लखनऊ, जेएनएन। माखी दुष्कर्म कांड की पीडि़ता के साथ हुई सड़क दुर्घटना के मामले की जांच सीबीआइ की जंबो टीम ने शनिवार को और तेज कर दी। जांच एजेंसी ने चार जिलों में दिनभर छानबीन की। सीतापुर जेल में बंद भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से टीम ने छह घंटे तक पूछताछ की। सीबीआइ के कई सवालों पर सेंगर चुप्पी साधे रहे। लखनऊ जेल में बंद सेंगर के भाई अतुल सिंह से भी लंबी पूछताछ हुई। एक टीम ट्रामा सेंटर भी गई। उन्नाव में भी पड़ताल जारी रही। उधर, फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर फिर साक्ष्य जुटाए।

सीबीआइ की एक टीम दोपहर करीब 1:50 बजे सीतापुर जेल पहुंची और विधायक सेंगर से लगभग छह घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान जेल के कई अभिलेख भी खंगाले। विधायक से सवाल-जवाब के दौरान सीबीआइ ने खासकर यह जानने का प्रयास किया कि उससे मिलने जेल में कौन-कौन लोग आते रहे हैं। सीबीआइ की एक टीम ने लखनऊ में बंद विधायक के भाई अतुल सिंह व एक करीबी से भी लंबी पूछताछ की। इसके अलावा उन्नाव पुलिस के प्रतिसार निरीक्षक सुभाष चंद्र मिश्रा, माखी थाने के ड्यूटी मुंशी इरशाद खान, पीडि़ता की सुरक्षा में लापरवाही के मामले में निलंबित गनर सुदेश कुमार, महिला सिपाही रूबी व सुनीता देवी समेत छह पुलिसकर्मियों से सुरक्षा के बारे में पूछताछ की गई। अब तक सामने आए तथ्यों का सीबीआइ सिलसिलेवार परीक्षण कर रही है। बयानों की कसौटी पर उन्हें परखा जा रहा है।

इस बीच, सीबीआइ ने ट्रक चालक आशीष व क्लीनर मोहन को तीन दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ शुरू की है। इससे पूर्व सीबीआइ ने लखनऊ स्थित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थनापत्र देकर ट्रक चालक व क्लीनर की पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग की। सीबाआइ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सात दिन में विवेचना पूरी करने का निर्देश दिया है। चालक व क्लीनर को मौके पर ले जाकर साक्ष्य एकत्र किए जाने हैं। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट आराधना शुक्ला ने दोनों की तीन दिन की रिमांड मंजूर कर दी।

इधर, सीबीआइ की एक टीम शनिवार को ट्रॉमा सेंटर भी गई। डॉक्टरों से पीडि़ता की स्थिति व उसकी चोटों के बारे में भी विस्तार से जानकारी हासिल की। उन्नाव में सीबीआइ घायल वकील के घर भी गई और माखी थाने पहुंचकर भी छानबीन की गई। 

खराब मिले जेल के सीसीटीवी कैमरे
सीबीआइ टीम ने सीतापुर जेल के सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाला। बताया गया कि तीन सीसीटीवी कैमरे खराब मिले। सीबीआइ ने इसे लेकर नाराजगी भी जताई। सीबीआइ की टीम जब जेल पहुंची, तब कई अधिकारी अपने आवास पर थे। बाद में सीबीआइ ने जेल अधिकारियों को बुलाया और उनसे कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी।

बुखार-निमोनिया की चपेट में दुष्कर्म पीडि़ता
किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती दुष्कर्म पीडि़ता की हालत गंभीर है। उसके फेफड़े में संक्रमण हो गया है। इसके चलते वह बुखार और निमोनिया की चपेट में आ गई है। उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। हादसे में मल्टीपल फ्रैक्चर से आंतरिक रक्तस्राव हुआ था। फेफड़े के बाहरी भित्त में करीब 150 मिमी रक्त था, उसे नली डालकर निकाल दिया गया, मगर खतरा टला नहीं। फेफड़े में संक्रमण हो गया है। प्रवक्ता डॉ. संदीप तिवारी के मुताबिक पीडि़ता के निमोनिया और बुखार पर लगातार नजर रखी जा रही है।

लखनऊ से सीबीआइ की तीन सदस्यीय टीम दुष्कर्म कांड की रिपोर्ट लेने उन्नाव के माखी थाना पहुंची। टीम ने यहां पर माखी गांव में पीड़िता तथा वकील के घर की सुरक्षा का भी जायजा लिया है। दिल्ली सीबीआइ के अधिकारियों ने माखी थाने के कई पुलिसकर्मियों से पूछताछ की। दरअसल, अप्रैल 2018 में शुरू हुए प्रकरण के दौरान माखी थाने में तैनात पुलिसकर्मियों और तब से वर्तमान तक थाना में तैनात रहे अधिकारियों को सीबीआइ ने पूछताछ के लिए बुलाया।

प्रमुख रूप से थाना प्रभारी, हल्का इंचार्ज और पीड़ित परिवार की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों से दिनभर पूछताछ की गई। सीबीआइ ने माखी थाने के 25 और हादसे के दिन पीड़िता की सुरक्षा में तैनात तीन पुलिसकर्मियों को बुलाया था। इसमें 19 महिला और नौ पुरुष पुलिसकर्मी शामिल थे। कई तत्कालीन पुलिसकर्मी भी बुलाए गए थे। सीबीआइ ने पीड़ित किशोरी व परिवारीजन को दी जा रही धमकियों व स्थानीय पुलिस की भूमिका के अलावा माखी दुष्कर्म कांड को लेकर भी पुलिसकर्मियों से सवाल किए।

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Posted By: Dharmendra Pandey

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