लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश में प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) संवर्ग के डाक्टरों के तबादले स्थानांतरण नीति को ताक पर रखकर किए गए। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से डाक्टरों ने शिकायत की तो अफसरों की करतूत का काला चिट्ठा खुल गया। किसी डाक्टर का तबादला दो-दो जिलों में कर दिया गया। तो किसी का 11 महीने में दोबारा दूसरी जगह भेज दिया गया।

वहीं लीवर ट्रांसप्लांट करा चुके डाक्टर को भी नहीं बख्शा गया। न दांपत्य नीति का पालन किया गया और न ही सेवानिवृत्त होने में चंद समय का। अब विरोध होने पर स्थानांतरण सूची में बदलाव किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का कहना है कि किसी भी डाक्टर का गलत तबादला नहीं होने देंगे। नियमों के अनुसार ही स्थानांतरण होगी। सूची बदली जाएगी।

डा. राजीव वैश्य प्रतापगढ़ में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, इनका स्थानांतरण वरिष्ठ परामर्शदाता जिला संयुक्त चिकित्सालय अमेठी और इसी पद पर जिला अस्पताल महोबा में कर दिया गया। वहीं डा. ओम प्रकाश वर्मा 15 साल से बलिया में बाल रोग विशेषज्ञ हैं। जनवरी 2021 में इन्हें ब्लड कैंसर हो गया। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में चल रहा है। कई पत्र लिखे लेकिन गौतम बुद्ध नगर या गाजियाबाद तबादला नहीं किया गया। जबकि इस बार भी आनलाइन आवेदन किया था, ताकि इलाज कराने में आसानी होगी।

लीवर ट्रांसप्लांट करवा चुके डा. सचिन गुप्ता का फरवरी 2020 में मथुरा में स्थानांतरण किया गया था। दो साल बाद ही मेरठ तबादला कर दिया गया। इनकी पत्नी मथुरा में तैनात हैं। न ही गंभीर बीमारी पर विचार किया गया न ही दांपत्य नीति का। वहीं डा. इंद्रेश चंद्र गुप्ता जिला चिकित्सालय सहारनपुर में कार्यरत हैं, इनकी पत्नी डा. सुचेता कुमारी कंसेल्टेंट डेंटल सर्जन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहारनपुर में तैनात हैं। इनकी पत्नी का तबादला एमएमजी जिला चिकित्सालय गाजियाबाद कर दिया गया। दांपत्य नीति का पालन नहीं किया गया।

डा. गौरांग गुप्ता का 11 महीने पहले ही मैनपुरी से इटावा तबादला किया गया था। अब उन्हें झांसी भेज दिया गया है। नियम के अनुसार एक डाक्टर तीन वर्ष तक एक जिले में रह सकता है। अकांक्षी जिले बलरामपुर में तैनात डा. शरत चंद्र गुप्ता के सेवानिवृत्त होने में 11 महीने बचे हैं। इन्हें पीलीभीत भेज दिया गया।

वहीं डा. शेखर यादव के भी रिटायरमेंट में दो साल से कम समय बचा है। इनका भी तबादला कर दिया गया। वहीं डा. यशपाल सिंह ने शिकायत की है कि उनके सहित सात डाक्टरों का प्रमोशन हुआ था। सिर्फ उन्हीं का तबादला बुलंदशहर से बरेली कर दिया गया। यही नहीं महानिदेशालय से केवल लेवल वन के डाक्टरों का स्थानांतरण हो सकता है लेकिन लेवल टू व लेवल थ्री के डाक्टरों का स्थानांतरण कर दिया गया।

छह अस्पतालों में डीएनबी व डिप्लोमा कोर्स की मान्यता फंसी : डिप्लोमेट आफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) व पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स की पढ़ाई कर रहे डाक्टरों के तबादले से इसकी मान्यता पर संकट छा गए हैं। खुद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेश अपर्णा उपाध्याय ने अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद को पत्र लिखकर छह अस्पतालों के 17 डाक्टरों के स्थानांतरण रद करने की सिफारिश की है। ताकि डीएनबी व दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट एमबीबीएस डिप्लोमा कोर्स की पढ़ाई कराई जा सके।

इसमें डा. श्यामा प्रसाद मुखर्ज (सिविल अस्पताल) में डीएनबी कोर्स चलाने के मानक के अनुसार कम से कम दो पीजी टीचर का होना जरूरी है। यहां हड्डी रोग विभाग के डाक्टर चंदन सिंह नेगी और जनरल सर्जरी के डा. राम किशोर गौतम का तबादला कर दिया गया। नेशनल बोर्ड आफ एग्जामिनेशन के नियमों का भी ध्यान नहीं रखा गया। इसी तरह बलरामपुर अस्पताल लखनऊ, एसएसपीजी अस्पताल वाराणसी, महाराणा प्रताप अस्पताल बरेली, यूएचएम अस्पताल कानपुर व टीबी सप्रू अस्पताल प्रयागराज के कुल 17 पीजी शिक्षकों का स्थानांतरण कर दिया गया।

मृतक डाक्टर का कर दिया स्थानांतरण : बाराबंकी के उप मुख्य चिकित्साधिकारी रहे डा. सुधीर चंद्रा का बीते 12 जून 2022 को निधन हो गया था। मृतक डाक्टर का अपर मुख्य चिकित्साधिकारी फतेहपुर के पद पर स्थानांतरण कर दिया गया।

Edited By: Umesh Tiwari