लखनऊ [जितेंद्र शर्मा]। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 'अबकी बार तीन सौ पार' का नारा देकर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में अकेले ही 312 (सहयोगियों सहित 325) सीटें जीत ली थीं। फिर उसी जज्बे और जुनून के साथ भगवा दल ने चुनाव मैदान में 'अबकी बार साढ़े तीन सौ पार' का लक्ष्य साधकर ताल ठोंक दी है। इस दावे के साथ दम लगाने की भी पूरी रणनीति तैयार की गई है। पहली नजर उन करीब 80 सीटों पर है, जहां पिछले चुनाव में कमल नहीं खिल सका था। उन हारी सीटों के समीकरण बदलने के मिशन की जिम्मेदारी सरकार और संगठन के मुखिया यानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने ली है।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने विकास कराने में क्षेत्रीय संतुलन बनाने का पूरा प्रयास किया। एक जिला एक उत्पाद योजना से हर जिले को साथ लिया। उसी तर्ज पर एक जिला एक मेडिकल कालेज की नीति बनाई। विधानसभा क्षेत्रों को लेकर भी सरकार ने सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास की नीति अपनाई। अन्य सुविधाओं के अलावा हर विधानसभा क्षेत्र में एक पर्यटन स्थल विकसित किया जा रहा है।

सरकार की यह नीति संगठन को भरोसा दिलाती है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा प्रचंड बहुमत हासिल करेगी, लेकिन इसके बावजूद चुनावी रणनीति में सबसे अधिक फिक्र उन सीटों के लिए की गई है, जहां भाजपा प्रत्याशी हारे। ऐसे ही विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारियों के साथ पिछले दिनों संगठन की अहम बैठक हो चुकी है। उनसे जानकारी ली गई कि तब से अब तक वहां क्या स्थिति बदली है।

सोमवार को जब मुख्यमंत्री योगी पार्टी मुख्यालय पहुंचे तो यह जानकारी साझा की कि उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के साथ मिलकर उन सीटों पर विजय अभियान की जिम्मेदारी ली है, जहां 2017 में हार मिली थी। इसी के तहत पिछले दिनों कुशीनगर में जनसभा की। स्वतंत्र देव ने बताया कि पिछले चुनाव में कुछ सीटें बहुत कम अंतर से हारे। हारी सीटों का बारीकी से अध्ययन किया गया है। संगठन के कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। सभी क्षेत्रों में लगातार कार्यक्रम होंगे। उनमें मुख्यमंत्री और वह, दोनों पहुंचकर जनता से संवाद करेंगे।

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस