लखनऊ, जागरण संवाददाता। लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर बीते मंगलवार देर रात हुए हादसे में चेकिंग दलों पर अंगुलियां उठ रही हैं। आधा दर्जन टोल प्लाजा, दस जिलों के थाना क्षेत्र और दो राज्यों की सीमा को पार करती यह बस कैसे बाराबंकी तक पहुंच गई? कहां थे जिलों के प्रवर्तन दस्ते और थाना पुलिस? कैसे जिला-दर-जिला बस लांघती रही? 18 लोगों की मौत और गंभीर रूप से घायलों के लिए कौन जिम्मेदार है? परिवहन अधिकारी जो रूट बता रहे हैं वह यमुना और आगरा एक्सप्रेस-वे का है। बस संख्या यूपी 22 टी-7918 के चालानों को आधार माना जाए तो जेवर, आगरा, मथुरा, एडीए, लखनऊ और अहमदनगर मिलाकर करीब आधा दर्जन टोल प्लाजा से यह बस गुजरी। इनके बीच करीब दस जिले पड़े। दो राज्यों को पार करती हुई तीसरे प्रदेश बिहार में प्रवेश करने की तैयारी में थी कि इससे पहले ही हादसा हो गया।

प्रवर्तन दस्ते रहे मस्त, 32 चालान के बाद भी नहीं हाथ आई बसः परिवहन, पुलिस और ट्रैफिक कर्मियों की जुगलबंदी का ही नतीजा है कि यह बस लगातार टोल प्लाजा और राज्यों की सीमाएं लांघती हुई फर्राटा भरती रही। हिम्मत देखिए 32 चालान के बाद भी बस दौड़ रही थी। इस पर कौन जवाब देगा।

जांच अधिकारी ने एनएएचआइ को ठहराया जिम्मेदार: बाराबंकी में हादसे की जांच शुरू हो गई है। शुरुआती जांच में इस हादसे के लिए एनएचएआइ को जिम्मेदार ठहराया है। जांच अधिकारी उप परिवहन आयुक्त निर्मल प्रसाद के निर्देश पर बाराबंकी के एआरटीओ राहुल श्रीवास्तव ने एफआइआर दर्ज करा दी है। गुरुवार सुबह परिवहन विभाग के बाराबंकी एआरटीओ राहुल श्रीवास्तव ने दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर बस खराब होने के बाद करीब चार घंटे तक कल्याणी नदी के पुल पर ही बस खड़ी रही। इस दौरान एनएचएआइ के टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने न तो पेट्रोलिंग की, न ही हादसे में कोई मदद पहुंचाई। जबकि उसे वहां से हटाने की जिम्मेदारी एनएचएआइ की थी। उप परिवहन आयुक्त ने उक्त दोनों टोल प्लाजा से बसों का ब्योरा मांगा है।

बिना परमिट बस चलते मिली तो आरटीओ को चार्टशीट: हादसे में चेकिंग दस्ते की लापरवाही साफ दिख रही है। अगर प्रवर्तन टीम अलर्ट मोड पर होती तो करीब 140 सवारी लेकर बस आसानी से पंजाब से बिहार की ओर न जा रही होती। इस मसले पर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन दलों पर नकेल कसने की तैयारी कर रहे हैं।

इस सिलसिले में गुरुवार को मुख्यालय लखनऊ परिक्षेत्र के आरटीओ, एआरटीओ और यात्रीकर अधिकारियों की बैठक बुलाई गई। इसमें डीटीसी जोन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अब बिना परमिट के बस चलते मिली तो आरटीओ से जवाब तलब कर चार्टशीट दी जाएगी। बिना परमिट डग्गामारी कर रहे वाहनों के खिलाफ रोस्टर से ड्यूटी लगाकर नियमित चेकिंग कराई जाए। चेकिंग में सिर्फ चालान ही नहीं, फिटनेस और परमिट शर्तो के विरुद्ध वाहन जब्त किए जाने पर भी ठोस कार्रवाई करनी होगी।

दिल्ली और लखनऊ के रास्ते बिहार जा रही डग्गामार बसों का हब होगा ध्वस्तः दिल्ली के आनन्द विहार, कश्मीरी गेट और बिहार के पटना गांधी मैदान से डग्गामार बसों का संचालन होता है। इसे अनधिकृत संचालन का हब माना जाता है। राजधानी लखनऊ के हर प्रमुख क्षेत्र से टूरिस्ट परमिट पर बसें चलाई जाती हैं। लेकिन वाहन चालक इस परमिट का फायदा उठाते हैं और खुलेआम फुटकर सवारियां ढोते हैं। अब बाराबंकी बस हादसे के बाद इन बसों के हब को तोडऩे की चुनौती है। परिवहन आयुक्त मुख्यालय पर इसके लिए मंथन शुरू हो गया है। वहीं डग्गामारी पर नकेल कसने से रोडवेज बसों को फायदा होगा और यात्री सुरक्षित सफर कर सकेंगे।

Edited By: Vikas Mishra