साल 2047 तक यूपी के हर व्यक्ति का होगा बीमा, तीन चरणों में बदलेगी स्वास्थ्य सेवा की तस्वीर
उत्तर प्रदेश सरकार ने अगले दो दशकों में प्रदेश के हर व्यक्ति को स्वास्थ्य बीमा से कवर करने की व्यापक ...और पढ़ें

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HighLights
2046-47 तक प्रदेश के हर व्यक्ति को स्वास्थ्य बीमा।
चिकित्सक अनुपात, बेड संख्या बढ़ाने और मृत्यु दर घटाने का लक्ष्य।
मातृ-शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने का प्रयास।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। आजादी के शताब्दी वर्ष में प्रदेश को हर क्षेत्र में अव्वल बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। इसका उद्देश्य प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।
अगले दो दशकों में इस कार्ययोजना पर निरंतर काम किया जाएगा। सबसे बड़ा लक्ष्य वर्ष 2046-47 तक प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति को स्वास्थ्य बीमा से कवर करना है, ताकि गंभीर बीमारियों के समय धनाभाव के कारण लोग अच्छे इलाज से वंचित न रहें।
इस लक्ष्य को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। विकसित यूपी@2047 विजन डाक्यूमेंट के अनुसार, प्रदेश की वर्तमान जनसंख्या में 43 प्रतिशत लोग स्वास्थ्य बीमा से आच्छादित हैं। वर्ष 2029-30 तक इसे 70 प्रतिशत, वर्ष 2035-36 तक 85 प्रतिशत और वर्ष 2046-47 तक 100 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या है महिला-पुरुषों का अनुपात?
राज्य व्यापक स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी (साचीज) की सीईओ अर्चना वर्मा के अनुसार, केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं के तहत अब तक 6.04 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे लगभग 10 करोड़ लोग स्वास्थ्य बीमा से लाभान्वित हो रहे हैं।लाभार्थियों में 52.27 प्रतिशत पुरुष और 47.73 प्रतिशत महिलाएं हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश की मौजूदा जनसंख्या लगभग 25 करोड़ है, जिसमें से 40 प्रतिशत लोग केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं में स्वास्थ्य बीमा से आच्छादित हो चुके हैं। वर्तमान में स्वयं से स्वास्थ्य बीमा कराने वालों की संख्या कुल आबादी का लगभग तीन प्रतिशत है।
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स्वास्थ्य विजन के तहत स्वास्थ्य व्यवस्था में क्रमिक सुधारों के साथ बदलाव का प्रस्ताव है। स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियाद को मजबूत करने के साथ-साथ नवाचारों को शामिल करते हुए इस क्षेत्र को आर्थिक रूप से समृद्ध किया जाएगा। विजन में प्रति 1000 की आबादी पर चिकित्सकों की संख्या को 1.2 करने का लक्ष्य है, जबकि वर्तमान में यह संख्या महज 0.52 है।
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इसके अलावा, प्रति 1000 की आबादी पर अस्पतालों में बेड की संख्या को दो से बढ़ाकर 3.5 करने, मातृ मृत्यु अनुपात को प्रति एक लाख पर 154 माताओं की मृत्यु से कम करते हुए सात पर लाने और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर (प्रति 1000 की जीवित जन्म पर) को 41 से घटाकर पांच करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
