लखनऊ, जेएनएन। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर आज आम बीमारी हो चुकी है। हालांकि, इस रोग को इच्छाशक्ति और समय रहते बेहतर इलाज मिलने से हराया जा सकता है। लेकिन, कई बार महिलाएं शर्म और संकोच के कारण अपनी बीमारी किसी से साझा नहीं करती हैं। ऐसे में, बहुत सी महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की अंतिम स्टेज तक पहुंच जाती हैं। इसलिए समय पर जांच और इसका इलाज कराना बहुत जरूरी है। ये बातें, केजीएमयू के सर्जरी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गीतिका नंदा सिंह ने कहीं। 

वे गुरुवार को केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के अंतर्गत पांचवें दिन ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवर और ब्रेस्ट कैंसर से पीडि़त महिलाओं की मीट के दौरान चर्चा कर रही थीं। उन्होंने कहा कि ब्रेस्ट में होने वाली किसी भी तरह की गांठ के प्रति पूरी तरह से सजग रहने की जरूरत है। अगर ब्रेस्ट में किसी भी तरह की गांठ हो जिसमें दर्द न हो तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

बीमारी पता चलने के बाद न लें तनाव 

डॉ. गीतिका ने बताया कि बहुत से केस एडवांस स्टेज में आते हैं। ऐसे में सर्जरी ही एकमात्र उपाय रह जाता है। इसलिए ब्रेस्ट कैंसर की अर्ली स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है। वहीं अल्ट्रासाउंड और मेमोग्राफी आदि जांचों से भी प्रारंभिक स्टेज में कैंसर का पता चल सकता है। यह भी जरूरी है कि कैंसर पता चलने के बाद किसी तरह के तनाव में न रहें। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता क्षीण होती है, जिससे बीमारी ठीक होने के बजाय और बढऩे लगती है। 

कार्यक्रम में ब्रेस्ट कैंसर से जंग जीत चुकीं कुछ महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। इस मौके पर केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग के डॉ. भूपेंद्र सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

 

Posted By: Anurag Gupta

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