लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र को लेकर रविवार को समाजवादी पार्टी मुख्यालय में पार्टी के विधानमंडल दल की बैठक हुई जिसमें सत्र के दौरान सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा हुई। सपा अध्यक्ष और पार्टी के विधान मंडल दल के नेता अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और जसवंतनगर के विधायक शिवपाल सिंह यादव, सपा के वरिष्ठ नेता और रामपुर के विधायक मोहम्मद आजम खां और उनके विधायक पुत्र अब्दुल्ला आजम शामिल नहीं हुए।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आजम 20 मई को सीतापुर जेल से रिहा हुए थे। जेल में उनसे मिलने गए प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल रिहाई के समय भी आजम के साथ थे। अपनी उपेक्षा को लेकर सपा नेतृत्व पर निशाना साध चुके आजम और उनके पुत्र के बैठक में शामिल न होने से अखिलेश खेमे से पिता-पुत्र की तल्खी और पुख्ता हुई है। चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश के रिश्तों की खटास पहले ही जगजाहिर है।

विधानमंडल दल की बैठक में बजट सत्र के दौरान सरकार को महंगाई, बिजली कटौती, बेरोजगारी, महिलाओं-बच्चियों के साथ दुष्कर्म, राशन कार्ड निरस्तीकरण, किसान सम्मान निधि राशि की वसूली, गरीबों के उत्पीड़न और स्वास्थ्य व शिक्षा क्षेत्रों की बदहाली के मुद्दों पर घेरने पर चर्चा हुई। बैठक में बजट सत्र को 35 दिनों तक चलाने की मांग भी हुई ताकि बजट पर विस्तार से चर्चा हो सके।

बैठक में अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा राज में प्रदेश हर क्षेत्र में पिछड़ता चला गया है। भाजपा के सभी वादे झूठे निकले हैं। भाजपा सरकार ने बिजली का बिल आधा करने का वादा किया जिसके सापेक्ष विद्युत आपूर्ति ही आधी रह गई है। गरीबों के घरों को बुलडोजर से तोड़ा जा रहा है।

निर्दोषों को झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है। भाजपा सरकार विपक्षी दलों विशेष कर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं व नेताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर उन्हें परेशान कर रही है। जनता को भरमाने के लिए वाराणसी का मुद्दा उछाला जा रहा है।

Edited By: Umesh Tiwari