कानपुर (जेएनएन)। बुंदेलखंड में मुसीबतों से घिरे, कर्ज में डूबे किसानों का भाग्य मानो उनसे रूठ गया है। खेतों में फसल उनकी आस बन खड़ी है लेकिन, बुंदेलखंड में सबसे बड़ी मुसीबत अन्ना मवेशी उनकी इन उम्मीदों को भी चर जा रहे हैं। महोबा व बांदा में दो किसान अपनी फसल अन्ना मवेशियों का निवाला बनने से इस कदर टूटे कि हताश होकर जिंदगी का साथ छोड़ दिया। महोबा में किसान ने फांसी लगा जान दे दी तो बांदा के किसान की सदमे से मौत हो गई। दोनों पर बैंक का कर्ज लदा था।

महोबा में खरेला निवासी उमाशंकर पांडेय (52) का शव सोमवार सुबह कमरे में फांसी पर लटकता मिला। छोटे भाई हनुमान के मुताबिक भाई ने अपने पूरे सात बीघा खेत में उड़द बोई थी। फसल तैयार थी। शनिवार रात खेत में कुछ अन्ना जानवर घुस गए और सारी फसल चर डाली। रविवार सुबह उमाशंकर जब खेत पहुंचे तो फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी। उमाशंकर तीन भाइयों में बड़े थे, उनकी शादी नहीं हुई थी। उन्होंने खेती के लिए इलाहाबाद बैंक से एक लाख 17 हजार रुपये का ग्रीन कार्ड बनवा रखा था। भाइयों का लोन माफ हो गया था, मगर उनका ऋण माफ नहीं हुआ था। थानाध्यक्ष खरेला ब्रजेश बहादुर सिंह ने बताया कि जांच की जा रही है।

उधर, बांदा के गांव लउआ कोंडर निवासी ननकवा निषाद (45) ने गेंहू की फसल बोई थी। उम्मीद लगा रही थी कि उपज अच्छी हो जाएगी तो बेटी के हाथ पीले कर देगा। घर से वह सोमवार सुबह खेत गए तो अन्ना जानवर फसल उजाड़ चुके थे। इससे उन्हें गहरा सदमा लगा। खेत से घर लौटे तो दरवाजे पर ही सीने में तेज दर्द होने के बाद गश खाकर गिर गए। परिजन जब तक उनको अस्पताल ले जाते तब तक उनकी मौत हो गई।

छोटे भाई गोरेलाल ने पुलिस को बताया कि ननकवा छह बीघा जमीन का किसान था। पिता ने आठ वर्ष पहले इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक मर्का से ट्रैक्टर खरीदने के लिए तकरीबन पांच लाख रुपये कर्ज लिया था जोकि बढ़कर 11 लाख हो गया है। एसडीएम बबेरू अवधेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं आया है। 

Posted By: Ashish Mishra

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