लखनऊ (जेएनएन)। स्पोर्टस कॉलेज में दाखिले के नाम पर इस कदर लूट खसोट हुई कि अफसरों ने फर्जी एडमीशन तो किए ही, बच्चों की फीस भी हजम कर गए। बिना शुल्क जमा कराए ही बच्चों को हॉस्टल में सभी सुविधाएं प्रदान कर दी गईं। हैरत की बात है कि फर्जी दाखिलों से लेकर वित्तीय अनियमितताओं के मामले पर शासन के अधिकारी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।

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स्पोर्टस कॉलेज में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों के दाखिले को लेकर प्रमुख सचिव अनीता भटनागर जैन के निर्देश पर जो जांच हुई थी उसमें करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताएं पकड़ी गई थीं। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट था कि वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2015-16 तक में करीब 225 बच्चों के दाखिले किए गए। नियमानुसार सत्र के आरंभ होते ही प्रत्येक छात्र से विभिन्न मदों में शुल्क जमा कराया जाता है, लेकिन स्पोर्टस कॉलेज के जिम्मेदार अफसरों ने निर्धारित शुल्क जमा कराए बिना ही खेल प्रशिक्षण, शिक्षा और हॉस्टल की सुविधा प्रदान कर दी।

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एक छात्र पर साल भर में औसतन कॉलेज की ओर से सरकार करीब 83,000 हजार रुपये खर्च करती है। इनमें भोजन से लेकर, यूनिफार्म और खेल किट, खेल सामग्री पर व्यय, दवा और पाठ्य पुस्तकों और लेखन सामग्री पर खर्च किया जाता है। इस तरह बिना शुल्क जमा कराए छात्रों को सुविधाएं देने में सरकार के करीब सवा करोड़ रुपये खर्च हुए। मामला खुला और अफसरों को जांच होने की भनक लगी तो आनन-फानन कक्षा नौ के 103 छात्रों की फीस 22 जुलाई, 2015 को बैंक में जमा कराई गई।

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खेल निदेशक की जांच रिपोर्ट में सब कुछ स्पष्ट होने के बावजूद 13 महीने बाद भी शासन के अधिकारी कार्रवाई से कतरा रहे हैं। बुधवार को खेल मंत्री राम सकल गुर्जर ने जागरण से बातचीत में स्वीकार किया कि वाकई कुछ अधिक ही समय लग गया है। वह इस बारे में प्रमुख सचिव, खेल से बात करेंगे।

Posted By: Ashish Mishra

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