लखनऊ, [धर्मेन्द्र मिश्रा]। ट्रामा सेंटरों की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पाया गया है कि तमाम ट्रामा सेंटर तो नर्सिंग होम और क्लीनिक के लाइसेंस पर संचालित किए जा रहे थे। तथाकथित डाक्टरों और अफसरों के गठजोड़ से संचालित किए जा रहे ट्रामा सेंटर हजारों मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। अब पुरानी फाइलें खोली जा रही हैं। सरकार की सख्ती के बाद अब ट्रामा सेंटर पर कार्रवाई के साथ ही ऐसे अफसरों की गर्दन भी फंस सकती है जो ऐसे ट्रामा सेंटरों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।

इन अस्पतालों पर जारी थी कृपा: छापेमारी के दौरान लक्ष्य कैंसर अस्पताल का लाइसेंस नवीनीकृत नहीं मिला। मानक भी पूरे नहीं थे। काकोरी अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन, बगैर डाक्टर सिर्फ दो बेड के सहारे चल रहा था। हिंद हास्पिटल व ट्रामा सेंटर बिना पंजीकरण के चलता मिला। साधना हास्पिटल बिना पंजीकरण के संचालित पाया गया। यहां डाक्टरों की गैरमौजूदगी में गंभीर मरीज भर्ती मिले। हिमसिटी व चंद्रा हास्पिटल में स्टाफ एंबुलेंस, बायो मेडिकल वेस्ट सर्टिफिकेट, आपरेशन थिएटर इत्यादि मानक पूरे नहीं थे। माडर्न हास्पिटल एंड ट्रामा सेंटर में भी सीटी स्कैन, एक्सरे इत्यादि सुविधा नहीं थी। बता दें कि दैनिक जागरण इस फर्जीवाड़े के खिलाफ लगातार अभियान चल रहा है। 

मैंने हाल ही में जिम्मेदारी संभाली है। फाइलें निकलवाई जा रही हैं। देखा जाएगा कि किस आधार पर और किस कार्य हेतु इन अस्पतालों तथा ट्रामा सेंटरों को लाइसेंस जारी किए गए थे। इसके बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी। -डा. मनोज अग्रवाल, सीएमओ, लखनऊ

Edited By: Vikas Mishra