लखनऊ, जेएनएन। लंबे अंतराल के बाद कल हुई योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट बैठक में 32 प्रस्ताव पर मुहर लगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बिहार दौरे से लौटने के बाद लोक भवन में रात को कैबिनेट बैठक हुई।

लोकसभा चुनाव की डुगडुगी बजने से पहले योगी सरकार ने अयोध्या में भगवान श्री राम की भव्य प्रतिमा की स्थापना का बहुप्रतीक्षित फैसला कर लिया है। इससे लगे स्थान पर पर्यटन संबंधी अन्य सुविधाएं (डिजिटल म्यूजियम, पार्किंग आदि) भी विकसित की जाएंगी। इसके लिए 28 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। कैबिनेट बैठक में कुल 32 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

औद्योगिक घरानों और लोगों से दान मांगेगी सरकार

अयोध्या में भगवान श्री राम की भव्य प्रतिमा की स्थापना की कैबिनेट की मुहर की जानकारी राज्य सरकार के प्रवक्ता व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा और अपर मुख्य सचिव पर्यटन अवनीश कुमार अवस्थी ने दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना की बुनियादी संरचना के विकास में पर करीब 200 से 300 करोड़ रुपये का खर्च आएगा जिसे सरकार वहन करेगी। मूर्ति पर आने वाला खर्च कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत औद्योगिक घराने करेंगे। इसके लिए सरकार जनता से दान की भी अपील करेगी।

मूर्ति का स्वरूप क्या होगा? इसकी ऊंचाई और डिजाइन क्या होगी? इस बारे में फैसले लेने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी गठित करने का निर्णय हुआ है। तकनीकी सलाह के लिए गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण कराने वाली फर्म के साथ मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) हस्ताक्षरित किया जाएगा। होगी। अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने बताया कि श्री राम प्रतिमा के निर्माण में करीब तीन साल का समय लगेगा।

अयोध्या में भजन संध्या स्थल को और धनराशि मंजूर

अयोध्या में भजन संध्या स्थल के निर्माण के लिए शासन ने और धनराशि को मंजूरी दी है। भजन संध्या स्थल की निर्माण एजेंसी उप्र राजकीय निर्माण निगम ने पुनरीक्षित एस्टीमेट 2075.96 लाख प्रस्तुत किया है। इस एस्टीमेट का मूल्यांकन प्रायोजना रचना व मूल्यांकन विभाग ने किया है, जिसने इसके लिए 1902.96 लाख रुपये की लागत आंकी है। इसी प्रकार चित्रकूट में परिक्रमा पथ के पुनर्विकास तथा भजन संध्या स्थल के निर्माण के लिए अब 1902.96 लाख रुपये लागत आंकी गई है। कैबिनेट ने बढ़े हुए एस्टीमेट को अपनी मंजूरी दे दी है।

अब तीन लाख आय वाले परिवारों को कन्या सुमंगला का लाभ

अगले वित्तीय वर्ष के बजट में घोषित कन्या सुमंगला योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा बेटियों को देने के लिए राज्य सरकार ने लाभार्थी परिवारों की वार्षिक आय की अधिकतम सीमा को 1.8 लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपये करने का फैसला किया है। पहली अप्रैल से संचालित की जाने वाली यह योजना छह श्रेणियों में लागू की जाएगी। प्रथम श्रेणी के तहत एक अप्रैल, 2019 के बाद जन्मी नवजात बालिकाओं को लाभान्वित किया जाएगा। द्वितीय श्रेणी के अन्तर्गत वह बालिकाएं सम्मिलित होंगी, जिनका एक वर्ष के भीतर सम्पूर्ण टीकाकरण हो चुका हो तथा उनका जन्म एक अप्रैल, 2018 से पूर्व न हुआ हो। तृतीय श्रेणी के अन्तर्गत वह बालिकाएं आएंगी, जिन्होंने चालू शैक्षणिक सत्र के दौरान प्रथम कक्षा में प्रवेश लिया हो।

चौथी श्रेणी के तहत वह बालिकाएं सम्मिलित होंगी, जिन्होंने चालू शैक्षणिक सत्र के दौरान कक्षा छह में प्रवेश लिया हो। पंचम श्रेणी के अन्तर्गत वह बालिकाएं शामिल होंगी, जिन्होंने चालू शैक्षणिक सत्र के दौरान कक्षा नौ में प्रवेश लिया हो। छठवीं श्रेणी के अन्तर्गत वह बालिकाएं आएंगी जिन्होंने 12 कक्षा उत्तीर्ण कर चालू शैक्षणिक सत्र के दौरान स्नातक डिग्री या कम से कम 02 वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लिया हो।

कन्या सुमंगला योजना के तहत लाभार्थी का परिवार उत्तर प्रदेश का निवासी होना चाहिए। स्थायी निवास प्रमाण-पत्र के रूप में राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर पहचान पत्र, विद्युत, टेलीफोन का बिल मान्य होगा। किसी परिवार की अधिकतम दो ही बच्चियों को योजना का लाभ मिल सकेगा। लाभार्थी के परिवार में अधिकतम दो बच्चे हों। किसी महिला को द्वितीय प्रसव से जुड़वा बच्चे होने पर तीसरी संतान के रूप में लड़की को भी लाभ अनुमन्य होगा। यदि किसी महिला को पहले प्रसव से बालिका है व द्वितीय प्रसव से दो जुड़वा बालिकाएं होती हैं, तो केवल ऐसी अवस्था में ही तीनों बालिकाओं को लाभ मिलेगा। यदि किसी परिवार ने अनाथ बालिका को गोद लिया हो, तो परिवार की जैविक संतानों तथा विधिक रूप में गोद ली गई संतानों को सम्मिलित करते हुए अधिकतम दो बालिकाएं इस योजना की लाभार्थी होंगी। कन्या संमगला योजना के तहत प्रथम श्रेणी की लाभार्थी को एकमुश्त 2000 रुपये, द्वितीय श्रेणी की लाभार्थी को एकमुश्त 1000 रुपये, तृतीय श्रेणी की लाभार्थी को 2000 रुपये, चतुर्थ श्रेणी की लाभार्थी को 2000 रुपये, पांचवीं श्रेणी की लाभार्थी को एकमुश्त 3000 रुपये तथा छठी श्रेणी की लाभार्थी को 6000 रुपये दिए जाएंगे। योजना के तहत देय धनराशि लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। योजना के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों के दृष्टिगत मार्गदर्शिका में आवश्यक संशोधन और परिवर्तन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किए जाने का निर्णय भी लिया गया है।

वाराणसी में होगी फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना

महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों में तत्काल विवेचना कराकर दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए वाराणसी में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर पर फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की जायेगी। कैबिनेट ने शनिवार को इस फैसले पर अपनी मुहर लगाई। उल्लेखनीय है सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2014 में उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में अपर जिला व सत्र न्यायाधीश स्तर के एक-एक फास्ट ट्रैक कोर्ट के अलावा छह अतिरिक्त फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इस तरह प्रदेश में अपर जिला व सत्र न्यायाधीश स्तर के कुल 81 न्यायालय तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय के 81 न्यायालय स्थापित किये जाने का प्रस्ताव है। बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट की संस्तुति पर सपोर्टिंग स्टाफ समेत कुल 80 अपर जिला व सत्र न्यायाधीश के न्यायालय का गठन किया जा चुका है। शेष रह गये एक अपर जिला व सत्र न्यायाधीश स्तर के फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना वाराणसी में कराये जाने का निर्णय लिया गया है।

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरीडोर पर तेज दौड़ेगा सार्वजनिक परिवहन

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में भीड़भाड़ व प्रदूषण कम करने, नागरिकों की पहुंच बढ़ाने और क्षेत्र को आर्थिक विकास देने के लिए दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरीडोर में जुलाई, 2024 से लोगों के लिए 100 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार वाली सार्वजनिक परिवहन प्रणाली उपलब्ध होगी। रीजनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आरआरटीएस) की इस परियोजना को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। करीब 30,668 करोड़ रुपये की परियोजना में केंद्र की 6464 करोड़ रुपये के अंशदान के सापेक्ष प्रदेश की हिस्सेदारी 6237 करोड़ रुपये की होगी। 1216 करोड़ रुपये का भार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली पर आएगा, जबकि 16,480 करोड़ रुपये का ऋण लिया जाएगा और 270 करोड़ रुपये की निजी क्षेत्र की भागीदारी होगी। ऋण केंद्र सरकार लेगी और गारंटी व ऋण भुगतान भी केंद्र सरकार द्वारा ही किया जाएगा। परियोजना से जहां एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन के प्रदूषण रहित बेहतर साधन उपलब्ध हो सकेंगे, वहीं भविष्य में वाहनों के बढ़ते दबाव से भी राहत मिलेगी। आरआरटीएस रेल आधारित हाईस्पीड, उच्च आवर्ती क्षेत्रीय पारगमन प्रणाली है। इसकी डिजाइन गति 180 किलोमीटर प्रतिघंटा और औसत गति 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की है। इस परियोजना से श्रम व उद्योग की उत्पादकता में सुधार, अप्रत्यक्ष और प्रेरित रोजगारों का सृजन और इस क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि जैसे व्यापक आर्थिक लाभ भी मिल सकेंगे। इस हाईस्पीड नेटवर्क से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार आएगा, जबकि शहरी विकास के साथ क्षेत्र के नागरिकों के जीवन स्तर में भी सुधार आने की उम्मीद है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं को मिलेगी प्रोत्साहन राशि

कैबिनेट ने आंगनबाड़ी व मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं के लिए प्रोत्साहन योजना लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत एक माह में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को अधिकतम 1500 रुपये, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 1250 रुपये व सहायिका को 750 रुपये प्रोत्साहन धनराशि अतिरिक्त मानदेय के रूप में दी जाएगी। यह प्रोत्साहन योजना (परफॉर्मेन्स लिंक्ड इंसेन्टिव स्कीम) पहली फरवरी, 2019 से लागू होगी। एक फरवरी 2019 से 31 मार्च 2020 तक देय प्रोत्साहन राशि के मानक पुष्टाहार लाभार्थियों की आधार सीडिंग, पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों (पंजीकृत लाभार्थी बच्चों) का वजन एवं लम्बाई/ऊँचाई का माप लिए जाने तथा बच्चों के पोषण सुधार पर आधारित है। इन मानकों पर अच्छा प्रदर्शन करने वाली कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को प्रदर्शन के आनुपातिक आधार पर प्रोत्साहन राशि देय होगी। वर्ष 2020-21 एवं उसके बाद किन मानकों एवं मानदण्डों के आधार पर यह प्रोत्साहन धनराशि दी जाएगी, इसका निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है।

860 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगी गेहूं खरीद

रबी के मौजूदा सीजन में सरकार किसानों से पहली अप्रैल से 15 जून तक 1860 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदेगी। केंद्र सरकार ने प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1840 रुपये निर्धारित किया है। प्रदेश सरकार ढुलाई, छनाई और अन्य खर्चे के रूप में 20 रुपये अतिरिक्त देगी। आठ एजेंसियां केंद्रों पर गेहूं खरीद करेंगी। लक्ष्य 55 लाख मीट्रिक टन खरीद का है। खरीद के 72 घंटे के भीतर आरटीजीएस के जरिये किसानों के खाते में भुगतान हो जाएगा। इससे प्रदेश के 2.40 करोड़ किसान परिवारों को लाभ होगा। गेहूं क्रय केंद्र सुबह नौ से शाम छह बजे तक खुलेंगे।

2013-14 में 1400 रुपये थी एमएसपी : मालूम हो कि केंद्र में यूपीए सरकार के कार्यकाल के अंतिम वर्ष में गेहूं का समर्थन मूल्य 1400 रुपये था। 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने की प्रतिबद्धता के मद्देनजर भाजपा इसमें अब तक 440 रुपये की वृद्धि कर चुकी है। प्रदेश सरकार द्वारा बोनस या किसी अन्य रूप में देय धनराशि इससेअलग है।

दो वर्ष से रिकार्ड बना रही है सरकार : प्रदेश सरकार पिछले दो वर्षों से खरीद और भुगतान का रिकार्ड बना रही है। 2016-17 में सपा के शासनकाल में एमएसपी पर सिर्फ 7.97 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी। भाजपा के शासनकाल में 2017-18 और 2018-19 में क्रमश: 36.99 और 49.62 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हुई। इस बार सरकार अपने पहले के रिकार्ड को तोडऩे का लक्ष्य रखा है। यह 2016-17 की तुलना में करीब सात गुना होगा।

खादी पर इस महीने पांच फीसद की खास छूट

खादी उत्पादन का विकास व बिक्री बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 31 मार्च तक खादी वस्त्रों पर पांच फीसद की विशेष छूट प्रदान दी है। पहले से चल रही 20 फीसद की छूट को मिलाकर खादी वस्त्रों की कीमतों में अब 25 फीसद की कमी आ गई है। कैबिनेट से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में खादी वस्त्रों पर पांच फीसद की छूट दिए जाने को प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। खादी संस्थाओं के स्वयं के स्रोत से पहले ही ग्राहकों को 20 फीसद की छूट दी जा रही है। शासन से जारी सूचना में बताया गया कि प्रदेश में खादी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पिछले वर्षों से संचालित बिक्री पर छूट आधारित योजना के स्थान पर एक अक्टूबर, 2017 से उत्पादन पर छूट आधारित पं.दीनदयाल उपाध्याय खादी विपणन विकास सहायता शुरू की गई है। इसके तहत खादी संस्थाओं को उत्पादन लागत पर 15 फीसद सहायता अनुमन्य है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में खादी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस काम में परंपरागत रूप से लगे धुनकर, कत्तिन, बुनकर, रंगरेज व दर्जी सहित अन्य कमजोर वर्गों के ऐसे लोगों को रोजगार मिलता है, जिनके पास आय का अन्य कोई साधन नहीं है। प्रदेश में खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड व आयोग से वित्त पोषित मान्यता प्राप्त खादी संस्थाएं उत्पादन व बिक्री के काम में लगीं हैैं।

गोरखपुर में चीनी मिल की जमीन पर होगा बायो फ्यूल प्लांट

गोरखपुर में बंद पड़ी धुरियापार किसान सहकारी चीनी मिल्स लिमिटेड की 50 एकड़ भूमि पर अब बायो फ्यूल प्लांट की स्थापना होगी। कैबिनेट ने चीनी मिल की भूमि को लिग्नो सैलिलॉजिक बायोमास आधारित सेकेंड जनरेशन एथनॉल प्लांट (बायो फ्यूल प्लांट) की स्थापना के लिए 30 वर्ष की दीर्घकालीन लीज पर इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड, नई दिल्ली को दिये जाने का निर्णय लिया है। इंडियन ऑयल कारपोरेशन ने चीनी मिल की जमीन दीर्घकालीन लीज पर दिये जाने का प्रस्ताव दिया था। उप्र सहकारी चीनी मिल्स संघ लिमिटेड की प्रबंध कमेटी तथा निबंधक सहकारी चीनी मिल समितियों की अध्यक्षता में हुई बैठकों में लिये गये निर्णयों के आधार पर धुरियापार चीनी मिल की 50 एकड़ भूमि को इंडियन ऑयल कारपोरेशन को निर्धारित सर्किल रेट के पांच प्रतिशत प्रतिवर्ष के स्थान पर 2.5 प्रतिशत प्रतिवर्ष (भूमि के मूल्य का) की दर से लीज पर उपलब्ध कराने की संस्तुति की गई। चीनी मिल की भूमि पर बायो फ्यूल प्लांट की स्थापना के लिए करीब 800 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है। चीनी मिल की भूमि दीर्घकालीन लीज पर दिये जाने के बदले चीनी मिल संघ को लीज रेंट के रूप में हर वर्ष 65 लाख रुपये की आय होगी। इसके साथ ही क्षेत्र में रोजगार के साथ-साथ व्यवसायिक गतिविधियां भी शुरू होंगी। लीज की अवधि समाप्त होने के बाद इंडियन ऑयल कारपोरेशन विकसित परियोजना को चीनी मिल संघ को जहां है जैसा है के आधार पर वापस करेगा।

मझोला और रसड़ा की बंद चीनी मिलों का होगा कायाकल्प

पीलीभीत की मझोला और बलिया की रसड़ा स्थित बंद पड़ी चीनी मिलों का कायाकल्प होगा। कैबिनेट ने इनको इंटीग्रेटेड शुगर कांप्लेक्स के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है। इनमें चीनी के साथ ऊर्जा व डिस्टलरी की भी इकाईयां होंगी। इन मिलों की नये सिरे से नीलामी होगी। सफल निविदादाता को 30 साल की लीज पर यह मिलें दी जाएंगी। हर 10 साल पर सर्किल रेट के हिसाब से लीज की दर बढ़ेगी। हर इकाई में करीब 400-400 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इससे 17 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही 16000 से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के तीन साल बाद इंटीग्रेटेड शुगर कांपलेक्स को संचलन की स्थिति में लाना होगा। मालूम हो कि मझोला की मिल 2010-11 से और रसड़ा की मिल 2006-07 से बंद है।

एनसीआर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुधरेगा बिजली पारेषण

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और प्रदेश के पश्चिमी जिलों में बिजली का पारेषण तंत्र मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने 2267.33 करोड़ रुपये मंजूर किए हैैं। इस रकम से एनसीआर के साथ मेरठ व मुरादाबाद मंडल में उपकेंद्र व पारेषण लाइनें बनाई जाएंगी। उधर ओबरा तापीय परियोजना की देखरेख की लागत 260.66 करोड़ रुपये बढ़ाई गई है। कैबिनेट से पास हुए प्रस्ताव में संभल, हापुड़ के सिंभावली और मेरठ में पारेषण लाइनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसमें पहले पैकेज के तहत 626.69 करोड़ रुपये से रामपुर में 765 केवी उपकेंद्र और 413.79 करोड़ रुपये से संभल में 400 केवी उपकेंद्र व संबंधित लाइनों का निर्माण किया जाना है। दूसरे पैकेज के तहत 488.02 करोड़ रुपये से सिंभावली में 400 केवी उपकेंद्र व लाइनें तथा 738.83 करोड़ रुपये से मेरठ में 765 केवी उपकेंद्र व लाइनें बनाई जाएंगी। इन परियोजनाओं का निर्माण थ्री-पी पद्धति से टैरिफ बेस्ड कॉम्पटेटिव बिडिंग आधार पर केंद्र सरकार के निर्देशों के मुताबिक कराया जाएगा। दूसरी तरफ ओबरा परियोजना की 200 मेगावाट क्षमता की पांच इकाइयों की देखरेख की लागत 2400.23 करोड़ से बढ़ाकर 2660.89 करोड़ मंजूर की गई है। इसके अलावा पिछले दिनों अग्नि दुर्घटना का शिकार हुई इकाई संख्या 12 व 13 को बहाल करने को भी 185 करोड़ रुपये अनुमोदित किए गए।

नोएडा में वाणिज्यिक भूखंडों के भूतल पर ज्यादा कर सकेंगे निर्माण

नोएडा में वाणिज्यिक क्षेत्र में पंूजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नवीन ओखला औद्योगिक विकास क्षेत्र भवन (छठवां संशोधन) नियमावली 2019 की अधिसूचना जारी करने का निर्णय लिया गया है। होटल, बैंक और सिनेमा मल्टीप्लेक्स काम्प्लेक्स में भू-आच्छादन को यथावत 40 प्रतिशत ही रखा गया है। जबकि 5000 वर्ग मीटर से बड़े वाणिज्यिक भूखंडों में ही 50 प्रतिशत की सीमा तक भू-आच्छादन इस प्रतिबंध के साथ मंजूर किया गया है कि एट्रियम को भू-आच्छादन की गणना में शामिल किया जायेगा।

कूड़ा प्रबंधन के लिए मुफ्त दी जायेगी ग्राम समाज की भूमि

कैबिनेट ने नगर विकास विभाग को कूड़ा डपिंग ग्राउंड के लिए ग्राम समाज की भूमि मुफ्त में दिये जाने का निर्णय लिया है। प्रदेश में कुल 653 नगरीय स्थानीय निकाय हैं, जिनमें 17 नगर निगम, 198 नगर पालिका परिषद व 438 नगर पंचायतें हैं। बताया गया कि नगर निगम, नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों के वाणिज्यिक विभाग होने की स्थिति में उनके पक्ष में ग्राम पंचायतों की भूमि उपलब्ध होने के बावजूद नियमानुसार निशुल्क रूप से उन्हें पुनग्र्रहित किया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। इसके दृष्टिगत कूड़ा प्रबंधन के तहत कूड़ा डपिंग ग्राउंड के लिए नगर विकास विभाग को सेवारत विभाग की श्रेणी में रखते हुए ग्राम समाज की भूमि पांच सालों के लिए मुफ्त में उपलब्ध कराये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

प्रयागराज में बना भगवतपुर विकास खंड

प्रयागराज के अंतर्गत विकास खंड भगवतपुर के सृजन को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इससे जहां सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ नागरिकों को मिल सकेगा, वहीं योजनाओं का क्रियान्वयन और प्रभावी अनुश्रवण भी सुनिश्चित होगा। इससे विकास खंड तक लोगों की पहुंच भी सहज हो जाएगी।

जिला योजना समिति में बदले नाम

इलाहाबाद व फैजाबाद का नाम बदलकर क्रमश: प्रयागराज व अयोध्या किए जाने के बाद जिला योजना समिति नियमावली-2008 की अनुसूची में भी यह नाम बदले जाने को कैबिनेट ने शनिवार को मंजूरी दे दी है। राजस्व विभाग ने 18 अक्टूबर, 2018 को प्रयागराज और 23 नवंबर, 2018 को अयोध्या के नाम की अधिसूचना जारी की थी।

विकास प्राधिकरणों में 8700 ग्रेड पे वाले पदों पर योग्यता पर प्रमोशन

राज्य सरकार ने विकास प्राधिकरणों में ग्रेड वेतन 8700 रुपये या इससे अधिक के पदों पर पदोन्नति योग्यता के आधार पर करने का फैसला किया है। इसके लिए शनिवार को कैबिनेट ने उप्र विकास प्राधिकरण केंद्रीयित सेवा नियमावली, 1985 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके पहले विकास प्राधिकरण केंद्रीयित सेवा में पदोन्नति द्वारा भर्ती, अनुपयुक्त को अस्वीकार करते हुए ज्येष्ठता के आधार पर की जाती थी। कार्मिक विभाग की व्यवस्था के अनुसार 8700 रुपये ग्रेड पे या इससे अधिक के पदों पर योग्यता के आधार पर चयन किया जाता है। कार्मिक विभाग की व्यवस्था को अपनाते हुए यह निर्णय किया गया है।

नवनिर्मित डेयरी इकाइयों के संचालन की मंजूरी

कैबिनेट ने प्रदेश कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पीसीडीएफ)के सुदृढ़ीकरण और नवीनीकरण के तहत नवनिर्मित उच्चीकरण होने वाली डेयरी इकाईयों के संचालन की व्यवस्था को मंजूरी दी है। इसके तहत पीसीडीएफ द्वारा सात डेयरी इकाईयां (मेरठ, बरेली, लखनऊ, अयोध्या, मथुरा, कन्नौज और नोएडा) और नौ क्लस्टर दुग्ध संघों मुजफ्फरनगर, मेरठ, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, बरेली, लखनऊ, अयोध्या, गोंडा, देवीपाटन और बस्ती पर खास फोकस होगा। इन दुग्ध संघों में और शेष दुग्ध संघों में दूध एकत्रण का कार्य दुग्ध संघ करेंगे। इकाइयों का संचालन और विपणन कार्य पीसीडीएफ करेगा। शेष आठ डेयरी इकाइयां (आजमगढ़, गोरखपुर, कानपुर नगर, मुरादाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, झांसी और अलीगढ़) पट्टे पर दिए जाएंगे। पट्टेदारी के लिए नाबार्ड की सहयोगी संस्था नैबकान नाबार्ड कन्सलटेंसी सर्विसेज ट्रांजेक्शन एडवायजरी कंसलटेंट (टीएसी) होगी। पट्टे पर दी जाने वाले इकाइयों की शर्तें एवं प्रक्रिया के निर्धारण, अनुश्रवण, निर्णय और संस्तुति आदि काममुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी। अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री का होगा।

राजधानी सहित नौ शहरों में चलेंगी इलेक्ट्रिक बसे

वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए मंत्रिपरिषद ने प्रमुख शहरों में वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाने का निर्णय लिया है। पहले चरण में ये 580 बसें लखनऊ, प्रयागराज, आगरा, गाजियाबाद, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, मथुरा और शाहजहांपुर में चलेंगी। इनका संचालन ग्रॉस कॉस्ट कांटै्रक्ट मॉडल पर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत होगा। ऑपरेटर्स का चयन खुली निविदा के आधार पर होगा।  

कानपुर में स्पीच एंड हीयरिंग इंस्टीट्यूट को मुफ्त जमीन

कैबिनेट ने कानपुर स्थित ऑल इडिया इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग मैसूर के ऑफ कैंपस सेंटर की स्थापना के लिए निश्शुल्क भूमि उपलब्ध कराए जाने का निर्णय लिया है। भूमि का पुनग्र्रहण कर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के पक्ष में निश्शुल्क हस्तांतरित किया जाएगा।

मेरठ में चिकित्सालय ध्वस्तीकरण मंजूर

कैबिनेट ने प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना फेज-तीन के तहत राजकीय मेडिकल कॉलेज मेरठ में निर्मित सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सालय ब्लॉक के सुचारु संचालन के लिए इसकेबगल के पुराने भवन के ध्वस्तीकरण की मंजूरी दी है।

दोगुनी हुईं यात्रा में दैनिक भत्ते की दरें

कैबिनेट ने सरकारी कार्मिकों की यात्राओं के लिए वर्तमान में लागू दैनिक भत्ते की दरों को दोगुना करने का निर्णय लिया है। इससे जुड़े खर्चों के लिए भी वर्तमान में लागू दरों को दोगुना कर दिया गया है। यात्रा भत्ता की पुनरीक्षित दरों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। राज्य सरकार ने यात्राओं के लिए अधिकृत श्रेणी को पूर्ववत रखे जाने का निर्णय लेते हुए शासन में तैनात विशेष सचिवों को हवाईजहाज के इकोनॉमी क्लास में यात्रा के लिए अधिकृत किया है, चाहे वे वेतन मैट्रिक्स के किसी भी लेवल में कार्यरत हों। राजकीय कर्मचारियों को अनुमन्य यात्रा भत्ता की वर्तमान दरें प्रदेश में 31 मार्च, 2011 से लागू हैं। इस बीत सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य कर्मचारियों के लिए पुनरीक्षित वेतन संरचना दिनांक एक जनवरी, 2016 से लागू की जा चुकी हैं।

उप खनिज नियमावली संशोधित

कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) (46वां संशोधन) नियमावली-2019 को मंजूरी दे दी है। ईंट व मिट्टी की रॉयल्टी दर शून्य किए जाने तथा उसकी जगह विनियमन शुल्क लगाए जाने को लेकर नियमावली में संशोधन किया गया है। इस निर्णय से ईंट-भट्ठा का संचालन सहज होगा, जिससे जन सामान्य को निर्माण कार्यों के लिए ईंटें सुलभ होंगी।

60 साल में रिटायर होंगे होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड कार्मिक

उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार व अन्य कार्मिकों की अधिवर्षता आयु 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके लिए उप्र होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार एवं अन्य कर्मचारियों के विशेषाधिकार, वेतन तथा भत्ते और सेवा की अन्य शर्तों को विनियमित करने वाली नियमावली-1968 के नियम-31 के आधार पर नियम-29 में संशोधन के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया है।

कुशीनगर हवाई अड्डा हस्तांतरित

नागरिक उड्डयन विभाग तथा पर्यटन विभाग के नाम दर्ज कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की समस्त भूमि एवं अवस्थित संरचनाओं को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को स्थायी रूप से हस्तांतरित करने और इस बाबत एमओयू फाइनल करने का निर्णय कैबिनेट ने लिया है। साथ ही कुशीनगर हवाई अड्डे पर निर्मित व अवस्थित समस्त संरचनाओं को जरूरत के मुताबिक परिवर्तित या परिवर्धित करने के लिए भी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को प्राधिकृत किया गया है। कैबिनेट ने एमओयू में आवश्यकतानुसार परिवर्तन करने और कुशीनगर हवाई अड्डे के संबंध में अन्य बिंदुओं पर निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।

रज्जू भैय्या की याद में इलाहाबाद राज्य विवि का नामकरण

सहारनपुर में नये राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना और इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज' करने के मकसद से कैबिनेट ने शनिवार को उप्र राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश-2019 के मसौदे को मंजूरी दे दी है। प्रो.राजेंद्र सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघ चालक थे। फैजाबाद का नाम बदल कर अयोध्या किये जाने के कारण अध्यादेश के जरिये डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद के नाम में फैजाबाद की जगह अयोध्या कर दिया गया है।

गोरखपुर में बनेगा नया सूचना कार्यालय और प्रेस क्लब

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मस्थली गोरखपुर में नया सूचना कार्यालय और प्रेस क्लब भवन बनेगा। अब तक यह दोनों मंडल विकास निगम के भवन में ऊपर और नीचे की मंजिल पर थे। मंत्रिपरिषद ने फैसला लिया है कि निगम को भवन और भूमि के लागत की बची राशि का भुगतान करने के बाद राजस्व विभाग इस भूमि को निश्शुल्क सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के पक्ष में हस्तांतरित करेगा। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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