लखनऊ, (राफिया नाज)। मां बनने का अहसास एक महिला के लिए सबसे सुखद अनुभवों में से एक है। जब भी नार्मल डिलीवरी की बात आती है तो इसमें होने वाले लेबर पेन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इसकी वजह से आजकल कई महिलाएं नार्मल डिलीवरी को छोड़कर सिजेरियन को ज्यादा तरजीह दे रही हैं। वहीं अगर मां बनने से पहले ही हम कुछ योगाभ्यास की मदद लें तो डिलीवरी में होने वाले दर्द को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही योगाभ्यास से मां को होने वाले मानसिक तनाव, ब्लड प्रेशर आदि को नियंत्रित किया जा सकता है। बलरामपुर अस्पताल के योग विशेषज्ञ डॉ. एनएल यादव ने पेनलेस डिलीवरी के लिए किए जाने वाले आसन और उसके महत्व की जानकारी दी। 

योग विद्या आजकल एक बार फिर से टे्रंड में आ गई है। नियमित योगाभ्यास करने से न केवल आप फिट रहते हैं, बल्कि कई तरह की बीमारियों से भी दूर रहते हैं। वहीं नार्मल डिलीवरी के लिए महिलाएं योगाभ्यास गर्भवती होने से पहले से लेकर गर्भावस्था के पूरे होने तक कर सकती हैं। ध्यान रखने की बात यह है कि बिना चिकित्सीय परामर्श और योग विशेषज्ञ के इसे आप नहीं कर सकते हैं। 

योगासन करने के लाभ
योग करने से मां और बच्चे के दिमाग का विकास अच्छा होता है। इसके अलावा शरीर में रक्त संचरण अच्छा होता है। योगाभ्यास करने से पेल्विक मसल्स और हड्डी भी लचीली होती है। इससे डिलीवरी में आसानी होती है और दर्द भी कम होता है। 

शुरुआती तीन माह : गर्भावस्था के शुरुआती तीन माह तक चिकित्सीय परामर्श पर योगाभ्यास कर सकते हैं। इसमें  सूक्ष्म व्यायाम, अनुलोम विलोम, प्रणायाम, भ्रामरी प्रणायाम, रीढ़ की हड्डी का घुमावदार आसन एवं मेडिटेशन करना चाहिए।

चार से सात माह : चार से सात माह के बीच उत्तान पादासन, उध्र्वआसन, वज्रासन, उत्तान मंडूक आसन, कैट आसन, भद्रासन, बटर फ्लाई आसन, अद्र्ध उष्टासन, ताड़ासन, चंद्रासन, रीढ़ के घुमावदार आसन नाड़ी शोधन, प्रणायाम, ओम उच्चारण एवं ध्यान आदि।

आठ से नौवां माह : सूक्ष्म व्यायाम, हस्त उत्तान मंडूक आसन, ब्रजासन, भद्रासन, अद्र्ध उष्टासन, बटर फ्लाई, ताड़ासन, चंद्रासन, रीढ़ के घुमावदार आसन, नाड़ी शोधन प्रणायाम, अनुलोम विलोम प्रणायाम, ओम शब्द का उच्चारण, भ्रामरी प्रणायाम एवं ध्यान। 


सूक्ष्म व्यायाम- गर्दन को ऊपर-नीचे, दायें-बायें, क्लॉक वाइज और एंटी क्लॉक वाइज 16-16 बार घुमाएं। 
घुमावदार रीढ़ का व्यायाम- इसमें पीठ के बल लेटकर दोनों टांगों को घुटने से मोड़कर दायीं और बायीं घुमाएं। इसके चार स्टेप हैं। एक स्टेप में दोनों घुटने में थोड़ा फासला रखकर दायीं और बायीं ओर पांच-पांच सेकेंड तक रोकें। इसे 20 से 30 बार करें।
उत्तान पादासान- पीठ के बल लेटकर दोनों टांगें सीधा करके हवा में 10 से 15 सेकेंड तक रोकना है। इससे पेल्विक की मसल्स मजबूत होती है। साथ ही रक्त परिसंचरण अच्छा होता है। 
वज्रासन-नमाज की मुद्रा में दोनों पैर मोड़कर बैठें। इस आसन की खास बात यह है कि इसे खाना-खाने के बाद भी कर सकते हैं। 
उत्तान मंडुक आसन- यह ब्रजासन की तरह होता है। इसमें दोनों घुटनों के बीच दो फिट का फासला रखना होता है। वहीं दायीं ओर के हाथ को बायीं कंधे पर और बायें हाथ को दायें कंधे पर ले जाएं। 


कैट आसन- यह महत्वपूर्ण आसन है। इसमें हथेली के सहारे घुटने के बल झुकें। पहले आसन में सांस लेते हुए सिर को ऊपर और पेट के तरफ झुकाएं। दूसरे आसन में ठुड्डी को नीचे झुकाते हुए पीठ को उठाएं। इससे भी पेल्विक मसल्स मजबूत होती है। 


भद्रासन- इसमें दोनों टांगों को मोड़कर तलवों को आपस में मिलाकर हाथ को पैर के नीचे से लॉक कर दें। इसे 20-30 सेकेंड करना है। 
ताड़ासन- एडी उठाकर हाथ को ऊपर करके खिंचाव दें। 
नाड़ी शोधन- दायीं नाक बंद करके बायीं नाक से सांस छोड़े। इसी तरह से बायीं नाक को बंद करके दायीं नाक से सांस छोड़ें। इसे आप चार, 16, 8 और चार बार करनी चाहिए। 

इन्हें मिला लाभ
बलरामपुर अस्पताल में योग विशेषज्ञ की देखरेख में 24 वर्षीय निधि योगाभ्यास कर रही हैं। वे तीन माह की गर्भवती हैं। इसके अलावा ऐशबाग की रहने वाली परवीन ने भी नियमित योगासन किया, जिसके बाद लगभग तीन माह पहले नार्मल डिलीवरी से बच्ची को जन्म दिया। वहीं अमीनाबाद की रहने वाली सुमन की पहला सिजेरियन हुआ था। इसके बाद दूसरे बच्चे में उन्होंने शुरुआत से ही योग किया और उन्हें भी नार्मल डिलीवरी हुई।   

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Posted By: Anurag Gupta

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