लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। साइबर इकोनामिक फ्रॉड के मामले में उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (यूपी एटीएस) की टीम ने रविवार को चीन के दो नागरिकों को गिरफ्तार किया था। एटीएस अब चीनी नागरिकों से गहनता से पूछताछ के लिए उन्हें पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी कर रहा है। एटीएस ने आरोपित चीनी नागरिक पोचंली टेंगली उर्फ ली टेंग ली और जू जुंफू को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। 

यूपी एटीएस ने सोमवार को लखनऊ कोर्ट में दोनों चीनी नागरिकों की 10 दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर किए जाने की अर्जी दी है, जिस पर 27 जनवरी को सुनवाई होगी। इसके साथ ही एटीएस दोनों से पूछताछ के लिए चाइनीज भाषा के जानकार की भी तलाश कर रही है। एक अधिकारी के अनुसार दोनों आरोपितों को अंग्रेजी भाषा ज्यादा नहीं आती है। फर्जी आइडी पर प्रीएक्टीवेटेड सिम कार्ड लेकर किए जा रहे करोड़ों के साइबर फ्राड की तह तक पहुंचने के लिए दोनों से पूछताछ बेहद अहम होगी। यही वजह है कि एटीएस बेहतर द्विभाषिये की तलाश कर रही है।

फर्जी आइडी से लिए गए सिम कार्ड के जरिये खोले गए आनलाइन खातों में रकम कहांं से आई और उसका इस्तेमाल कहां हुआ। फिलहाल एटीएस के सामने इन सवालों के जवाब ही सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। दोनों आरोपितों से पूछताछ में इस गिरोह की अहम कड़ियां सामने आने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि नोएडा की चाइनीज कंपनियों के अधिकारी आरोपितों के संपर्क में थे। वीजा अवधि सितंबर 2020 में समाप्त होने के बाद चीन के दोनों नागरिकों ने नोएडा व ग्रेटर नोएडा में अलग-अलग ठिकाने बनाए थे। ये ठिकाने कंपनियों के अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए थे। चाइनीज कंपनियों के अधिकारी भी जांच एजेंसी के निशाने पर हैं। 

बता दें यूपी एटीएस ने पिछले सप्ताह साइबर फ्रॉड करने वाले 14 लोगों को यूपी और दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ पर चीनी नागरिकों की जानकारी मिली। बीते रविवार को चीन के दो नागरिक पोचंली टेंगली उर्फ ली टेंग ली और जू जुंफू को नोएडा से गिरफ्तार किया गया। दोनों ने एक साल में फर्जी आइडी से एक हजार सिम खरीद कर गुरुग्राम स्थित एक चाइनीज होटल के मालिक को सप्लाई किए थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन सिम से आनलाइन खाते खोलकर साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया जाता था।

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