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उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति 2025 को दी मंजूरी, खिलौना उद्योग को मिलेगी नई उड़ान

Published: Tue, 15 Sep 2026 09:55 PM (IST)

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य राज्य को एक प्रमुख खिलौना विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है।

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HighLights

  1. उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति 2025 को मंजूरी मिली।

  2. राज्य को प्रमुख खिलौना विनिर्माण केंद्र बनाना लक्ष्य।

  3. सूक्ष्म, लघु, मध्यम इकाइयों को प्रोत्साहन, रोजगार सृजन।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। खिलौना निर्माण को बड़े उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने एक और कदम उठाया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान कर दी है।

नीति के तहत खिलौना उद्योग से जुड़ी सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़ी इकाइयों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसका लक्ष्य उत्तर प्रदेश को प्रमुख खिलौना विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है।

निर्यात में राज्य की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत

त्योहारों से संबंधित वस्तुओं (खिलौनों) के निर्यात में राज्य की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है। जीआई टैग वाले लैकवेयर और हस्तनिर्मित लकड़ी के खिलौनों के लिए वाराणसी, झांसी और चित्रकूट की दुनिया में पहचान है।

इस उद्योग से बड़ी संख्या में महिलाओं और ग्रामीणों को रोजगार मिलता है। हालांकि, यह क्षेत्र अभी काफी हद तक असंगठित है। सरकार इसे संगठित उद्योग के रूप में विकसित करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में काम कर रही है।

नई नीति के तहत खिलौना क्लस्टरों में रोजगार के अतिरिक्त अवसर बढ़ाने के साथ कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल मानव संसाधन के प्रभावी उपयोग तथा कौशल विकास पर जोर दिया जाएगा।

पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्यांचल को विशेष प्रोत्साहन

प्रदेश में संचालित मौजूदा इकाइयों के विस्तार और तकनीकी उन्नयन के लिए भूमि एवं अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी प्रविधान किया गया है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्यांचल को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। नीति के क्रियान्वयन का प्रबंधन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग करेगा।

पात्र इकाइयों को उत्तर प्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन नीति-2022 अथवा उसके निष्प्रभावी होने की स्थिति में लागू होने वाली उत्तरवर्ती नीति के तहत निर्धारित प्रोत्साहन मिलेंगे।

वहीं, बड़ी और उससे उच्च श्रेणी की नई इकाइयों तथा विस्तार या विविधीकरण करने वाली इकाइयों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। हालांकि, किसी परियोजना को राज्य सरकार की किसी अन्य नीति के तहत प्रोत्साहन का लाभ मिलने की स्थिति में इस योजना के तहत दोहरा प्रोत्साहन नहीं मिलेगा।

वहीं, केंद्र सरकार की किसी योजना या नीति के तहत मिलने वाले प्रोत्साहन इसके अतिरिक्त प्राप्त किए जा सकेंगे। नीति प्रख्यापन की तिथि से पांच वर्ष तक प्रभावी रहेगी।