लखनऊ, [राज्य ब्यूरो]। आखिरकार स्वास्थ्य विभाग की नजर इस व्यावहारिक समस्या पर चली ही गई। जिन मरीजों की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव हो, लेकिन अन्य जांच के आधार पर डाक्टर को मरीज कोरोना संक्रमित लग रहा हो, उनका इलाज नहीं हो पा रहा था। अब ऐसे मरीजों को प्रिजम्पटिव कोविड-19 मानते हुए कोविड अस्पताल में ही अलग वार्ड पर इलाज किया जाएगा। इस संबंध में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से आदेश जारी कर दिए गए।

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने अपने आदेश में कहा है कि पिछले कुछ सप्ताह से ऐसे अनेक रोगियों की जानकारी मिल रही थी, जिनकी कोरोना जांच रिपोर्ट नेगेटिव है, लेकिन इलाज करने वाले डाक्टर को लक्षणों, एक्सरे, सीटी स्कैन, खून की जांच आदि के आधार पर कोविड संक्रमित लग रहा हो। प्रिजम्पटिव डायग्नोसिस कोविड-19 वाले ऐसे मरीजों को कोविड अस्पतालों में इलाज नहीं मिल पा रहा। साथ ही नॉन कोविड अस्पतालों में भी इन रोगियों को कोविड के लक्षण होने की वजह से इलाज मिलने में कठिनाई हो रही है। इस संबंध में पिछले दिनों महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं ने विभिन्न विशेषज्ञों के साथ इन परिस्थितियों पर विचार-विमर्श किया। उसके आधार पर ही सहमति बनी है कि ऐसे रोगियों को भी कोविड संक्रमित रोगी की तरह इलाज दिया जाएगा। इन्हें कोविड अस्पताल में अलग वार्ड में रखा जाएगा।

भाजपा व‍िधायक ने दि‍ए एक करोड़ : शहर में कोरोना के बढ़ते संकट के बीच भाजपा के कैंट विधायक सुरेश चंद तिवारी ने अपनी विकास निधि से एक करोड़ रुपए देने के लिए मुख्य विकास अधिकारी को पत्र लिखा है। जिसके तहत चंदर नगर अस्पताल को कोरोना उपचार के उपकरण के लिए 75 लाख रुपए और छावनी परिषद को 25 लाख रुपए देने की मांग की गई है।

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