का सुझाव दिया गया है। इससे बड़ी संख्या में किसान इस अभियान से जुड़ सकेंगे, जिससे गोवंश संरक्षण का प्रभाव और योजना की पहुंच दोनों में इजाफा होगा।

24x7 एंबुलेंस सेवा और सम्मानजनक निस्तारण की रूपरेखा

सड़क दुर्घटनाओं या अन्य कारणों से घायल होने वाले गोवंशों के लिए बैठक में 24x7 समर्पित एंबुलेंस सेवा शुरू करने का अहम प्रस्ताव रखा गया। इससे घायल पशुओं को तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय पहुंचाकर उनकी जान बचाई जा सकेगी। इसके अलावा, गोशालाओं में मृत गोवंशों के सम्मानजनक और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप विशेष स्थल विकसित करने पर भी सहमति बनी है।

गोशालाएं बनेंगी रोजगार और प्राकृतिक खेती का केंद्र

मुख्यमंत्री योगी की मंशा के अनुरूप गोशालाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने पर विशेष फोकस है। किसानों के यहां वीबीजी-रामजी योजना के तहत पक्के कैटल शेड और यूरिन टैंक के निर्माण से लेकर बड़े गो संरक्षण केंद्रों में बायोगैस प्लांट लगाने की योजना है। गोबर और गोमूत्र से जीवामृत, घन जीवामृत और बीजामृत जैसे कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार कर उनके बाज़ार और मार्केटिंग की व्यवस्था की जाएगी, ताकि ये केंद्र स्वरोजगार का जरिया बन सकें।

अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही, जल्द शुरू होगा काम

योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा रही है। गो-सेवा आयोग के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गोशाला प्रबंधन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर इन सभी 25 सूत्रीय सुझावों पर प्राथमिकता के आधार पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।