राज्य ब्यूरो, लखनऊ। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने गुरुवार को विधान परिषद में बताया कि उत्तर प्रदेश में 2000 मदरसे फर्जी तरीके से संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब भाजपा सरकार सत्ता में आई तो प्रदेश में 19000 मदरसे संचालित थे। मदरसों के संचालन में पारदर्शिता के लिए सरकार ने वेब पोर्टल पर उनका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया। वेब पोर्टल पर 17000 मदरसों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। शेष 2000 मदरसे अब तक सामने नहीं आए हैं। ये मदरसे फर्जी हैं।

लक्ष्मीनारायण गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी के परवेज अली के सवालों के जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि मदरसों में पहले सिर्फ पारंपरिक शिक्षा दी जाती थी। भाजपा सरकार ने इनमें एनसीईआरटी का कोर्स लागू किया। नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) भी लागू की है।

मंत्री ने कहा कि वर्ष 2018-19 के दौरान सरकार ने किसी भी मदरसे को अनुदान पर नहीं लिया है। फिलहाल पांचवीं और आठवीं कक्षा स्तर के 558 मदरसे अनुदानित हैं, जिनमें से कुछ का विवाद चल रहा है। अखिलेश सरकार ने 146 मदरसों को अनुदान सूची में शामिल करने की घोषणा की थी। 100 मदरसे ही अनुदान सूची में शामिल किये जा सके थे कि सपा सरकार ने नीति बदल दी, जिससे 46 मदरसे कोर्ट चले गए।

परवेज अली ने मंत्री से जानना चाहा कि क्या सरकार वर्ष 2022 तक कुछ और मदरसों को अनुदान सूची पर लेगी? यह भी जानना चाहा कि क्या सरकार मदरसों को जिला स्तर से मान्यता देने की पुरानी व्यवस्था बहाल करेगी? दोनों सवालों के स्पष्ट और संतोषजनक उत्तर न देने पर सभापति रमेश यादव ने सवाल को परिषद की प्रश्न एवं संदर्भ समिति को भेज दिया।

नियमावली में होगा संशोधन

शून्यकाल के दौरान शिक्षक दल के ध्रुव कुमार त्रिपाठी और निर्दल समूह के चेत नारायण सिंह ने मदरसों के प्रबंधकों द्वारा शिक्षकों-कर्मचारियों के उत्पीड़न का मामला उठाया गया। इस पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने कहा कि सरकार मदरसों को मान्यता देने की नियमावली में जल्दी संशोधन करेगी।

Posted By: Umesh Tiwari

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