लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। वित्तीय संकट से जूझ रही बिजली कंपनियां भले ही बिजली की दरों में इजाफे के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही हैं लेकिन पहले जनसुनवाई और फिर राज्य सलाहकार समिति की बैठक में जिस तरह से दर संबंधी प्रस्ताव पर सवाल उठे हैं उससे स्पष्ट लग रहा है कि बिजली महंगी होने वाली नहीं है। उपभोक्ता संगठनों के विरोध को देखते हुए विद्युत नियामक आयोग, पावर कारपोरेशन के स्लैब परिवर्तन के प्रस्ताव को भी मानता नहीं दिख रहा है। ऐसे में स्लैब परिवर्तन से बिजली का खर्चा बढ़ने की भी आशंका नहीं है।

सोमवार को समिति की बैठक के बाद अब विद्युत नियामक आयोग बिजली दर संबंधी प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में जुटेगा। दरों पर आयोग जुलाई में निर्णय सुनाएगा। नियामक आयोग के चेयरमैन आरपी सिंह की अध्यक्षता में राज्य सलाहकार समिति की बैठक में पहले-पहल कंपनियों के वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर), ट्रूअप और बिजली दर संबंधी प्रस्ताव का प्रस्तुतीकरण किया गया।

प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पहले तो कंपनियों पर उपभोक्ताओं के निकल रहे लगभग 22,045 करोड़ रुपये के एवज में अगले पांच वर्ष तक सात प्रतिशत बिजली की दरों को घटाया जाना चाहिए। नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) के ऊपर ग्रेटर नोयडा के उपभोक्ताओं के निकल रहे 1176 करोड़ रुपये के एवज में दरों में कमी के लिये रेग्युलेटरी लाभ दिया जाए।

चूंकि एनपीसीएल के लाइसेंस की अवधि अगले वर्ष खत्म हो रही है इसलिए वर्मा ने अन्य सदस्यों के साथ प्रस्ताव रखा कि आयोग इस धनराशि को अपने खाते में ट्रांसफर करा ले। वर्मा ने 1.20 करोड़ लाइफ लाइन उपभोक्ताओं से पिछले तीन वर्षों में लगभग 1400 करोड़ रुपये ज्यादा वसूलने पर कहा कि ऐसे उपभोक्ताओं की बिजली भी सस्ती की जाए।

प्रमुख सचिव ऊर्जा एम. देवराज द्वारा स्लैब परिवर्तन के प्रस्तुतीकरण पर सदस्यों के विरोध को देखते हुए चेयरमैन ने उसे दिखाने से रोकते हुए कहा कि आयोग अपने तरीके से इस पर कार्यवाही करेगा। ऐसे में प्रस्ताव खारिज होना तय माना जा रहा है। प्रमुख सचिव द्वारा रिवैंप योजना की वितरण हानियों का जिक्र करते हुए मंजूरी देने की बात को भी चेयरमैन ने न मानते हुए कहा कि किसी की अक्षमता का खामियाजा उपभोक्ता नहीं भुगतेंगे। बिजनेस प्लान में अनुमोदित हानियां ही मानी जाएंगी।

प्रमुख सचिव ने कहा कि कंपनियों को सरकार से पूरी सब्सिडी मिलती नहीं और उपभोक्ताओं का पैसा भी सरप्लस हो रहा है ऐसे में हर तरह से कंपनियों का ही नुकसान होगा। बिजली कंपनियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान की सराहना करते हुए परिषद अध्यक्ष ने कहा कि ढाई दशक बाद कंपनियों में भ्रष्टाचार पर डर व्याप्त है। ऐसे में व्यवस्था के सुधरने की उम्मीद की जा सकती है। ट्रांसमिशन टैरिफ को यथावत रखने की मांग करते हुए वर्मा ने कहा कि सिस्टम अपग्रेट किया जाए। ग्रीन टैरिफ के प्रस्ताव को टालते हुए कहा गया कि इसे आगे वैकल्पिक व्यवस्था के तहत लागू किया जाए।

पलायन रोकने को सस्ती हो बिजली : इंडिन इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रतिनिधि ने उद्योगों की बिजली दरों को कम करने की मांग करते हुए कहा कि ज्यादा दर से उद्योगों के पलायन की स्थिति बनेगी। क्रास सब्सिडी का मुददा उठाते हुए सभी के लिए एक दर लागू करने की बात उठाई गई तो परिषद अध्यक्ष ने विरोध करते हुए कहा कि इस व्यवस्था को लागू रखा जाए।

बिजलीकर्मियों के यहां लगाए जाएं मीटर : आयोग के सदस्य विनोद कुमार श्रीवास्तव ने विभागीय कार्मिकों के घरों में मीटर लगाए जाने का मुद्दा उठाया। एक संविदा कर्मी द्वारा बिजली चोरी कराए जाने का जिक्र करते कहा कि बिजली के दुरुपयोग को रोकने के लिए मीटर जरूरी है। परिषद अध्यक्ष ने इस पर गंभीरता से विचार करने का अनुरोध करते हुए कहा कि 15 गुना पेनाल्टी लगाए जाने पर भी विचार किया जाए।

टोरेंट पावर का भी उठा मुद्दा : अवधेश वर्मा ने टोरेंट पावर के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि पूर्व के एग्रीमेंट में बल्क सप्लाई से कम दर पर बिजली देकर बड़ा घोटाला किया गया है। टोरेंट पर आंकडे छिपाकर लाभ कमाने का आरोप लगाते हुए वर्मा ने पुनर्विचार के साथ ही इंटरनल आडिट की मांग की। चेयरमैन द्वारा मामले को गंभीर बताए जाने पर प्रमुख सचिव ने कहा कि मामला विधानसभा की एक समिति में भी आया है जिस पर सरकार उचित निर्णय करेगी।

उपभोक्ताओं को साइबर ठगी से बचाए सरकार : सदस्य डा. विजयराज सिंह ने साइबर ठगों द्वारा एसएमएस भेजकर बिजली उपभोक्ताओं को ठगे जाने का मुद्दा उठाया गया। परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने भी कहा कि उपभोक्ताओं को ठगे जाने पर अंकुश लगाने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जाएं। वर्मा ने कहा कि स्मार्ट मीटर के डाटा की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। चेयरमैन ने प्रमुख सचिव ऊर्जा से इसका संज्ञान लेते हुए उचित कदम उठाए जाने को कहा।

Edited By: Umesh Tiwari