लखनऊ (जेएनएन)। नोटबंदी के खिलाफ आंदोलन की पहल करने वाली तृणमूल कांग्रेस ने यूं तो सभी प्रदेशों की राजधानी में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है, मगर 29 नवंबर को लखनऊ से प्रदर्शन की शुरूआत के पीछे के सियासी निहितार्थ खंगाले जा रहे हैं। कुछ माह के अंदर उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में लखनऊ से प्रदर्शन की शुरुआत को चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
पूर्व मंत्री व तृणमूल कांग्र्रेस के नेता मुकुल रॉय ने सोमवार को यहां प्रेस क्लब में पत्रकारों को बताया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 29 नवंबर को लखनऊ के 1090 चौराहे पर प्रदर्शन करेंगी। कहा कि नोटबंदी से पैदा हुई दुश्वारी में 74 लोगों की जान जा चुकी है। इस प्रदर्शन में हिस्सा के लिए सपा, बसपा और कांग्र्रेस व दूसरे दलों के नेताओं को न्योता भेजा है। कौन लोग हिस्सा लेते हैं, यह मंगलवार को साफ होगा। बताया कि सुबह 11 बजे से चार बजे शाम तक धरना चलेगा। बैंकों में लंबी लाइनों से लोगों की दुश्वारी के विरोध में लखनऊ के 1090 चौराहे पर प्रदर्शन से आधा शहर परेशानी में फंसेगा, कहीं और धरना-प्रदर्शन क्यों नहीं? इस पर मुकुल राय ने कहा कि प्रशासन ने प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, उन्हे यहां के लिए इजाजत मिली है। ऐसे में यहां धरना दिया जाएगा, मगर इससे जनजीवन बाधित न हो इसका ध्यान रखा जाएगा। रॉय ने कहा कि ममता बनर्जी नोटबंदी से देश की गरीब जनता की आवाज बनकर उभरी है। सबसे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया और विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मिलकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था।

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Posted By: Ashish Mishra