फसल उत्पादकता में रिकार्ड वृद्धि से विकसित बनेगा उत्तर प्रदेश, चरणवार रणनीति पर किया जाएगा काम
UP In Agriculture: उत्पादकता बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा आधुनिक कृषि तकनीक और बेहतर बीज की उपलब्धता पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाएगा। इसके तहत हर ग्राम पंचायत में आधुनिक कृषि मशीनरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और कृषि में 75 प्रतिशत मशीनीकरण का प्रयास होगा।

फसलों के उत्पादन और उत्पादकता के लक्ष्य तय
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ: उत्तर प्रदेश के वर्ष 2047 तक विकसित बनाने में अकेले कृषि क्षेत्र से एक ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था के योगदान के लिए कृषि विभाग ने फसलों के उत्पादन और उत्पादकता के लक्ष्य तय कर लिए हैं।
विकसित उत्तर प्रदेश के लिए विकसित कृषि के सपने को फसलों की उत्पादकता में रिकार्ड वृद्धि के सहारे पूरा किया जाएगा। विभाग ने विभिन्न फसलों की उत्पादकता तें आठ से 41 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की बढ़ोतरी का लक्ष्य बनाया है, इसके लिए चरणवार रणनीति पर काम किया जाएगा।
प्रदेश सरकार ने विजन-2047 के तहत अन्य विभागों की तरह कृषि विभाग ने भी खेती में बड़े परिवर्तन की रूपरेखा तैयार की है। इसके लिए फसलों की उत्पादकता और उत्पादन में बढ़ोतरी की जाएगी। विभाग की द्वारा तैयार की जा रही कार्ययोजना में दलहन की उत्पादकता में आठ क्विंटल प्रति हेक्टेयर, तिलहन की उत्पादकता में नौ क्विंटल प्रति हेक्टेयर, गेहूं की उत्पादकता में 14 क्विंटल प्रति हेक्टयर और धान की उत्पादकता में 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की बढ़ोतरी का लक्ष्य तय किया गया है।
सबसे ज्यादा मक्का की उत्पादकता में 41 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की बढ़ोतरी करने की योजना है। इनके अलावा अन्य फसलों की उत्पादकता को 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाया जाएगा। विभाग चरणवार योजना के तहत हर फसली सीजन के हिसाब से लक्ष्य तय कर काम करेगा।
उत्पादकता बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा आधुनिक कृषि तकनीक और बेहतर बीज की उपलब्धता पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाएगा। इसके तहत हर ग्राम पंचायत में आधुनिक कृषि मशीनरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और कृषि में 75 प्रतिशत मशीनीकरण का प्रयास होगा। बेहतर बीज के लिए प्रदेश में पांच बीज पार्क स्थापित किए जाएंगे। साथ ही किसानों को प्रशिक्षित और जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे।
किसानों को समय से सही बोआई, सिंचाई प्रबंधन, कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की जानकारी दी जाएगी। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि वर्ष 2047 में जब उप्र की अर्थव्यवस्था छह ट्रिलियन डालर की होगी तो उसमें एक ट्रिलियन डालर का योगदान कृषि अर्थव्यवस्था का होगा, इसी लक्ष्य के तहत लक्ष्य निर्धारित कर काम किया जा रहा है।
फसल उत्पादकता में रिकॉर्ड वृद्धि से उत्तर प्रदेश एक विकसित राज्य बनेगा, जिसके लिए सरकार ने 'विकसित यूपी @2047' के तहत रणनीति बनाई है। इस योजना के तहत, सरकार 2030 तक फसल उत्पादकता में नंबर-1 बनने और 2047 तक वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनने का लक्ष्य रखती है, जिसका आधार कृषि और संबंधित क्षेत्रों में नवाचार और प्रौद्योगिकी का उपयोग है।
फसल उत्पादकता में वृद्धि के प्रमुख कारक
फसल उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि: गेहूं, चावल, दलहन और तिलहन जैसी मुख्य फसलों की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
तकनीकी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: ड्रोन-आधारित सटीक कृषि, जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे लागत कम हुई है और उत्पादन बढ़ा है।
कृषि अवसंरचना का विस्तार: भूमि सुधार, जल प्रबंधन, जैव उर्वरक प्रयोगशालाओं और कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क जैसे अवसंरचना का विस्तार किया गया है।
किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का उचित भुगतान: धान, गन्ना और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में लगातार वृद्धि हुई है।
कृषि विज्ञान केंद्रों और अनुसंधान को बढ़ावा: प्रदेश के 89 कृषि विज्ञान केंद्रों को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया जा रहा है और कुशीनगर में एक नया कृषि विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है।
इन प्रयासों के अपेक्षित परिणाम
आर्थिक विकास: कृषि और औद्योगिक विकास मिलकर उत्तर प्रदेश को एक प्रमुख विकास इंजन बनाएंगे।
रोजगार सृजन: एथेनॉल उत्पादन में वृद्धि से 1.7 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है, और भविष्य में और अधिक अवसर पैदा होंगे।
वैश्विक नेतृत्व: 2047 तक, उत्तर प्रदेश वैश्विक कृषि में एक रोल मॉडल बनकर उभरेगा और निर्यात के क्षेत्र में भी अग्रणी बनेगा।

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