अयोध्या, जेएनएन।  सुप्रीम कोर्ट में मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर चल रही नियमित सुनवाई के बाद अचानक फिर से मध्यस्थता के नए राग से रामनगरी के संतों में बेचैनी है। संत समाज को संदेह है कि कहीं निर्णय की घड़ी में रोड़ा अटकाने की साजिश तो नहीं हो रही है। इसीलिए उन्हें मध्यस्थता का राग अलापना बेसुरा लग रहा है। 

रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास ने कहा कि मध्यस्थता से मंदिर-मस्जिद विवाद के समाधान की कल्पना तो सुखद लगती रही पर धरातल पर कोशिशें निराशाजनक रही हैं। नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने कहा, मध्यस्थता से मसले से हल की कोशिशें सैद्धांतिक तौर पर स्वागतयोग्य रही हैं। फिलहाल की कोशिश संदेह पैदा करने वाली है। सुनवाई के दौरान दूध का दूध और पानी का पानी हो रहा है, ऐसे में मध्यस्थता का औचित्य ही नहीं रह गया है। 

तपस्वी जी की छावनी के महंत परमहंसदास ने कहा, ऐसी कोशिश के पीछे मंदिर निर्माण में रोड़ा अटकाने की साजिश का अंदेशा हो रहा है। विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि मध्यस्थता का राग वे लोग छेड़ रहे हैं जो मुकदमे में संभावित हार से भयभीत हैं। मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे वशिष्ठ भवन के महंत डॉ. राघवेशदास ने कहा, इस दौरान मध्यस्थता का नया राग बेसुरा है। 

मुस्लिम छोड़ें मस्जिद का दावा  

 मंदिर निर्माण की मुहिम चलाने वाले मुस्लिम नेता बब्लू खान ने कहा, मुस्लिमों के पास अभी समय है और वे रामजन्मभूमि से मस्जिद का दावा छोड़ कर मिसाल कायम करें। इससे ङ्क्षहदुओं-मुस्लिमों के रूप में भारत मां के दोनों पुत्रों का बंधुत्व मुकर्रर होगा साथ ही राममंदिर के साथ राष्ट्रमंदिर की मीनार भी बुलंद होगी।

हमें अदालत पर पूरा भरोसा

बाबरी मस्जिद के पक्षकार मो. इकबाल ने इस मुद्दे पर कहा कि हमें अदालत पर पूरा भरोसा है। अदालत को यदि अभी भी लगता है कि मध्यस्थता से मसले का हल संभव है, तो हम उसके लिए भी तैयार हैं।

Posted By: Anurag Gupta

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