गोशालाओं में होंगे मांगलिक कार्यक्रम, 'गो-पर्यटन' से खुलेगी गांवों की किस्मत
उत्तर प्रदेश सरकार गोशालाओं को 'गो-पर्यटन' केंद्रों के रूप में विकसित करेगी, जिससे वे पशु संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण संस्कृति ...और पढ़ें

HighLights
गोशालाएं अब 'गो-पर्यटन' केंद्रों के रूप में विकसित होंगी।
मांगलिक व सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर ग्रामीण संस्कृति को बढ़ावा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
डिजिटल टीम, लखनऊ, 21 सितंबर। उत्तर प्रदेश की गोशालाएं अब केवल पशु संरक्षण का केंद्र न रहकर ग्रामीण संस्कृति, परंपरा और स्थानीय अर्थव्यवस्था की नई पहचान बनेंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप राज्य सरकार चयनित गोशालाओं, कान्हा हाउसों और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को 'गो-पर्यटन' के रूप में विकसित करने जा रही है। इस अभिनव पहल के तहत गोशालाओं में मांगलिक व सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन के साथ-साथ पर्यटकों को गांव की ठेठ जीवनशैली से रूबरू कराया जाएगा, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और कारोबारियों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलेंगे।
मांगलिक कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों का केंद्र
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य गोशालाओं को केवल दैनिक देखभाल तक सीमित न रखकर गांव के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने से जोड़ना है।
- पारंपरिक आयोजनों की सुविधा: चयनित गोशाला परिसरों को इस तरह विकसित किया जाएगा कि ग्रामीण परिवेश के बीच लोग शादी-विवाह, मुंडन, और अन्य मांगलिक कार्यक्रम आयोजित कर सकेंगे।
- फ्लेक्सिबल मॉडल: गो-पर्यटन का स्वरूप पूरे प्रदेश में एक समान न होकर क्षेत्रीय विशिष्टताओं पर आधारित होगा। कहीं लोक संस्कृति आकर्षण का केंद्र होगी, तो कहीं स्थानीय खान-पान, कला और हस्तशिल्प को प्राथमिकता दी जाएगी।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा नया आधार
गो-पर्यटन के विकसित होने से इसका सीधा आर्थिक लाभ आसपास के ग्रामीणों को मिलेगा। पर्यटकों और आगंतुकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक खान-पान की मांग बढ़ेगी
महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी: गोशालाओं के आसपास हस्तनिर्मित वस्तुओं और जैविक उत्पादों की बिक्री के नए अवसर बनेंगे।
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा: शहर के लोग और बाहरी पर्यटक गांव की जीवनशैली, पशुपालन और लोक परंपराओं का सीधा अनुभव कर सकेंगे।
कान्हा हाउस और बड़े केंद्रों का होगा कायाकल्प
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के तहत गो-संरक्षण की मूल भावना को बनाए रखते हुए इन केंद्रों की कार्यप्रणाली का विस्तार किया जा रहा है। आने वाले समय में ये बदला हुआ स्वरूप न केवल गो-वंश के बेहतर रख-रखाव में मददगार साबित होगा, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक पटल पर उभारने का एक सशक्त माध्यम भी बनेगा।
