लखनऊ, जेएनएन। लखनऊ विवि के खाते से एक करोड़ से अधिक धनराशि हड़पने के मामले में हसनगंज पुलिस ने तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है। जालसाजों में नई दिल्ली निवासी बिजली मिस्त्री सुशील कुमार यादव, बिहार निवासी व्यापारी रोनित गुप्ता व टैक्सी चालक अमरेंद्र कुमार हैं। हालांकि पुलिस अभी एक रुपया भी नहीं बरामद कर सकी है। पकड़े गए रोनित गुप्ता की पत्नी भावना का नाम भी प्रकाश में आया है, वह अभी फरार है। खेल का मास्टरमाइंड बिहार निवासी मानस व दिल्ली निवासी पंकज जैन हैं, जिनकी पुलिस तलाश कर रही है।

लविवि की परीक्षा निधि से फर्जी चेक तैयार करके आरोपितों ने एक करोड़ नौ लाख बयासी हजार रुपये 11 फर्मों के माध्यम से निकाले। लविवि के कुलसचिव एसके शुक्ल ने अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिस मेसर्स दिव्या इलेक्ट्रिकल्स फर्म को पांच चेक के माध्यम से 49,93,524 रुपये इंडियन बैंक से दिए गए, उसका खाता जालसाज सुशील कुमार के नाम से निकला। सुशील ने बताया कि पंकज जैन उसे दिल्ली में मिला था और दस प्रतिशत धनराशि का लालच दिया। लालच में उसने अपने अकाउंट में पैसा स्थानांतरित करा लिया, शेष धनराशि पंकज जैन ने ले ली। पंकज जैन कहां रहता है सुशील को नहीं पता। फिलहाल उसने अपने मोबाइल नंबर भी बंद कर लिए हैं। अमरेंद्र ने बताया कि टैक्सी में फरार अभियुक्त मानस को बैठाया था, तभी उसने पांच प्रतिशत धनराशि का लालच देकर अकाउंट में रकम डाली और शेष 39,91,731 रुपये निकालकर फरार हो गया। रोनित गुप्ता ने बताया कि उसकी मेसर्स शाह एजेंसी फर्म है भाभी भावना गुप्ता के नाम से है, लेकिन संचालनकर्ता वह स्वयं है। रोनित को अमरेंद्र ने चेक दिया और उसने 19,94,805 रुपये निकालकर पांच प्रतिशत लेकर शेष धनराशि उसे दे दी।  

पुरानी चेक का क्लोन बनाकर ऐसे करते थे जालसाजी

सीओ महानगर सोनम कुमार ने बताया कि फरार मुख्य अभियुक्त पंकज जैन व मानस पुरानी चेकों का क्लोन बनाकर बिचौलियों के माध्यम से छोटे फर्मों के मालिकों को लालच देते हैं और खातों में रकम डलवाकर पांच से दस प्रतिशत उन्हें देकर शेष धनराशि लेकर फरार हो जाते हैं। 

बैंक स्टाफ की भी मिलीभगत, कई प्रदेशों से जुड़े तार

सीओ महानगर ने बताया कि जिन बैंक खातों से पैसा निकला है, उनके कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। गिरोह के तार उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त बिहार, दिल्ली, हरियाणा व मध्यप्रदेश समेत अन्य प्रदेशों से भी जुड़े हैं। 

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चार बैंक खातों में ट्रांसफर किए थे रुपये : जालसाजों ने लविवि के यूको बैंक के खाते की वर्ष 2000 में जारी हुई चेकबुक की 11 चेकों की क्लोनिंग करके 1,09,82,935 रुपये निकाले थे। उसके बाद छह फर्मों के खाते में सारा रुपया स्थानांतरित किया। जिन खातों में रुपया ट्रांसफर किया था, वह खाते दिल्ली और पटना स्थित पंजाब बैंक, इंडियन बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक में थे।

 

Posted By: Anurag Gupta

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