लखनऊ(जागरण संवाददाता)। कुंभ मेले में फर्जी टेंडर के नाम पर करोड़ों रुपये डकारने वाले दो जालसाजों को गोमतीनगर पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए जालसाजों में प्रतापगढ़ निवासी अनुज त्रिपाठी व राजेंद्र कुमार पाडेय हैं। उनके तीन साथी फरार हैं।

जालसाज खुद को पर्यटन विभाग का अधिकारी बताकर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म के साथ कंबल, चादर व तौलिया सप्लाई का फर्जी टेंडर निकालते थे। गैंग का मुख्य सरगना मनोज तिवारी इलाहाबाद के नैनी जेल में बंद है। एसएसपी कलानिधि नैथानी के अनुसार कुछ समय पहले पर्यटन विभाग का अफसर बन राजवीर सिंह नामक एक व्यक्ति ने कंबल, चादर और तौलिया सप्लाई का फर्जी टेंडर जारी किया। कुछ दिन बाद उसने एक डाक्यूमेंट्री के प्रबंधन और निर्देशन से संबंधित टेंडर जारी कर दिया। टेंडर के जारी होने के बाद लोग इसके आवेदन के लिए पर्यटन विभाग पहुंचने लगे, जिसके बाद मामले की जानकारी हुई।

नैनी जेल से चल रहा था फर्जी टेंडर से ठगी का कारोबार:

कुंभ मेले के नाम पर फर्जी टेंडर निकालकर करोड़ों की ठगी के मामले में पुलिस के हाथ अहम सुराग मिले हैं। सीओ गोमतीनगर चक्रेश मिश्र के मुताबिक, नैनी जेल में बंद गिरोह का मुख्य सरगना मनोज त्रिपाठी वहीं से ठगी का कारोबार संचालित कर रहा था। उसपर पहले से 30 अपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वह विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुका है। अनुज बैंक अकाउंट का पूरा काम देखता था, वह शिक्षा विभाग में बाबू है। दूसरा मनोज का मैनेजर अभियुक्त राजेंद्र पाडेय पर्यटन विभाग में टेंडर से संबंधित लोगों से सेटिंग कराता था। साथ ही मनोज को जेल में ही उसे मोबाइल फोन व सिमकार्ड भी उपलब्ध करा देता था। जेल से ही मनोज लोगों से सम्पर्क कर पर्यटन विभाग के टेंडर के बारे में बातचीत करता था। शिकार के जाल में फंस जाने के बाद उससे मोटी रकम वसूली जाती थी। तफ्तीश में पुलिस को कुछ ऐसे मोबाइल फोन नंबर मिले हैं, जो जेल में सक्त्रिय थे। पड़ताल में जुटे पुलिसकर्मियों ने नैनी जेल से कनेक्शन की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी है और अब जेल में छानबीन की तैयारी कर रहे हैं। पुलिस को नोएडा, कानपुर, दिल्ली व इलाहाबाद के कुछ मोबाइल फोन नंबर मिले हैं। ठगी के शिकार पीड़ितों ने पुलिस को कुछ नंबर उपलब्ध कराए हैं। मनोज के भाई अनुज व राजेंद्र के साथ इलाहाबाद निवासी उमाशकर, आलोक मिश्र, गौरव उपाध्याय भी टेंडर के नाम पर रुपये वसूलते थे। पर्यटन विभाग में तैनात प्रबंधक अक्षय नागर ने अज्ञात जालसाजों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत आइपीसी की अन्य धाराओं में गोमतीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वहीं जालसाज गिरोह ने मुंबई निवासी एक फिल्म स्टूडियो मालिक से भी पर्यटन विभाग की नौ डाक्यूमेंट्री फिल्म बनवाने के नाम पर 36 लाख रुपये ठगे थे। इस मामले में भी पीड़ित मुंबई निवासी संतोष उपाध्याय ने गोमतीनगर थाने में एफआइआर दर्ज कराई थी।

आरोपितों के कब्जे से कार बरामद:

पुलिस ने फरार अभियुक्त उमाशकर के कानपुर शारदानगर स्थित किराये के घर से एक टाटा कार भी बरामद की है। इस कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगा था। अब इस मामले में गोमतीनगर पुलिस फरार अन्य आरोपियों के बारे में पता लगा रही है।

ऐसे रची थी साजिश:

कुंभ मेला के नाम पर जालसाजों ने 2,727 करोड़ रुपये के फर्जी टेंडर निकाले थे। इसमें चादर व कंबल की सप्लाई के नाम पर दिल्ली के गिरधारी टेंट सर्विसेज के मालिक से दो करोड़ रुपये लिए गए थे। सोशल मीडिया के जरिए बड़े कारोबारियों से संपर्क साधने के बाद उन्हें झासे में लेकर ठगी की गई थी। हालाकि पीड़ितों ने जब पर्यटन महानिदेशक से संपर्क किया तो उन्हें ठगी की जानकारी हुई थी। विभाग के प्रबंध निदेशक संचालन अक्षय नागर ने गोमतीनगर थाने में 20 जुलाई की रात में एफआइआर दर्ज कराई थी।

Posted By: Jagran

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