जनकल्याण की जमीन पर यूपी के विकास का रोडमैप
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने जनकल्याण को केंद्र में रखकर 23 महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जो राज्य के विकास का एक ...और पढ़ें

HighLights
चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड को मुख्यधारा से जोड़कर विकास गति देगा।
सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने से शिक्षा में डिजिटल खाई पटेगी।
अग्निवीरों को आरक्षण, पीआरडी जवानों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
कैबिनेट के फैसलों को अलग-अलग खानों में बांटकर देखना दरअसल इनकी विशेषता को नजरअंदाज करना होगा। किसानों को ऋण, सड़क, स्कूल, खेत, वर्दी और सुरक्षा, ये सारे धागे अंत्य़ोदय के इसी साझा विचार से बंधे हैं कि विकास तभी सार्थक है, जब वह सबसे पीछे खड़े नागरिक तक पहुंचे।
प्रो. संजय सिन्हा। किसी सरकार की नीतियों की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब उनका लाभ आम आदमी के अनुभव का हिस्सा बने। उत्तर प्रदेश में विकास की मौजूदा यात्रा इसी बदलाव की ओर बढ़ती दिखाई देती है, जहां जनकल्याण विकास का परिणाम भर नहीं, बल्कि उसकी बुनियाद बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में एक दिन पहले हुए कैबिनेट के 23 फैसले इसी बदलती विकास-दृष्टि का व्यापक संकेत हैं। इन निर्णयों को अलग-अलग सरकारी प्रस्तावों के रूप में देखने के बजाय उस समग्र सोच के संदर्भ में देखना अधिक महत्वपूर्ण है, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ समाज के विभिन्न वर्गों की जरूरतों और आकांक्षाओं को भी विकास के केंद्र में रखती है। कैबिनेट के इन फैसलों में भविष्य की अर्थव्यवस्था, मजबूत बुनियादी ढांचे, मानवीय पूंजी, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित प्रदेश की परिकल्पना एक-दूसरे से जुड़ती हुई दिखाई देती है। यह केवल वर्तमान की आवश्यकता भर नहीं, बल्कि आने वाले उत्तर प्रदेश की आधारभूमि तैयार करने का प्रयास भी है।
योगी सरकार की सकारात्मक सोच का पहला और सबसे ठोस प्रमाण है चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, जिसे 1,008.67 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। 15.172 किलोमीटर लंबा यह छह-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को चित्रकूट धाम से जोड़ेगा। लेकिन, इस फैसले को सिर्फ एक सड़क के रूप में देखना उचित नही। इसे बुंदेलखंड के अतीत से जोड़कर देखा जाना चाहिए। बुंदेलखंड वह भूगोल है, जिसे दशकों तक पिछड़ेपन का पर्याय बनाकर छोड़ दिया गया था। सूखा, पलायन और उपेक्षा उसकी पहचान बन गए थे। यह एक्सप्रेसवे उस भूगोल को मुख्यधारा से जोड़ता है, धार्मिक पर्यटन को गति देता है और स्थानीय हथकरघा व कृषि-उत्पाद को बाजार तक पहुंचने का रास्ता देता है। यह इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं, बुंदेलखंड को इतिहास के हाशिये से निकालकर नई पहचान देने की कोशिश है।
यही वैचारिक धार शिक्षा को लेकर लिए गए फैसले में भी दिखती है। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' बनाने का निर्णय दरअसल एक पुरानी असमानता पर चोट है। वह असमानता, जो तय करती थी कि निजी स्कूल का बच्चा टैबलेट पर पढ़े और सरकारी स्कूल का बच्चा टूटी दीवार के नीचे। स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल सामग्री पहुंचने से यह डिजिटल खाई पटेगी, सीखने की गुणवत्ता सुधरेगी, और सबसे बड़ी बात—गरीब मां-बाप का सरकारी स्कूल से भरोसा फिर जुड़ेगा। शिक्षा में बराबरी ही असली सामाजिक न्याय की पहली शर्त है। यह फैसला उसी शर्त को पूरा करने की दिशा में एक कदम है।
कृषि क्षेत्र में 'मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना' के तहत छह लाख रुपये तक का दीर्घकालिक ऋण मात्र छह प्रतिशत ब्याज पर देने का फैसला भी सरकार की जन कल्याण नीति का विस्तार है। एक दशक पहले तक उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी त्रासदी यह रही है कि पूंजी की कमी किसान को महाजन के दरवाजे पर पहुंचा देती थी और वहां से कर्ज़ का दुष्चक्र शुरू होता था। किसान आत्महत्या करने तक को विवश हो जाते थे। योगी सरकार ने सस्ता संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने का फैसला लेकर इस दुष्चक्र को तोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इससे किसानों को ड्रिप सिंचाई, सौर पंप या डेयरी जैसे संबद्ध व्यवसायों में निवेश की ताकत मिलेगी। किसान मात्र फसल उगाने वाला नहीं, बल्कि एक उद्यमी के रूप में कार्य कर सकेगा। पूर्वांचल में वर्ल्डफिश परियोजना के जरिये मत्स्य पालकों को मिलने वाला अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी इसी दिशा में एक और कदम है।
कैबिनेट में युवाओं को लेकर लिया गया फैसला शायद सबसे ज्यादा भावनात्मक गहराई रखता है। जेल वार्डन और परिवहन प्रवर्तन सिपाही की भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और आयु सीमा में छूट देना केवल एक नौकरी की गारंटी नहीं, बल्कि उस सवाल का जवाब है जो हर अग्निवीर के मन में कौंधता है कि चार साल समय सीमा पार होने के बाद क्या समाज उसे भूल जाएगा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच इसको लेकर स्पष्ट है कि अनुशासन और प्रशिक्षण को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। इसी भावना का विस्तार प्रांतीय रक्षक दल के जवानों के लिए है, जिन्हें अब कैशलेस चिकित्सा योजना और बेहतर ड्यूटी भत्ता मिलेगा। एक ऐसा वर्ग जो अक्सर वर्दी पहनकर भी सुर्खियों से बाहर रहता है, मगर व्यवस्था की रीढ़ बना रहता है। वह वर्ग जिसके बारे में पूर्व की सरकारें सोचती तक नहीं थीं, अब आत्मविश्वास से भरपूर दिखाई देगा।
आर्थिक विस्तार की दृष्टि से 'उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025' और मथुरा में प्रस्तावित एथेनॉल संयंत्र दो अलग-अलग मगर परस्पर जुड़े संदेश देते हैं। एक तरफ यह नीति नोएडा-ग्रेटर नोएडा के टॉय पार्क को नई ताकत देकर आयातित, अक्सर असुरक्षित खिलौनों पर निर्भरता घटाने और स्थानीय एमएसएमई को मजबूत करने की कोशिश है। दूसरी तरफ बंद पड़ी चीनी मिल में एथेनॉल संयंत्र लगाने का फैसला बताता है कि औद्योगिक पुनरुद्धार और हरित ऊर्जा साथ-साथ चल सकते हैं। दोनों फैसले मिलकर एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के सपने को नारे से नीति की ओर ले जाने में सहायक साबित होंगे।
सुरक्षा के मोर्चे पर अयोध्या की मिल्कीपुर तहसील में एनएसजी के क्षेत्रीय केंद्र के लिए 65 एकड़ भूमि का निशुल्क आवंटन एक भू-राजनीतिक संकेत भी है। राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या अब केवल आस्था का नहीं, वैश्विक सुरक्षा-मानचित्र का भी बिंदु बन चुकी है। वहां ब्लैक कैट कमांडो का स्थायी हब स्थापित होना पूरे उत्तर भारत की त्वरित-प्रतिक्रिया क्षमता को नई धार देगा। इसी तरह दस वर्ष तक की किरायेदारी पर स्टांप शुल्क में छूट, लखनऊ-उन्नाव-रायबरेली के शहरी विस्तार और राशन कोटेदारों के मार्जिन मनी में बढ़ोतरी जैसे फैसले भले सुर्खियों में कम जगह पाएं, मगर रोजमर्रा की जिंदगी पर इनका असर उतना ही खास और व्यापक है।
कैबिनेट के फैसलों को अलग-अलग खानों में बांटकर देखना दरअसल इनकी विशेषता को नजरअंदाज करना होगा। किसानों को ऋण, सड़क, स्कूल, खेत, वर्दी और सुरक्षा, ये सारे धागे अंत्य़ोदय के इसी साझा विचार से बंधे हैं कि विकास तभी सार्थक है, जब वह सबसे पीछे खड़े नागरिक तक पहुंचे। बेशक नीतियों की असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति, पारदर्शिता और निगरानी में होती है, लेकिन दिशा साफ है, और यही दिशा तय करेगी कि उत्तर प्रदेश अगले दशक में सिर्फ सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य कहलाए, या देश के विकास का सबसे भरोसेमंद इंजन भी बने।
