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यूपी में 200 ब्लड बैंकों और सैंपलों की ELISA टेस्ट अनिवार्य, खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन ने दिए निर्देश 

Published: Fri, 21 Aug 2026 11:21 PM (GMT+05:30)

उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने 200 चैरिटेबल ब्लड बैंकों की जांच के बाद नई गाइडलाइन जारी ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. 200 चैरिटेबल ब्लड बैंकों की जांच के बाद नई गाइडलाइन।

  2. सभी रक्त नमूनों की एलिसा या केमिलुमिनेमेंस जांच अनिवार्य।

  3. डोनर और प्राप्तकर्ता का आधार लिंक करना होगा।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। ब्लड बैंकों को संक्रमणमुक्त रखने एवं मरीजों को स्वस्थ ब्लड उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त ने विशेष अभियान चलाकर प्रदेश में चैरिटेबल सोसायटी द्वारा संचालित दो सौ ब्लड बैंकों की जांच की, जिसमें कई प्रकार की अनियमितताएं मिलने के बाद विभाग ने शुक्रवार को नई गाइडलाइन जारी की।

अब रक्त के बल्क ट्रांसफर एवं कंपोनेंट की आवश्यकता के बारे में भी बताना होगा। आपातकालीन स्थितियों को छोड़कर सभी ब्लड सैंपलों को संक्रमणमुक्त रखने के लिए सौ प्रतिशत जांच एलिसा या केमिलुमिनेमेंस तकनीक द्वारा जांच करना होगा।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन डा. रोशन जैकब की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रदेश के बाहर के केंद्रों से ब्लड एवं कंपोनेंट का बल्क ट्रांसफर लेने के दौरान मूल रक्त की 30 सेमी पायलट ट्यूब संलग्न प्राप्त करनी होगी। कम से कम एक प्रतिशत रक्त यूनिट को रैंडमली चेक करना होगा। ब

ल्क ट्रांसफर यूनिट के साथ ट्रांसफ्यूजन ट्रांसिमिसेबल इंफेक्शन जांच रिपोर्ट जमा करनी होगी। डोनर से लेकर मरीज तक के बीच ब्लड पहुंचाने की रिपोर्ट रखनी होगी। ब्लड ट्रांसफर से प्राप्त यूनिटों की जांच रिपोर्ट डाक्टर के पर्चे पर अंकित करना होगा।

चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित ब्लड बैंकों पर किसी एक परिवार का नियंत्रण न हो। आवेदन के साथ ट्रस्ट का पैन कार्ड एवं आयकर अधिनियम के तहत जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। ट्रस्ट की पिछले दो साल की धर्मार्थ गतिविधियों की रिपोर्ट जमा करनी होगी।

ब्लड डोनर का आधार कार्ड एवं इससे लिंक नंबर डोनर रजिस्टर में, जबकि रक्तग्राही अथवा तीमारदार का आधार कार्ड एवं लिंक नंबर इशू रजिस्टर में अंकित करना होगा। रक्त एवं कंपोनेंट को अलग-अलग तापमान पर सुरक्षित करते हुए इसके थर्मोग्राफ की रिपोर्ट भी मेंटेन करनी होगी।

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