लखनऊ, जेएनएन। राजधानी के चौक स्थित चौपटिया निवासी चार साल की जुबैरिया जब अपनी मां के साथ आरएसएम अस्पताल गई तो उसे पता भी नहीं था कि वह कोरोना का शिकार हो गई है। दरअसल जुबैरिया की मां जुबैरा भी कोविड पॉजिटिव हो गई थी। उसके बाद दोनों को आरएसएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जुबैरिया कभी पूछती कि मुझे यहां क्यों भर्ती किया गया है तो उनके पिता बताते कि तुम खाना नहीं खाती। इसलिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जब खाने लगोगी तो डॉक्टर तुम्हें अस्पताल से छुट्टी दे देंगे। यह सोचकर जुबैरिया अपने मां के साथ करीब 11 दिनों तक भर्ती रही। बाद में इस नन्ही बच्ची ने कोरोना को हरा दिया। फिर उनके पिता उसको लेकर घर चले गए। सारा सामान पहले बाहर ही रखवा दिया गया। उसे धुलवाया गया, सैनिटाइज कराया गया। जिस कमरे में जुबैरिया को रहना था वह पहले ही सैनिटाइज था। इतनी छोटी होने के बाद भी जुबैरिया रूम में अकेले रही। बाद में उसे बताया गया कि कोरोना वायरस फैल रहा है। इसलिए किसी से नजदीक जाकर मिलना नहीं है, मुंह में मास्क लगाए रखना है। हाथ को सैनिटाइज करते रहना है।

नन्हीं गुड़िया के दिमाग में यह बात इस तरीके से बैठ गई कि उनके घर में जब कोई भी अब आता है तो वह बिना हाथ सैनिटाइज किए व मास्क लगाए अंदर नहीं जा सकता। वह खुद भी बहुत सतर्क रहती है। अपने हाथों को बार-बार धुलती रहती है। किसी के पास न जाकर दूर से बात करती है। अभिभावक के साथ बाहर निकलने पर मास्क लगाती है। जुबैरिया कहती है कि कोरोना जब मेरे जैसे बच्चे से हार गया तो सावधान रहकर हर कोई इसे हरा सकता है।

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