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गोशालाओं से निकलेगा समृद्धि का रास्ता: यूपी में बनेंगे 'नेचुरल फार्मिंग डिस्ट्रिक्ट', ललितपुर बनेगा पहला पायलट मॉडल

Published: Mon, 19 Oct 2026 05:20 PM (IST)

उत्तर प्रदेश में गोशालाएं अब केवल गोवंश संरक्षण ही नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया केंद्र ...और पढ़ें

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HighLights

  1. गोशालाएं बनेंगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया केंद्र।

  2. ललितपुर पहला 'पायलट नेचुरल फार्मिंग डिस्ट्रिक्ट' बनेगा।

  3. गोबर-गोमूत्र से जैविक उत्पाद और बायोगैस का उत्पादन।

डिजिटल टीम, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गोशालाएं अब केवल निराश्रित गोवंश के संरक्षण का ठिकाना मात्र नहीं रहेंगी, बल्कि किसानों की समृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मनिर्भरता का नया केंद्र बनेंगी। योगी सरकार गोशालाओं के जैविक संसाधनों - विशेषकर गोबर और गोमूत्र - को प्राकृतिक खेती से जोड़कर एक सर्कुलर इकोनॉमी का नया मॉडल विकसित करने जा रही है।

इस योजना के तहत ललितपुर को प्रदेश के पहले 'पायलट नेचुरल फार्मिंग डिस्ट्रिक्ट' के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इस पहल का मूल उद्देश्य गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना, किसानों को स्थानीय स्तर पर कम लागत वाली जैविक खाद व कीट नियंत्रक उपलब्ध कराना और उनके प्राकृतिक कृषि उत्पादों के लिए एक संगठित बाजार तैयार करना है। 

गोशाला से खेत तक बनेगा आत्मनिर्भरता का नया चक्र

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुसार इस मॉडल की रूपरेखा तैयार की गई है। गो सेवा आयोग और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अधिकारियों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस पर सहमति बनी है।

 
योजना के तहत गोशालाओं में गोबर एवं अन्य संसाधनों से जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जैविक कीट नियंत्रक, गो-काष्ठ और पंचगव्य आधारित उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इन उत्पादों को स्थानीय किसानों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे गोशालाओं के लिए नियमित आय का स्रोत बनेगा और किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में सस्ते व प्राकृतिक संसाधन मिलेंगे। 

ललितपुर बनेगा मॉडल, हर मंडल में विस्तार का प्लान

ललितपुर जिले को पायलट मॉडल के रूप में चुनकर वहां की सभी गोशालाओं, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों और ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों को एक सूत्र में पिरोया जाएगा।
 
ललितपुर में इस प्रयोग के नतीजों के आधार पर प्रदेश के प्रत्येक मंडल के एक-एक जिले में चरणबद्ध तरीके से इस व्यवस्था को लागू करने पर मंथन किया जा रहा है। 

बाजार से जुड़ेगा किसान: प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर फोकस

प्राकृतिक खेती को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए सरकार केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि 'सप्लाई चेन' को भी मजबूत करेगी। कृषि उत्पादों के एकत्रीकरण, प्रसंस्करण, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग और ब्रांडिंग की पूरी व्यवस्था की जाएगी। किसान उत्पादक संगठनों और महिला स्वयं सहायता समूहों को इन उत्पादों के वैल्यू एडिशन (मूल्यवर्धन) से जोड़ा जाएगा, जिससे गांव स्तर पर ही स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

नाबार्ड से वित्तीय मदद, 'उपकार' देगा तकनीकी प्रशिक्षण

  • नाबार्ड: FPOs, स्वयं सहायता समूहों और पात्र किसानों को रियायती दरों पर ऋण, वित्तीय सहायता और क्षमता विकास प्रोत्साहन उपलब्ध कराएगा।
  • उपकार व KVK: उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) गोशाला संचालकों और किसानों को वैज्ञानिक व प्रामाणिक तरीकों से जैविक खाद और बायो-प्रोडक्ट्स बनाने का तकनीकी प्रशिक्षण देंगे।

गोबर से बनेगी बायोगैस और बायो-सीबीजी

इस मॉडल में हरित ऊर्जा उत्पादन को भी प्राथमिकता दी गई है। बड़े आकार की गोशालाओं में गोबर आधारित बायोगैस और कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इससे गोशालाओं को ऊर्जा क्षेत्र से भी वित्तीय मजबूती मिलेगी, जो गोवंश संरक्षण, प्राकृतिक कृषि, ग्रामीण उद्यमिता और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम साबित होगा।