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यूपी के किसानों को मिलेगी अधिक पैदावार, गन्ना की खेती के लिए मिलीं चार उन्नत किस्में

Published: Wed, 30 Sep 2026 07:12 PM (IST)

Sugarcane New Varity: यह लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी और अच्छी पेड़ी क्षमता वाली किस्म है। इसे पूरे प्रदेश में खेती के लिए स्वीकृत किया गया है।

चार नई गन्ना किस्में अब उपलब्ध

चार नई गन्ना किस्में अब उपलब्ध

HighLights

  1. उप्र बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति की बैठक में मिली स्वीकृति

  2. गन्ना किस्म को.0238 का बेहतर विकल्प बनेगी नई प्रजाति को.शा.23232

राज्य ब्यूरो, लखनऊ: उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को अधिक पैदावार और बेहतर चीनी परता देने वाली चार नई गन्ना किस्में अब उपलब्ध होंगी।

उत्तर प्रदेश बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति की बैठक में उप्र गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर की तीन और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ की एक किस्म को खेती के लिए अवमुक्त किया गया है। इनमें अगेती किस्म को.शा.23232 को पुरानी प्रजाति को.0238 का बेहतर विकल्प बताया जा रहा है।

गन्ना आयुक्त मिनस्थी एस. की अध्यक्षता में हुई बैठक में वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों और चीनी मिल प्रतिनिधियों की मौजूदगी में नई किस्मों के उपज और शर्करा संबंधी आंकड़े प्रस्तुत किए गए। इसमें बताया गया कि शाहजहांपुर की अगेती किस्म को.शा.23232 की पौधा गन्ने की औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर मिली है, जो मानक किस्म को.0238 से 9.44 प्रतिशत अधिक है।

इसकी पेड़ी की उपज भी 80.57 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो को.0238 से 3.16 प्रतिशत अधिक है। नवंबर, जनवरी और मार्च में इसकी पोल प्रतिशत केन क्रमश: 13.10, 13.77 और 14.31 रहा। यह लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी और अच्छी पेड़ी क्षमता वाली किस्म है। इसे पूरे प्रदेश में खेती के लिए स्वीकृत किया गया है।

वहीं भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की को.लख.21201 भी अगेती किस्म है। इसकी औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर है, जबकि पोल इन केन 13.94 प्रतिशत रहा, जो को.0238 के 13.71 प्रतिशत से अधिक है। लाल सड़न रोग के प्रति उच्च प्रतिरोधक क्षमता वाली इस किस्म को भी पूरे प्रदेश के लिए अवमुक्त किया गया है।

मध्य एवं देर से पकने वाली दो किस्मों को.शा.19235 और को.शा.18232 को भी खेती के लिए मंजूरी मिली है। कोशा 19235 की औसत उपज 87.58 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो कोशा 767 से 21.01 प्रतिशत अधिक है। वहीं कोशा18232 की औसत उपज 92.38 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो कोशा767 से 26.51 प्रतिशत अधिक है। इसकी पेड़ी की उपज भी 82.06 टन प्रति हेक्टेयर मिली है।

इसके अलावा केंद्र सरकार से नोटिफाइड आठ किस्मों को प्रदेश में खेती के लिए स्वीकार किया गया है। इनमें अगेती किस्में को.पी.16437, को.पी.11438 और को.लख.16466 तथा मध्य-देर से पकने वाली को.16030, को.17018, को.18022, को.पीबी.17215 और को.पीबी.18213 शामिल हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि छह पुरानी और कम प्रचलित किस्मों को.शा.95255, 97264, 96275, 97261, को.से.96436 और 98231 को अनुपयुक्त घोषित कर अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खेती से बाहर किया जाएगा।