लखनऊ [धर्मेद्र मिश्र]। डिजिटल युग में मोबाइल, लैपटाप और कंप्यूटर पर लोग अधिक देर तक काम कर रहे हैं। इसका सीधा असर आंखों पर पड़ रहा है। मोबाइल, लैपटाप या कंप्यूटर की रोशनी से आंखों की टियर फिल्म खराब हो रही है, इससे आंखों में सूखापन, खुजली, जलन, अनिद्रा, तनाव, चिड़चिड़ापन इत्यादि की शिकायतें भी आ रही हैं। अक्सर यह देखा जा रहा है की चार-पांच घंटे से भी अधिक देर तक डिजिटल स्क्रीन पर काम करने वाले लोगों की आंखों की रोशनी को भी नुकसान पहुंच रहा है। इससे उनके चश्मे का नंबर भी बढ़ रहा है। इसलिए नेत्ररोग विशेषज्ञों ने मोबाइल, लैपटाप या कंप्यूटर की रोशनी से आंखों की रक्षा के लिए टिपल-20 का फार्मूला निकाला है, जो आंखों को स्वस्थ रखने में मददगार है।

डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. पीके दुबे कहते हैं कि दर्जनों नेत्र रोगी रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं। ज्यादातर लोगों की टियर फिल्म प्रभावित हो रही है। आंसू तीन लेयर से बने होते हैं। इसमें सबसे ऊपरी लेयर आयली, मध्य की पानी युक्त व निचली लेयर म्यूकस होती है। आंखों की पलकें एक तरीके से वाइपर का काम करती हैं। वहीं टियर का काम आंखों की सफाई करना और म्यूकस व आयल का काम चिकनाहट बनाए रखना होता है। इससे आंखें सुरक्षित रहती हैं। मगर जब वे मोबाइल, लैपटाप या कंप्यूटर पर अधिक देर तक काम करते हैं, तो उसकी रोशनी से आंखों की टियर फिल्म डिस्टर्ब हो जाती है। इससे आंखों की चिकनाहट, सफाई का काम रुक जाता है। साथ ही आंसुओं का ड्रेनेज सिस्टaम भी ब्लाक हो जाता है। आंखों से कीचड़ निकलता है, जो बाद में कोने पर सूखकर कड़ा हो जाता है। आंखों में सूखापन बढ़ने से परदे में भी दिक्कत होने लगती है। रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगती है।

टिपल-20 से आंखों की रक्षा

डा. पीके दुबे कहते हैं कि आंखों का सूखापन दूर करने व टियर फिल्म को डिस्टर्ब होने से बचाने के लिए मोबाइल, कंप्यूटर या लैपटाप पर लगातार 20 मिनट काम करने के बाद अपने स्थान से 20 फीट की दूरी पर स्थित किसी प्वाइंट को एकटक करीब 20 सेकंड तक देखें। फिर पलकों को झपकाएं। उसके बाद पलकों के ऊपर हाथ की अंगुलियों से हल्का मसाज करें। साथ ही दिन में कई बार पीने वाले साफ पानी से आंखों पर छींटे मारें। इस फामरूले से मरीजों को जबरदस्त फायदा हो रहा है।

 

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